CBSE Periods Hygene Guidlines जारी, स्कूलों के लिए पैड्स, टॉयलेट मैनेजमेंट के नए नियम
Manya Jain | Mar 22, 2026, 21:03 IST
CBSE Periods Hygene Guidlines
सीबीएसई ने स्कूलों के लिए पीरियड्स स्वच्छता प्रबंधन (MHM) गाइडलाइंस 2026 जारी की हैं। जानें छात्राओं के लिए सैनिटरी पैड्स, टॉयलेट और वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियम लागू हैं।
सीबीएसई ने स्कूलों में पीरियड्स स्वच्छता के लिए नए नियम बनाए हैं। अब सभी स्कूलों को इन नई गाइडलाइंस का पालन करना होगा। इसका मकसद छात्राओं की पढ़ाई में आने वाली रुकावटों को दूर करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर बड़ा फैसला (Big decision of CBSE) सुनाया है। अदालत के अनुसार पीरियड्स में स्वास्थ्य सम्मान से जीने का अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बहुत जरूरी माना गया है। अब स्कूलों में छात्राओं की सुविधा (hygiene during menstruation) के लिए विशेष इंतजाम होंगे। पीरियड्स की वजह से किसी भी लड़की की पढ़ाई अब नहीं छूटेगी।
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सरकार इस मामले में किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। इसके लिए एक सख्त निगरानी प्रणाली (Monitoring System) तैयार की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस पर बड़ा फैसला (Big decision of CBSE) सुनाया है। अदालत के अनुसार पीरियड्स में स्वास्थ्य सम्मान से जीने का अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बहुत जरूरी माना गया है। अब स्कूलों में छात्राओं की सुविधा (hygiene during menstruation) के लिए विशेष इंतजाम होंगे। पीरियड्स की वजह से किसी भी लड़की की पढ़ाई अब नहीं छूटेगी।
स्कूलों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश
- अलग और साफ टॉयलेट: स्कूलों में लड़कियों के लिए पर्याप्त संख्या में अलग टॉयलेट होने चाहिए। इनमें साफ-सफाई के साथ-साथ हाथ-मुँह धोने और कपड़े धोने के लिए पानी की पूरी सुविधा होनी चाहिए।
- पीरियड्स के लिए खास कोना (MHM Corner): हर स्कूल में एक सुरक्षित और प्राइवेट 'MHM कॉर्नर' बनाया जाएगा। यहाँ छात्राओं को जरूरत पड़ने पर एकांत (Privacy) और जरूरी मदद मिल सकेगी।
- सैनिटरी नैपकिन का स्टॉक: स्कूलों को हमेशा अपने पास अच्छी क्वालिटी के सैनिटरी पैड रखने होंगे। अगर किसी छात्रा को अचानक जरूरत पड़ती है, तो स्कूल उसे तुरंत पैड उपलब्ध कराएगा।
- प्रदूषण मुक्त समाधान: स्कूलों को पर्यावरण का ध्यान रखने वाले (Biodegradable) पैड इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इससे स्वच्छता भी बनी रहेगी और प्रकृति को नुकसान भी नहीं होगा।
जागरूकता के लिए ट्रेनिंग
- प्रशिक्षण सत्र (Training Sessions): स्कूलों को छात्राओं के लिए पीरियड्स स्वास्थ्य और प्यूबर्टी (Puberty) के बारे में नियमित ट्रेनिंग सत्र आयोजित करने होंगे।
cbse periods hygene guidlines
- जेंडर सेंसिटिव चर्चा (Gender Sensitive Discussion): एनसीईआरटी (NCERT) और एससीईआरटी (SCERT) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों और छात्रों के बीच जेंडर संवेदीकरण पर चर्चा की जाएगी ताकि पीरियड्स (hygiene tips) से जुड़ी रूढ़ियों को खत्म किया जा सके।
- सपोर्टिव एनवायरनमेंट: स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह एक ऐसा वातावरण तैयार करे जहाँ छात्राएं बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी समस्याओं को साझा कर सकें।
वेस्ट मैनेजमेंट और डिस्पोजल
- इंसीनरेटर और डिस्पोजल बिन: स्कूलों में नैपकिन डिस्पोजल के लिए आधुनिक सुविधाएँ जैसे इंसीनरेटर (Incinerators) या विशेष डिस्पोजल बिन होने चाहिए।
- पर्यावरण अनुकूल समाधान: बायोडिग्रेडेबल उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि कचरा प्रबंधन आसान हो सके।
समय-समय पर होगा इंसपेक्शन
- जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का निरीक्षण: समय-समय पर स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि जमीन पर गाइडलाइंस का पालन हो रहा है या नहीं।
- मासिक रिपोर्ट (Monthly Compliance Report): सभी स्कूलों को 31 मार्च 2026 से 30 अप्रैल 2026 के बीच अपनी मंथ-वाइज कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी होगी।
- गूगल फॉर्म (Google Form): रिपोर्ट जमा करने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए सीबीएसई ने एक समर्पित गूगल फॉर्म लिंक एक्टिव किया है।
सीबीएसई MHM गाइडलाइंस 2026
- छात्राओं की अटेंडेंस: स्कूल में बेहतर सुविधाओं से छात्राओं की उपस्थिति (Attendance) में सुधार होगा।
- समान अवसर: पीरियड्स के दौरान होने वाली असुविधा को कम कर बराबरी का मौका देना।
- कानूनी अधिकार: आर्टिकल 21 के तहत स्वास्थ्य और सम्मान युवतिओं का अधिकार है।
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