हामिद अंसारी ने दोहराया नेहरू का बयान, बोल- हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को बताया असली खतरा
Sandeep Kumar | Sept 19, 2026, 19:35 IST
हामिद अंसारी और नेहरू
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू का पुराना बयान दोहराया। अंसारी ने कहा, भारत को असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं था। उनके मुताबिक असली खतरा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से था। यह बात उन्होंने एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में कही।
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू का पुराना बयान दोहराया है।
अंसारी ने कहा, भारत को असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं था।
उनके मुताबिक असली खतरा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से था।
यह बात उन्होंने एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में कही।
हामिद अंसारी ने यह बयान तीसरे एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में दिया।
यह लेक्चर अब्दुल गफूर नूरानी के जीवन और काम पर आधारित था।
कार्यक्रम का शीर्षक था रिमेंबरिंग अ पॉलीमैथ, द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ अब्दुल गफूर नूरानी।
यह आयोजन नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में हुआ।
अंसारी ने नूरानी की 2019 में छपी किताब का जिक्र किया। किताब का नाम था
द आरएसएस (RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh), अ मेनेस टू इंडिया।
उन्होंने कहा कि यह शायद नूरानी की आखिरी बड़ी किताब थी।
अंसारी ने इसे आकार और सामग्री, दोनों के लिहाज से अहम बताया।
अंसारी के मुताबिक नूरानी ने किताब की भूमिका में दो उर्दू शेर लिखे थे।
इनके जरिए नूरानी ने अपने विचार साफ तौर पर रखे।
अंसारी ने कहा कि नूरानी ने अपना वैचारिक मकसद कभी नहीं छिपाया।
अंसारी ने बताया कि नूरानी ने इसे भारतीय मुसलमानों की मौजूदा भावना भी बताया था।
यह टिप्पणी भी किताब की भूमिका में ही दर्ज है।
अंसारी ने नेहरू के एक पुराने बयान का हवाला दिया।
यह बयान पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया के दस्तावेज में दर्ज है।
यह दस्तावेज विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक से जुड़ा था।
अंसारी ने कहा कि नेहरू ने उस बैठक में एक चेतावनी दी थी।
उन्होंने नेहरू के हवाले से कहा नेहरू ने चेतावनी दी थी
कि भारत को असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से था।
अंसारी ने इसके बाद नूरानी के लेखन पर भी बात की।
उन्होंने राष्ट्रवाद, पहचान और भारत के राजनीतिक घटनाक्रम पर नूरानी के विचारों का जिक्र किया।
अंसारी ने नागरिक राष्ट्रवाद को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में नए रुझान और तौर-तरीके उभरे हैं।
ये रुझान नागरिक राष्ट्रवाद के स्थापित सिद्धांत को चुनौती देते हैं।
उनके मुताबिक इसकी जगह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नई और काल्पनिक व्यवस्था लाई जा रही है।
अंसारी ने कहा यह चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत के रूप में पेश करना चाहता है
और राजनीतिक सत्ता पर एकाधिकार करना चाहता है।"
यह आस्था के आधार पर नागरिकों में भेद करना चाहता है।
यह असहिष्णुता को बढ़ावा देता है, दूसरों को अलग बताता है और बेचैनी व असुरक्षा पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि इसके कुछ हालिया रूप डराने वाले हैं। ये भारत के कानून के शासन के दावे पर भी सवाल खड़े करते हैं।
अंसारी ने कहा, यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देना होगा। इन रुझानों का विरोध करना जरूरी है।
इनका विरोध कानूनी और राजनीतिक, दोनों तरीकों से होना चाहिए।
अंसारी ने नूरानी के योगदान को श्रद्धांजलि के तौर पर याद किया।
उन्होंने नूरानी को लेखक, संवैधानिक विशेषज्ञ और राजनीतिक टिप्पणीकार बताया।
नूरानी ने संवैधानिक मामलों, इतिहास और राजनीति पर कई किताबें लिखीं।
उन्होंने धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यक अधिकारों और शासन से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से लिखा था।
अंसारी का यह बयान एक साहित्यिक कार्यक्रम में आया है, न कि किसी राजनीतिक मंच से।
