मध्य प्रदेश में कांग्रेस सफाचट, मध्य ने भरा दम, चंबल में बची दिग्गजों की साख...पढ़िए क्षेत्र वार एनालिसिस

Pratibha ranaa | Jun 05, 2024, 11:41 IST
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कांग्रेस खाली हाथ रही
कांग्रेस खाली हाथ रही

कांग्रेस सागर, टीकमगढ़, दमोह और खजुराहो जीतने में सफल नहीं हुई। खजुराहो से वीडी शर्मा 5 लाख से ज्यादा वोट से जीते। अन्य तीन प्रत्याशी भी चार लाख से ज्यादा के अंतर से जीते।

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने कमाल कर दिया। पूरा प्रदेश भगवा हो गया। कांग्रेस खाली हाथ रही। मतदाताओं ने बीजेपी को दिल खोलकर वोट दिए। इंदौर में शंकर लालवानी, विदिशा में शिवराज सिंह चौहान, खजुराहो में वीडी शर्मा, भोपाल में आलोक शर्मा और गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बंपर जीत दर्ज की। इसी के साथ बीजेपी का वोट शेयर भी बढ़ा। जानिए मध्यप्रदेश ने बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व को कैसे तोहफा दिया...

पढ़िए खास रिपोर्ट...


मध्य क्षेत्र: दिग्गजों को दिल्ली भेज चुके मध्य के मतदाता


सबसे पहले बात मध्य क्षेत्र की। यहां बीजेपी ने विदिशा और भोपाल में बड़ी जीत दर्ज की है। दरअसल, मध्य क्षेत्र के मतदाताओं का राष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय से दखल रहा है। ये राष्ट्रीय स्तर के नेता बनाते भी हैं तो राष्ट्रीय राजनीति से खींच भी लाते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी, सुषमा स्वराज को इन्होंने ही दिल्ली पहुंचाया था। अब पूर्व सीएम शिवराज सिंह को भी रिकार्ड मतों से जीत दिलाकर दिल्ली जा रहे हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में दखल रखने वाले कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की राजनीति पर पूर्ण विराम सा लगाने का निर्णय भी वोटरों ने ही दिया। मध्य क्षेत्र में शामिल होशंगाबाद, भोपाल, विदिशा और बैतूल लोकसभा के मतदाता भी कांग्रेस से ज्यादा भाजपा को अवसर देते रहे हैं। इस बार भी यही किया है।

महाकोशल... कांग्रेस का पुराना किला ढहा, कमलनाथ को झटका


दूसरी बात महाकोशल की...। उम्मीद जताई जा रही थी कि छिंदवाड़ा में कांग्रेस लाज बचा लेगी, पर ऐसा नहीं हुआ। पूर्व सीएम कमलनाथ के प्रभाव वाली यह सीट वर्षों से कांग्रेस के कब्जे में थी। आखिरकार बीजेपी ने इस सीट पर अपना परचम लहरा दिया। यह कमलनाथ के लिए बड़ा झटका है। यहां कमलनाथ के सांसद पुत्र नकुलनाथ उम्मीदवार थे। महाकोशल में जबलपुर, मंडला और बालाघाट में भी बीजेपी-कांग्रेस में आमने- सामने का मुकाबला रहा और सफलता बीजेपी को मिली। 2019 में छिंदवाड़ा को छोड़ बाकी सभी सीटों पर बीजेपी जीती थी। कांग्रेस को इस बार परिदृश्य बदलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

बुंदेलखंड: बीजेपी ने बुंदेलखंड में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया


इस बार कांग्रेस सागर, टीकमगढ़, दमोह और खजुराहो जीतने में सफल नहीं हुई। खजुराहो से वीडी शर्मा 5 लाख से ज्यादा वोट से जीते। अन्य तीनों प्रत्याशी भी चार लाख से ज्यादा के अंतर से जीते। खजुराहो में सपा प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन निरस्त होने से वीडी की राह आसान हो गई थी। दमोह में भितरघात की आशंका थी, लेकिन इसका असर देखने को नहीं मिला। टीकमगढ़ सीट 2008 में अस्तित्व में आई। तभी से भाजपा के वीरेंद्र खटीक सांसद हैं। खजुराहो सीट पर जरूर 1999 में कांग्रेस के सत्यव्रत चतुर्वेदी जीते थे। इसके अलावा 1989 से यहां भाजपा ही काबिज है।

ग्वालियर-चंबल: कांग्रेस को जहां आस थी, वहां भी हारी


चंबल के पानी जैसी बागी ग्वालियर-चंबल की सियासत भी है। यहां के अपने अलग चुनावी मुद्दे और अलग सियासी मिजाज है। इस इलाके से नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गजों की साख दांव पर थी। राहत की बात ये रही कि भिंड, मुरैना में बदले सियासी माहौल के बीच भाजपा ने चारों सीटें आखिरकार अपने पाले में कर लीं। ग्वालियर में प्रवीण पाठक के सहारे कांग्रेस को उम्मीद थी कि ब्राह्मण वोटरों के समर्थन से कुछ कमाल हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछली हार से सबक लेते हुए गुना में सिंधिया ने पूरी मेहनत से चुनाव लड़ा। मुरैना सीट इसलिए खास थी, क्योंकि यहां से नरेंद्र सिंह तोमर चुने जाते रहे हैं। अबकी बार शिवमंगल सिंह जीते।

विंध्य: खत्म भी हुआ कांग्रेस का सूखा


विंध्य की सियासत में समय-समय पर दलों को मौका मिलता है। नगर निगम के चुनाव में सिंगरौली को आम आदमी पार्टी से महापौर मिली तो रीवा से बसपा का अंतिम बार सांसद बना। हालांकि कांग्रेस का सूखा लंबे समय से चला आ रहा है। यह अबकी बार भी जारी रहा। पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर बीजेपी प्रत्याशी जीतने में सफल रहे। सतना में विधायक को उतारने के बावजूद कांग्रेस नाउम्मीद रही। रीवा सीट पर सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम ने भी निराश किया। यहां उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की साख दांव पर थी। शहडोल में कांग्रेस विधायक फुंदेलाल के सामने बीजेपी की हिमाद्रि थीं। हालांकि वे हिमाद्रि के आगे नहीं टिक पाए और हिमाद्रि ने अच्छी खासी जीत दर्ज की।

मालवा-निमाड़: खूब चला बीजेपी का जादू


मालवा-निमाड़ के मतदाताओं ने बीजेपी को बंपर वोट दिए। मतदाताओं ने सीएम डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से विकास की अपेक्षाएं कीं तो कांग्रेसियों को जमीन से जुड़कर काम करने की नसीहत दी। मालूम हो सीएम और देवड़ा इसी क्षेत्र से आते हैं, जबकि पीसीसी चीफ जीतू पटवारी हों, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार हों या पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव सभी मालवा- निमाड़ क्षेत्र के हैं। सीएम बनने के बाद मोहन और कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जीतू की यह पहली परीक्षा थी। यह जीत सीएम की झोली में गई। विधानसभा चुनाव से कांग्रेस ने सबक नहीं लिया और लोकसभा चुनाव में भी मतदाताओं ने कांग्रेस को जमीन दिखा दी।



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