Jawahar Lal Nehru Fellowship: राइटर्स और जर्नलिस्ट के लिए मौका, 2 साल तक हर महीने मिलेंगे एक लाख रुपए
Arohi Raj | Sootr Creatives | Oct 29, 2026, 15:48 IST
जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप में आवेदन का मौका।
अगर आप रिसर्च या पत्रकारिता में कुछ नया करना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के जरिए अपने प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिल सकता है। इस फेलोशिप के तहत चयनित उम्मीदवारों को दो साल तक हर महीने 1 लाख रुपए मिलते हैं। जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड की ओर से यह फेलोशिप दी जाती है।
इसके लिए साइंस, ह्यूमेनिटिज और दूसरे विषयों के एक्सपर्ट आवेदन कर सकते हैं। राइटर, पत्रकार, कलाकार और सरकारी अधिकारी भी इसके लिए योग्य हो सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट https://jnmf.in/fabout.html पर जानकारी देख सकते हैं।
क्या है
Jawahar Lal Nehru Fellowship की शुरुआत साल 1968 में हुई थी। इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की याद में की गई थी। इसका मकसद उच्च शिक्षा और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देना है। इसके जरिए रिसर्च को प्रोत्साहित किया जाता है।
इस फेलोशिप में उम्मीदवार अपने फेवरेट सब्जेक्ट पर काम कर सकते हैं। उन्हें समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर रिसर्च का अवसर मिलता है। वे अपने चुने हुए क्षेत्र में नए विचारों पर भी काम कर सकते हैं। उम्मीदवार भारत में अपनी पसंद की जगह से प्रोजेक्ट पूरा कर सकते हैं।
जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के लिए साल में दो बार आवेदन कर सकते हैं। पहला आवेदन प्रक्रिया 31 मई तक चलती है। दूसरा प्रक्रिया 11 नवंबर तक चलती है। इच्छुक उम्मीदवार दूसरे प्रक्रिया में आवेदन कर सकते हैं।आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर दिशा-निर्देश जरूर पढ़ें। इससे जरूरी दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी मिल जाएगी।
यह फेलोशिप साइंस और ह्यूमेनिटिज सहित कई विषयों के एक्सपर्ट्स के लिए है। इसके लिए कोई ऐज लिमिट तय नहीं की गई है। राइटर, पत्रकार और कलाकार भी आवेदन कर सकते हैं। सरकारी अधिकारी भी इस फेलोशिप के लिए योग्य हो सकते हैं।
आवेदक के पास अपने क्षेत्र में अच्छा काम करने की क्षमता होनी चाहिए। साथ ही उसे अपना चुना हुआ प्रोजेक्ट पूरा करने की लगन भी होनी चाहिए। आवेदन में उम्मीदवार को अपने काम और प्रस्ताव की जानकारी देनी होगी।
जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप की अवधि दो साल है। इस दौरान चयनित उम्मीदवार को हर महीने एक लाख रुपए मिलते हैं। यह राशि उम्मीदवार को अपने रिसर्च और प्रोजेक्ट पर काम करने में मदद करती है। फंड की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, स्टाइपेंड पर आयकर छूट मिलती है। यह छूट आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(17A) के तहत है।
इसके अलावा, कुछ अन्य खर्चों के लिए भी सहायता मिलती है। इसमें यात्रा और सचिवीय सहायता (Secretarial assistance) जैसे खर्च शामिल हैं। इन जरूरतों के लिए अधिकतम 75 हजार रुपए सालाना मिल सकते हैं। यह राशि स्टाइपेंड से अलग होती है।
इस फेलोशिप के लिए एक्सपर्ट्स की समिति उम्मीदवारों का चयन करती है। समिति अलग-अलग क्षेत्रों के जानकारों से मिलकर बनती है। चयन के दौरान उम्मीदवार की प्रतिभा और काम की गुणवत्ता देखी जाती है। इसके अलावा, प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर भी ध्यान दिया जाता है। समिति यह देखती है कि उम्मीदवार प्रोजेक्ट पूरा कर पाएगा या नहीं। इसलिए आवेदन में अपने विचार स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है।
1. सबसे पहले जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
2. वहां फेलोशिप से जुड़े सभी निर्देश ध्यान से पढ़ें।
3. अपना बायोडाटा और काम के अनुभव का विवरण तैयार करें।
4. अपने प्रस्तावित प्रोजेक्ट का सारांश लिखें।
5. हाल की पासपोर्ट साइज फोटो की कॉपी लगाएं।
6. सभी दस्तावेजों को एक साथ जोड़कर आवेदन तैयार करें।
7. इसके बाद आवेदन नीचे दिए गए पते पर भेज दें।
सचिव, जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड,
तीन मूर्ति हाउस, नई दिल्ली – 110 001
आवेदन भेजने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच कर लें। आवेदन की अंतिम तारीख और अन्य शर्तें आधिकारिक वेबसाइट से जरूर मिलाएं। इससे आवेदन प्रक्रिया में गलती होने की आशंका कम होगी।
FAQs
क्या है जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप ?