इसके बावजूद यह बयान राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता की बहस को फिर चर्चा में ले आया है।
उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू का पुराना बयान दोहराया है।
अंसारी ने कहा, भारत को असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं था।
उनके मुताबिक असली खतरा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से था।
यह बात उन्होंने एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में कही।
लेक्चर में अंसारी का बयान
यह लेक्चर अब्दुल गफूर नूरानी के जीवन और काम पर आधारित था।
कार्यक्रम का शीर्षक था रिमेंबरिंग अ पॉलीमैथ, द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ अब्दुल गफूर नूरानी।
यह आयोजन नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में हुआ।
RSS पर किताब का जिक्र
द आरएसएस (RSS – Rashtriya Swayamsevak Sangh), अ मेनेस टू इंडिया।
उन्होंने कहा कि यह शायद नूरानी की आखिरी बड़ी किताब थी।
अंसारी ने इसे आकार और सामग्री, दोनों के लिहाज से अहम बताया।
अंसारी के मुताबिक नूरानी ने किताब की भूमिका में दो उर्दू शेर लिखे थे।
इनके जरिए नूरानी ने अपने विचार साफ तौर पर रखे।
अंसारी ने कहा कि नूरानी ने अपना वैचारिक मकसद कभी नहीं छिपाया।
अंसारी ने बताया कि नूरानी ने इसे भारतीय मुसलमानों की मौजूदा भावना भी बताया था।
यह टिप्पणी भी किताब की भूमिका में ही दर्ज है।
नेहरू के बयान का जिक्र
यह बयान पूर्व विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया के दस्तावेज में दर्ज है।
यह दस्तावेज विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक से जुड़ा था।
अंसारी ने कहा कि नेहरू ने उस बैठक में एक चेतावनी दी थी।
उन्होंने नेहरू के हवाले से कहा नेहरू ने चेतावनी दी थी
कि भारत को असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से था।
अंसारी ने इसके बाद नूरानी के लेखन पर भी बात की।
उन्होंने राष्ट्रवाद, पहचान और भारत के राजनीतिक घटनाक्रम पर नूरानी के विचारों का जिक्र किया।
राष्ट्रवाद पर चिंता जताई
ये रुझान नागरिक राष्ट्रवाद के स्थापित सिद्धांत को चुनौती देते हैं।
उनके मुताबिक इसकी जगह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नई और काल्पनिक व्यवस्था लाई जा रही है।
अंसारी ने कहा यह चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत के रूप में पेश करना चाहता है
और राजनीतिक सत्ता पर एकाधिकार करना चाहता है।"
अंसारी ने आगे कहा
यह असहिष्णुता को बढ़ावा देता है, दूसरों को अलग बताता है और बेचैनी व असुरक्षा पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि इसके कुछ हालिया रूप डराने वाले हैं। ये भारत के कानून के शासन के दावे पर भी सवाल खड़े करते हैं।
अंसारी ने कहा, यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देना होगा। इन रुझानों का विरोध करना जरूरी है।
इनका विरोध कानूनी और राजनीतिक, दोनों तरीकों से होना चाहिए।
नूरानी की किताब और लेखन
उन्होंने नूरानी को लेखक, संवैधानिक विशेषज्ञ और राजनीतिक टिप्पणीकार बताया।
नूरानी ने संवैधानिक मामलों, इतिहास और राजनीति पर कई किताबें लिखीं।
उन्होंने धर्मनिरपेक्षता, अल्पसंख्यक अधिकारों और शासन से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से लिखा था।
अंसारी का यह बयान एक साहित्यिक कार्यक्रम में आया है, न कि किसी राजनीतिक मंच से।
इसके बावजूद यह बयान राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता की बहस को फिर चर्चा में ले आया है।
- हामिद अंसारी ने नूरानी लेक्चर में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत को असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं था। - उनके मुताबिक असली खतरा हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से था।
- यह बात उन्होंने नेहरू के पुराने बयान के हवाले से कही।
- अंसारी का बयान कहां और किस मौके पर आया?
यह बयान तीसरे एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में आया। - कार्यक्रम नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में हुआ।
- यह अब्दुल गफूर नूरानी के जीवन और काम पर केंद्रित था।
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