ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, तो शोषण कैसे कर सकते हैं', नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

Sanjay Dhiman | Sept 28, 2026, 18:34 IST
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ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, तो शोषण कैसे कर सकते हैं'- नरोत्तम मिश्रा<br>
ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, तो शोषण कैसे कर सकते हैं'- नरोत्तम मिश्रा

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी में ब्राह्मण सम्मान समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की खामोशी को कमजोरी समझना भूल होगी। मिश्रा ने सवाल उठाया कि ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, तो शोषण का आरोप कैसे लगता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से ब्राह्मण एकता की अपील भी की। उन्होंने संयम के साथ तैयारी भी जरूरी बताई।

नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मण समाज को एकजुट होने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि खामोशी को कमजोरी समझना भूल होगी।

पूर्व गृह मंत्री मिश्रा शिवपुरी के ब्राह्मण सम्मान समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की खामोशी को कमजोरी समझना भूल होगी। मिश्रा ने सवाल उठाया कि ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, तो शोषण का आरोप कैसे लगता है।

समझें क्या है पूरा मामला

वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी में ब्राह्मण सम्मान समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज पर लगातार अनर्गल टिप्पणियां हो रही हैं। समाज संयम रखता है, पर खामोशी को कमजोरी न समझा जाए।

मिश्रा ने पूछा कि ब्राह्मणों ने कभी राज नहीं किया, तो समाज ने किसी का शोषण कैसे किया। उन्होंने सनाढ्य, सरयूपारी और कान्यकुब्ज वर्गों से एकजुट होने की अपील की।

सुप्रीम कोर्ट एओआर परीक्षा 2026 शेड्यूल जारी, आवेदन 1 अक्टूबर से शुरू, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए स्क्राइब सुविधा
28 Sept 2026 ,
By Manya Jain
भारत के सुप्रीम कोर्ट एओआर परीक्षा 2026 लिए इतिहास में पहली बार शेड्यूल जारी किया है। यह परीक्षा 19 से 23 दिसंबर तक आयोजित की जाएगी। आवेदनों की प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक चलेगी। इस परीक्षा में हिस्सा लेने के इच्छुक उम्मीदवारों को 750 रुपये का शुल्क जमा करना होगा। ध्यान रहे कि दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए स्क्राइब सुविधा उपलब्ध रहेगी।
भारत के सुप्रीम कोर्ट एओआर परीक्षा 2026 लिए इतिहास में पहली बार शेड्यूल जारी किया है। यह परीक्षा 19 से 23 दिसंबर तक आयोजित की जाएगी। आवेदनों की प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक चलेगी। इस परीक्षा में हिस्सा लेने के इच्छुक उम्मीदवारों को 750 रुपये का शुल्क जमा करना होगा। ध्यान रहे कि दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए स्क्राइब सुविधा उपलब्ध रहेगी।

खामोशी कब बनती है कमजोरी?

मिश्रा ने कलयुग की बात से शुरुआत की। उनके मुताबिक इस दौर में एक शरीर में देव और दानव दोनों रहते हैं। कुछ लोगों में दानव जाग गया है। इसलिए वे ब्राह्मणों के खिलाफ अनर्गल बातें कर रहे हैं।

फिर उन्होंने समाज को दो सलाह दीं। पहली, संयम बनाए रखिए। दूसरी, बात सम्मान और स्वाभिमान की हो तो पीछे मत हटिए।

आप सोच रहे होंगे, खामोशी और कमजोरी में क्या रिश्ता है? मिश्रा का जवाब सीधा था। उन्होंने कहा कि ज्यादा खामोशी ठीक नहीं। लगातार खामोशी कमजोरी में बदलने लगती है।

परशुराम के वंशज पर क्या बोले मिश्रा?

"हम भगवान परशुराम के वंशज हैं। हमें शास्त्र और शस्त्र दोनों का ज्ञान है।"

-नरोत्तम मिश्रा, पूर्व गृह मंत्री, मध्यप्रदेश

परंपरा में भगवान परशुराम को शास्त्र और शस्त्र, दोनों में निपुण माना जाता है। मिश्रा ने इसी भाव में एक कविता की पंक्तियां भी सुनाईं। उनका भाव साफ था। जिसके जीवन में कभी संघर्ष नहीं आया तो उसने या इसे टाला या उससे भागा है।

इसलिए उन्होंने कहा कि चोट लगे तो समाज मुकाबले के लिए तैयार रहे।

31 साल का साथ, फिर शादी पर उठे सवाल, ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिलाया पत्नी होने का हक
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ग्वालियर हाईकोर्ट ने 31 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते को अहम माना है। कोर्ट ने पहली पत्नी के बेटों की अपील खारिज कर दी। फरियादिया रामकली बाई और उनके चार बच्चों के संपत्ति का अधिकार बरकरार रहे। कोर्ट ने कहा, लंबे साथ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे रिश्ते में शादी होने की बात मजबूत होती है।
ग्वालियर हाईकोर्ट ने 31 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते को अहम माना है। कोर्ट ने पहली पत्नी के बेटों की अपील खारिज कर दी। फरियादिया रामकली बाई और उनके चार बच्चों के संपत्ति का अधिकार बरकरार रहे। कोर्ट ने कहा, लंबे साथ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे रिश्ते में शादी होने की बात मजबूत होती है।

