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News in short
जनरल और EWS कैटेगरी के लिए क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल को 50th से घटाकर सीधे 7th कर दिया गया है।
SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ 0 पर्सेंटाइल की गई है, जिससे -40 अंक वाले भी पात्र होंगे।
ये कदम देशभर के मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी पीजी सीटों को भरने के लिए उठाया गया है।
IMA की मांग पर सरकार ने मेडिकल संसाधनों की बर्बादी रोकने के लिए यह छूट दी है।
ये रिवाइज्ड कट-ऑफ नियम फिलहाल केवल शैक्षणिक सत्र 2025-26 की काउंसलिंग के लिए ही लागू किया गया है।
News in detail
मेडिकल एजुकेशन से जुड़ी एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर आई है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBEMS) ने एक नया नोटिस जारी किया है। NEET-PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ में कटौती करने का फैसला किया गया है। ये कदम देश में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए उठाया गया है।
इसके अलावा, मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी 9 हजार से ज्यादा सीटों को भरने के लिए ये कदम उठाया गया है। अब जो लोग (SC/ST/OBC) -40 अंक लाएंगे, वे भी एक्सपर्ट डॉक्टर बनने की रेस में शामिल हो सकेंगे। ये मॉडिफाइड कट-ऑफ नियम फिलहाल केवल इसी एकेडमिक सेशन 2025-26 (NEET PG 2025) के लिए ही लागू है।
Important Facts
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क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में शून्य तक की गिरावट
सरकार ने अलग-अलग कैटेगरीज के लिए कट-ऑफ के मानकों को बहुत ज्यादा नीचे गिरा दिया है:
General/EWS: पहले जहां 50th पर्सेंटाइल जरूरी था, उसे घटाकर अब सिर्फ 7th पर्सेंटाइल कर दिया गया है।
General PwBD: इसे 45th से घटाकर 5th पर्सेंटाइल पर लाया गया है।
SC/ST/OBC: सबसे बड़ा बदलाव यहां हुआ है। जहां पर्सेंटाइल को 40 से घटाकर सीधे शून्य (0) कर दिया गया है। इसका मतलब है कि नेगेटिव मार्किंग की वजह से -40 अंक लाने वाले छात्र भी अब योग्य माने जाएंगे।
नेगेटिव स्कोर पर भी मौका: जीरो पर्सेंटाइल का मतलब है कि इस कैटेगरी में -40 अंक (नेगेटिव मार्किंग) पाने वाले छात्र भी अब विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की दौड़ में शामिल हो सकेंगे।
विकलांग श्रेणी (PwBD): दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी मानकों में बड़ी ढील दी गई है। इसे 45 पर्सेंटाइल से घटाकर अब सिर्फ 5 पर्सेंटाइल कर दिया गया है।
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क्यों ली गई इतनी बड़ी रिस्क
सरकार के इस फैसले के पीछे एक बहुत ही बड़ा प्रैक्टिकल कारण बताया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल (neet pg 2025) करीब 2.4 लाख उम्मीदवारों ने NEET-PG (नीट पीजी) की परीक्षा दी थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि देश की 70 हजार सीटों में से करीब 9 हजार सीटें खाली रह गईं।
हाई कट-ऑफ की वजह से हजारों सीटों पर एडमिशन नहीं हो पा रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि देश में मेडिकल संसाधनों की बर्बादी को रोकना जरूरी है।
IMA ने भी 12 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह मांग की थी। उनका तर्क था कि खाली सीटें रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी और काम का बोझ बढ़ाएंगी।
क्या योग्यता और सेहत के साथ हो रहा खिलवाड़
भले ही सीटें भरने की दलील दी जा रही हो लेकिन एक्सपर्ट इसे खतरनाक मान रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इतने कम नंबरों पर एंट्री देने से ट्रीटमेंट की क्वालिटी गिरेगी। पीजी डॉक्टर ही आगे चलकर भविष्य के सर्जन और बड़े सुपर स्पेशलिस्ट बनते हैं।
एक्टिविस्ट डॉ. राजेंद्र शर्मा का कहना है कि ये जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे मेडिकल स्टैंडर्ड में एक बड़ी गिरावट कह रहे हैं। वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या काबिलियत से समझौता करना देश के लिए सही है।
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रैंकिंग और काउंसलिंग पर क्या होगा असर
NBEMS ने साफ किया है कि परीक्षा के स्कोर या रैंक (NEET PG EXAM) में कोई बदलाव नहीं होगा। केवल काउंसलिंग के लिए एलिजिबल कैंडिडेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए ये नियम बदला है। राजस्थान पीजी काउंसलिंग बोर्ड के मुताबिक, अब जल्द ही तीसरे राउंड की काउंसलिंग शुरू होगी।
ये मॉडिफाइड कट-ऑफ (नीट काउंसलिंग प्रक्रिया) नियम फिलहाल केवल इसी एकेडमिक सेशन 2025-26 (NEET PG 2025) के लिए ही लागू है। ऑफिशल्स का ध्यान अब मेडिकल रिसोर्सेज को बर्बाद होने से बचाने और सीटें भरने पर है।
आगे क्या
क्या होगा इसका असर
इस फैसले से काउंसलिंग (neet pg counselling) का तीसरा राउंड अब काफी दिलचस्प होने वाला है। ज्यादा से ज्यादा छात्रों को मौका मिलेगा और खाली सीटें भरी जा सकेंगी।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे 'क्वालिटी से समझौता' भी मान रहे हैं, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने और सीटों की बर्बादी रोकने पर है।
निष्कर्ष
सरकार ने सीटों की बर्बादी रोकने के लिए नीट एग्जाम कट-ऑफ को जमीन पर ला दिया है। ताकि खाली पड़े हॉस्पिटल्स को डॉक्टर मिल सकें। अब देखना ये होगा कि क्वांटिटी (संख्या) बढ़ाने का यह फैसला मेडिकल फील्ड की क्वालिटी (काबिलियत) पर कितना भारी पड़ता है।
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