CBSE Order on LOC: एलओसी के नाम पर एक्स्ट्रा फीस मांगना गलत, नहीं रुके तो होगी कार्रवाई
Manya Jain | Apr 01, 2026, 12:38 IST
Cbse order on loc
सीबीएसई ने बोर्ड की दूसरी परीक्षा को लेकर सख्त आदेश दिया है। 10वीं LOC के नाम पर तीन महीने की ट्यूशन फीस मांगने वाले स्कूलों कड़ी पर सख्त कार्रवाई होगी।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में सभी स्कूलों के लिए कड़ा निर्देश जारी किया है। बोर्ड को शिकायतें मिली थीं कि 10वीं कक्षा की दूसरी बोर्ड परीक्षा (CBSE 10th exam) में शामिल होने वाले छात्रों से 'लिस्ट ऑफ कैंडिडेट' (List of Candidates - LOC) भरने के बदले तीन महीने की ट्यूशन फीस मांगी जा रही है।
सीबीएसई परीक्षा कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज ने इस सिस्टम को बोर्ड के नियमों का उल्लंघन बताया है। शिक्षा के बिजनेस और पेरेंट्स पर बढ़ते आर्थिक बोझ को रोकने के लिए बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को केवल निर्धारित परीक्षा शुल्क (Tution Fees) ही लेना चाहिए। आइए इस मामले और सीबीएसई के नए दिशा-निर्देशों को समझते हैं।
बोर्ड की जानकारी में आया है कि कुछ निजी और संबद्ध विद्यालय दूसरी बोर्ड परीक्षा के लिए एलओसी जमा करते समय छात्रों और उनके पेरेंट्स पर तीन महीने की ट्यूशन फीस (Tuition Fee) जमा करने का दबाव बना रहे हैं।
अवैध मांग: स्कूलों का तर्क है कि सत्र के अंत की फीस पहले जमा होनी चाहिए, जबकि बोर्ड का नियम कहता है कि एलओसी प्रक्रिया एक प्रशासनिक कार्य है जिसे ट्यूशन फीस से नहीं जोड़ा जा सकता।
पेरेंट्स की शिकायत: कई पेरेंट्स ने बोर्ड को पत्र लिखकर बताया कि फीस जमा न करने पर उनके बच्चों का नाम सूची में न भेजने की धमकी दी जा रही है।
बोर्ड की प्रतिक्रिया: सीबीएसई ने इसे "अनैतिक और अनधिकृत" प्रथा करार दिया है।
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए संस्था हेड को चेतावनी दी है। बोर्ड ने साफ तौर पर कहा है कि यदि कोई भी विद्यालय इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसकी संबद्धता (Affiliation) रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
अतिरिक्त शुल्क पर रोक: एलओसी जमा करने के संबंध में छात्रों से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त या अनधिकृत शुल्क (Unauthorized Fee) नहीं लिया जाना चाहिए।
केवल निर्धारित शुल्क: विद्यालयों को केवल वही परीक्षा शुल्क लेना है जो सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक परिपत्र (Circular) में निर्धारित किया गया है।
तत्काल प्रभाव से रोक: बोर्ड ने आदेश दिया है कि जो स्कूल ऐसी गतिविधियों में लिप्त हैं, वे इसे तत्काल प्रभाव से बंद करें।
'लिस्ट ऑफ कैंडिडेट' (LOC) वह जरूरी डॉक्यूमेंट है जिसके माध्यम से स्कूल बोर्ड को सूचित करते हैं कि उनके यहाँ से कितने छात्र परीक्षा में बैठने वाले हैं।
परीक्षा में बैठने का अधिकार: यदि किसी छात्र का नाम एलओसी में नहीं भेजा जाता, तो वह बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए एलिजिबल नहीं होता है।
डेटा की सटीकता: इसमें छात्र का नाम, विषय और अन्य जानकारी होती हैं। स्कूलों द्वारा फीस के लिए इस प्रक्रिया को रोकना छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
मानसिक तनाव: फीस की अवैध मांग से परीक्षा के समय छात्रों और उनके परिवारों पर अनावश्यक मानसिक तनाव (Mental Stress) पैदा होता है।
यदि आपके बच्चे का स्कूल एलओसी के नाम पर अतिरिक्त ट्यूशन फीस की मांग कर रहा है, तो आप ये कर सकते हैं।
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सीबीएसई परीक्षा कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज ने इस सिस्टम को बोर्ड के नियमों का उल्लंघन बताया है। शिक्षा के बिजनेस और पेरेंट्स पर बढ़ते आर्थिक बोझ को रोकने के लिए बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को केवल निर्धारित परीक्षा शुल्क (Tution Fees) ही लेना चाहिए। आइए इस मामले और सीबीएसई के नए दिशा-निर्देशों को समझते हैं।
सीबीएसई एलओसी (LOC) शुल्क विवाद: क्या है पूरा मामला?
अवैध मांग: स्कूलों का तर्क है कि सत्र के अंत की फीस पहले जमा होनी चाहिए, जबकि बोर्ड का नियम कहता है कि एलओसी प्रक्रिया एक प्रशासनिक कार्य है जिसे ट्यूशन फीस से नहीं जोड़ा जा सकता।
पेरेंट्स की शिकायत: कई पेरेंट्स ने बोर्ड को पत्र लिखकर बताया कि फीस जमा न करने पर उनके बच्चों का नाम सूची में न भेजने की धमकी दी जा रही है।
बोर्ड की प्रतिक्रिया: सीबीएसई ने इसे "अनैतिक और अनधिकृत" प्रथा करार दिया है।
परीक्षा नियंत्रक का कड़ा निर्देश
जारी हुए ये गाइडलाइन
केवल निर्धारित शुल्क: विद्यालयों को केवल वही परीक्षा शुल्क लेना है जो सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक परिपत्र (Circular) में निर्धारित किया गया है।
तत्काल प्रभाव से रोक: बोर्ड ने आदेश दिया है कि जो स्कूल ऐसी गतिविधियों में लिप्त हैं, वे इसे तत्काल प्रभाव से बंद करें।
छात्रों के लिए क्यों LOC जरूरी
परीक्षा में बैठने का अधिकार: यदि किसी छात्र का नाम एलओसी में नहीं भेजा जाता, तो वह बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए एलिजिबल नहीं होता है।
डेटा की सटीकता: इसमें छात्र का नाम, विषय और अन्य जानकारी होती हैं। स्कूलों द्वारा फीस के लिए इस प्रक्रिया को रोकना छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
मानसिक तनाव: फीस की अवैध मांग से परीक्षा के समय छात्रों और उनके परिवारों पर अनावश्यक मानसिक तनाव (Mental Stress) पैदा होता है।
एक्स्ट्रा ट्यूशन फीस मांगने पर क्या करें
- आधिकारिक शिकायत: सबसे पहले स्कूल प्रबंधन को लिखित में बोर्ड के नए आदेश का हवाला दें।
- सीबीएसई को रिपोर्ट: यदि स्कूल नहीं मानता है, तो सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- साक्ष्य सुरक्षित रखें: स्कूल द्वारा मांगी गई फीस की रसीद या लिखित मांग का प्रमाण अपने पास सुरक्षित रखें।
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