जुगनू और सांप का किस्सा

सम्मान समारोह में मिश्रा ने सांप और जुगनू से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया। मिश्रा ने कहानी सुनाते हुए कहा कि एकबार जुगनू ने सांप से पूछा कि उससे कोई दुश्मनी नहीं है। वह उसकी खुराक भी नहीं है। फिर सांप उसके पीछे क्यों पड़ा है?

सांप ने जवाब दिया कि उससे जुगनू की चमक देखी नहीं जाती। मिश्रा ने कहा कि आज ब्राह्मण समाज के साथ भी ऐसा ही हो रहा है।

ब्राह्मणों का राज कब रहा?

शोषण के आरोपों पर मिश्रा ने सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दौर में अलग-अलग राजवंशों ने देश पर शासन किया। ब्राह्मण कभी शासक नहीं रहे। तो फिर हमेशा शोषण करने का आरोप किस आधार पर लगता है?

ब्राह्मण शासक कब थे, मिश्रा का सवाल

"ब्राह्मणों ने राज किया ही नहीं, तो शोषण कहां से करेंगे?"

-नरोत्तम मिश्रा, पूर्व गृह मंत्री, मध्यप्रदेश

मिश्रा ने चार कालों का नाम लिया: सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग। उनके मुताबिक सतयुग में क्षत्रियों का राज था और त्रेता में यादव थे। फिर मौर्य और बौद्ध आए। उसके बाद करीब 600 साल तक मुगल रहे।

पिछले 70 से 75 साल से देश में संविधान का राज है। मिश्रा बोले कि ब्राह्मणों पर शोषण का आरोप उनकी समझ में नहीं आया। यह उनका अपना ऐतिहासिक दावा है और इस पर बहस हो सकती है।

ब्राह्मण एकता की अपील क्यों?

आखिर में मिश्रा ने ब्राह्मण एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज सनाढ्य, सरयूपारी और कान्यकुब्ज जैसे वर्गों में न बंटे। ये ब्राह्मणों के अलग-अलग उप-समूह हैं।

उनके मुताबिक संगठित समाज ही आगे बढ़ता है। वही सत्ता के समीकरणों को भी प्रभावित करता है। इसलिए उन्होंने छोटे-छोटे मतभेद भुलाकर साथ चलने की अपील की।

गौरवशाली इतिहास की याद क्यों?

मिश्रा ने कहा कि समाज को गौरवशाली इतिहास और परंपराएं याद रखनी होंगी। साथ ही समाज को फिर नई दिशा दिखाने की भूमिका निभानी होगी। यानी उनकी अपील सिर्फ एकता तक सीमित नहीं थी।


दतिया-डबरा से विधायक रहे हैं मिश्रा

डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) मध्यप्रदेश के गृह मंत्री रह चुके हैं। वे भाजपा (BJP – Bharatiya Janata Party) के वरिष्ठ नेता हैं। दतिया सीट से वे तीन बार व डबरा से तीन बार विधायक रह चुके है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार से उन्हें हार मिली थी। दतिया सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर समर्थकों ने काफी विरोध जताया था। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था।

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मध्य प्रदेश में BJP ने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई जिम्मेदारियां तय की हैं। इसमें मध्यप्रदेश के चार नेताओं को भी अहम जगह मिली है। नेताओं को अलग-अलग राज्यों और विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए ये नियुक्तियां की हैं।
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  1. नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी में क्या कहा?
    उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की खामोशी को कमजोरी समझना भूल होगी। साथ ही उन्होंने समाज से संयम रखने और सम्मान पर चोट होने पर मुकाबले के लिए तैयार रहने को कहा।
  2. ब्राह्मणों पर शोषण के आरोप पर मिश्रा ने क्या सवाल उठाया?
    उन्होंने पूछा कि ब्राह्मणों ने कभी राज ही नहीं किया, तो शोषण कहां से करेंगे। उनके मुताबिक अलग-अलग दौर में दूसरे राजवंश और शासक रहे। यह उनका अपना दावा है।
  3. मिश्रा ने ब्राह्मण समाज से क्या अपील की?
    उन्होंने समाज को सनाढ्य, सरयूपारी और कान्यकुब्ज जैसे वर्गों में न बंटकर एकजुट होने की अपील की। उनके मुताबिक संगठित समाज ही आगे बढ़ता है।
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