इस फेलोशिप में उम्मीदवार अपने फेवरेट सब्जेक्ट पर काम कर सकते हैं। उन्हें समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर रिसर्च का अवसर मिलता है। वे अपने चुने हुए क्षेत्र में नए विचारों पर भी काम कर सकते हैं। उम्मीदवार भारत में अपनी पसंद की जगह से प्रोजेक्ट पूरा कर सकते हैं।
साल में दो बार मिलता है आवेदन का मौका
कौन कर सकता है आवेदन?
आवेदक के पास अपने क्षेत्र में अच्छा काम करने की क्षमता होनी चाहिए। साथ ही उसे अपना चुना हुआ प्रोजेक्ट पूरा करने की लगन भी होनी चाहिए। आवेदन में उम्मीदवार को अपने काम और प्रस्ताव की जानकारी देनी होगी।
हर महीने मिलेगा एक लाख रुपए का स्टाइपेंड
इसके अलावा, कुछ अन्य खर्चों के लिए भी सहायता मिलती है। इसमें यात्रा और सचिवीय सहायता (Secretarial assistance) जैसे खर्च शामिल हैं। इन जरूरतों के लिए अधिकतम 75 हजार रुपए सालाना मिल सकते हैं। यह राशि स्टाइपेंड से अलग होती है।
कैसे होगा उम्मीदवारों का चयन?
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
- बायोडाटा: इसमें अपनी शैक्षणिक जानकारी और अब तक किए काम की जानकारी दें।
- काम का अनुभव: अपने क्षेत्र में किए गए काम की जानकारी दें। इसमें अपने अनुभव और उपलब्धियों का जिक्र कर सकते हैं।
- प्रोजेक्ट का सारांश: जिस विषय पर काम करना चाहते हैं, उसकी जानकारी दें। इसका सारांश अधिकतम एक हजार शब्दों का होना चाहिए। इसे डबल स्पेसिंग में टाइप करना होगा।
- पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदन के साथ हाल की फोटो की कॉपी लगाएं।
जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के लिए कैसे करें आवेदन?
2. वहां फेलोशिप से जुड़े सभी निर्देश ध्यान से पढ़ें।
3. अपना बायोडाटा और काम के अनुभव का विवरण तैयार करें।
4. अपने प्रस्तावित प्रोजेक्ट का सारांश लिखें।
5. हाल की पासपोर्ट साइज फोटो की कॉपी लगाएं।
6. सभी दस्तावेजों को एक साथ जोड़कर आवेदन तैयार करें।
7. इसके बाद आवेदन नीचे दिए गए पते पर भेज दें।
आवेदन भेजने का पता
तीन मूर्ति हाउस, नई दिल्ली – 110 001
आवेदन भेजने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच कर लें। आवेदन की अंतिम तारीख और अन्य शर्तें आधिकारिक वेबसाइट से जरूर मिलाएं। इससे आवेदन प्रक्रिया में गलती होने की आशंका कम होगी।
FAQs
- क्या जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया क्या है?
जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सभी निर्देशों को ध्यान से पढ़ना होगा। इसके बाद, बायोडाटा, काम का अनुभव, प्रस्तावित प्रोजेक्ट का सारांश, और हाल की पासपोर्ट साइज फोटो सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों को एकत्रित करके आवेदन भेजना होगा। - जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप का चयन कैसे होता है?
जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के लिए चयन एक एक्सपर्ट समिति द्वारा किया जाता है, जो उम्मीदवारों की प्रतिभा, काम की गुणवत्ता और प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर ध्यान देती है। समिति यह सुनिश्चित करती है कि उम्मीदवार अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने में सक्षम होगा। - जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप में स्टाइपेंड की राशि क्या है?
जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के तहत चयनित उम्मीदवारों को हर महीने एक लाख रुपए का स्टाइपेंड मिलता है, जो दो साल की अवधि के लिए दिया जाता है। इसके अलावा, यात्रा और सचिवीय सहायता के लिए अतिरिक्त फंड भी उपलब्ध है।
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