देश में IAS, IPS और IFS के 2800 से ज्यादा पद खाली, यूपी टॉप पर

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि देश में IAS, IPS और IFS के कुल 2,834 पद खाली हैं। सबसे अधिक कमी वन सेवा (IFS) में है। उत्तर प्रदेश में अधिकारियों के सबसे ज्यादा पद मंजूर हैं।

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Anjali Dwivedi
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देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं (IAS, IPS, IFS) को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। प्रशासनिक रीढ़ मानी जाने वाली इन सेवाओं में हजारों पद अब भी खाली हैं। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में इसके ताजा आंकड़े साझा किए हैं। लाखों युवाओं की मेहनत के बावजूद 2 हजार 834 पद भरे नहीं जा सके हैं।

IAS, IPS और IFS में कितने पद खाली

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों सेवाओं में कुल 15 हजार 169 पद स्वीकृत (Sanctioned) हैं। लेकिन वर्तमान में केवल 12 हजार 335 अधिकारी ही काम कर रहे हैं। एक जनवरी 2025 तक की स्थिति के अनुसार, कुल 2 हजार 834 पद खाली पड़े हैं। इनमें IAS के 1 हजार 300, IPS के 505 और IFS के 1 हजार पद शामिल हैं।

सेवा-वार अधिकारियों की स्थिति

IAS के 6 हजार 877 स्वीकृत पदों में से केवल 5 हजार 577 अधिकारी तैनात हैं। वहीं IPS के 5 हजार पदों में से 4 हजार 594 पर ही नियुक्तियां हैं। सबसे बुरा हाल भारतीय वन सेवा (IFS) का है। यहां 3 हजार193 पदों के मुकाबले केवल 2 हजार164 अधिकारी ही काम कर रहे हैं। इसमें साफ है कि वन सेवा में अधिकारियों की भारी कमी है।

यूपी और AGMUT कैडर सबसे आगे

कैडर के लिहाज से उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 652 IAS पद हैं। इसके बाद AGMUT((अरुणाचल, गोवा, मिजोरम, केंद्र शासित प्रदेश) ), मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु का नंबर आता है। इतना ही नहीं IPS पदों में भी यूपी शीर्ष पर है। वहीं, IFS पदों के मामले में AGMUT कैडर सबसे ऊपर बना हुआ है। यह राज्यों की प्रशासनिक मजबूती का बड़ा संकेत है।

भर्ती के बावजूद क्यों बनी हुई है कमी?

पिछले पांच वर्षों में आरक्षित वर्गों से भर्ती हुई है, लेकिन खाली पद पूरी तरह भर नहीं पाए।

पिछले पांच साल में भर्ती का आंकड़ा

  • IAS में 245 OBC, 135 SC, 67 ST उम्मीदवार

  • IPS में 255 OBC, 141 SC, 71 ST उम्मीदवार

  • IFS में 231 OBC, 95 SC, 48 ST उम्मीदवार

इन भर्तियों के बावजूद पदों की कमी बनी रहना यह दिखाता है कि या तो चयन प्रक्रिया सीमित है, या अधिकारियों का रिटायरमेंट और कैडर विस्तार तेजी से हो रहा है। UPSC 2026 (यूपीएससी सिविल सर्विस) के लिए सामान्य वर्ग की आयु सीमा 21 से 32 साल है। जबकि OBC को 3 साल और SC/ST को 5 साल की छूट दी गई है।

कामकाज पर क्या पड़ रहा है असर?

पदों की कमी का सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ रहा है। कम अधिकारियों के कारण मौजूदा अफसरों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार भर्ती प्रक्रिया तेज कर रही है। हालांकि, रिटायरमेंट और कैडर विस्तार के कारण यह अंतर बना हुआ है।

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