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JEE-NEET in 11th Class: JEE, NEET या CUET की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह खबर काम की है। केंद्र सरकार प्रवेश परीक्षाओं में बड़े बदलाव की प्लानिंग कर रही है। सरकार कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम करना चाहती है। डमी स्कूलों की समस्या खत्म करना भी मुख्य लक्ष्य है।
शिक्षा मंत्रालय कर रहा है मंथन
शिक्षा मंत्रालय ने इसके लिए एक 11 सदस्यों की समिति बनाई है। इस समिति ने जून में काम शुरू किया था। समिति ने 15 नवंबर को एक अहम बैठक की। बैठक में कई सुझावों पर गहन चर्चा हुई।
11वीं में ही हो सकती हैं परीक्षाएं
समिति का सबसे बड़ा और जरूरी सुझाव यह है। JEE Mains, NEET और CUET जैसी परीक्षाएं कक्षा 11वीं में ही हो सकती हैं। समिति के कई सदस्य इस पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि इससे स्टूडेंट्स पर दबाव कम होगा।
कक्षा 12वीं में तनाव की स्थिति भी कम हो जाएगी। कमेटी सभी शिक्षा बोर्ड के सिलेबस की एकरूपता (uniformity) पर भी अध्ययन करेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के हिसाब से भी चर्चा हुई। पैनल ने साल में दो बार एंट्रेंस एग्जाम कराने पर भी बात की। ये परीक्षाएं अप्रैल और नवंबर में हो सकती हैं।
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कोचिंग की पढ़ाई सिर्फ 2-3 घंटे
समिति कोचिंग संस्थानों के समय को सीमित करने पर भी विचार कर रही है। एक महत्वपूर्ण सुझाव में कहा गया है कि कोचिंग क्लास रोजाना सिर्फ 2 से 3 घंटे तक ही होनी चाहिए।
अभी स्टूडेंट्स स्कूल के बाद 4 से 6 घंटे तक कोचिंग करते हैं।
यह सीमा तय करने से संतुलन बनेगा।
एंट्रेंस की तैयारी, स्कूली शिक्षा और हेल्थ के बीच बैलेंस रहेगा।
इससे एकेडमिक बैलेंस ठीक होगा।
स्टूडेंट्स की थकान भी कम होगी।
स्कूल-बेस्ड लर्निंग की अहमियत बढ़ेगी।
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एंट्रेंस एग्जाम में जुड़ेंगे बोर्ड मार्क्स
समिति एक हाइब्रिड असेसमेंट मॉडल लाने पर विचार कर रही है।
इस मॉडल में बोर्ड परीक्षा के मार्क्स को भी वेटेज दिया जाएगा।
एप्टीट्यूड बेस्ड टेस्ट और बोर्ड परीक्षा दोनों को अहमियत मिलेगी।
इंजीनियरिंग और मेडिकल दाखिलों में प्रवेश परीक्षा के साथ-साथ बोर्ड का प्रदर्शन भी देखा जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि इससे क्लासरूम लर्निंग मजबूत होगी।
इंटरनल असेसमेंट भी बेहतर हो सकते हैं।
कोचिंग पर बहुत ज्यादा निर्भरता भी कम हो जाएगी।
समिति ने किन कमियों पर ध्यान दिया?
बैठक में सिस्टम की कई खामियों पर भी चर्चा हुई।
कई शिक्षा बोर्डों के सिलेबस में अंतर है।
डमी स्कूलों का चलन लगातार बढ़ रहा है।
कमजोर असेसमेंट की भी समस्या है।
टीचरों की काबिलियत में अंतर है।
स्कूलों में करियर काउंसलिंग की कमी है।
NCERT को मिली बड़ी जिम्मेदारी
15 नवंबर की बैठक में एक जिम्मेदारी सौंपी गई। NCERT को यह जिम्मेदारी दी गई। वह CBSE और राज्य बोर्डों के साथ समन्वय करेगा। वह कक्षा 11 और 12 के सिलेबस को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप करेगा। इससे सिलेबस की असमानताओं को कम किया जा सकेगा। स्कूल सिलेबस Entrance Exam के सिलेबस के मुताबिक बनेगा।
उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति में कुल 11 सदस्य हैं। इसमें CBSE के अध्यक्ष भी शामिल हैं। IIT मद्रास, IIT कानपुर, NIT और NCERT के प्रतिनिधि भी हैं।
केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और निजी स्कूल के तीन प्रिंसिपल भी सदस्य हैं। समिति वर्तमान स्कूली शिक्षा प्रणाली की खामियों की पहचान कर रही है। यह सरकार को अपनी सिफारिशें जल्द ही सौंपेगी।
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