News Strike | MP Politics में Gen Z की एंट्री! बीजेपी-कांग्रेस दोनों की नजर अब युवाओं पर

Harish Divekar | Sept 03, 2026, 07:00 IST
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News strike 02-09
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मध्यप्रदेश की राजनीति में युवाओं और छात्रों पर फोकस बढ़ गया है। बीजेपी मेरा यूथ मेरा मिशन के जरिए युवाओं को जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस छात्रों की गूंज और टीईटी जैसे मुद्दों से सरकार को घेरकर युवा वोटरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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आने वाले चुनाव में बीजेपी का फोकस लाडली बहनों से ज्यादा लाडले बच्चों पर होगा। मध्यप्रदेश की राजनीति जिस डायरेक्शन में घूम रही है। उसे देखकर तो कम से कम यही लगता है। 2018 और 2023 के चुनाव में जीत से सरकार को समझ में आ गया कि जीत की चाबी महिलाओं के हाथ में है। पर अब ये क्लियर हो गया है कि जीत की चाबी किसका मुकद्दर संवारेगी इसका फैसला जेन जी(GEN-Z) के हाथ में हैं।

सो अब इस एज ग्रुप पर जमकर सियासत हो रही है। राहुल गांधी इस मुद्दे पर छात्रों की गूंज करना चाहते हैं। बीजेपी रोकने पर अमादा है। इस बीच टीईटी पर विशेष सत्र बुलाने की मांग हो रही है। यानी हर वो मुद्दा जो जैन जी से जुड़ा है वो अहम हो चुका है। एक मेरा यूथ मेरा मिशन पर निकल चुके हैं तो एक छात्रों की गूंज सुनाने की कोशिश में है।

नमस्कार

सोशल मीडिया पर कुछ देर जरा ट्विटर को स्क्रॉल कीजिए..

खासतौर से बीजेपी और कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं की पोस्ट खंगालिए। वक्त थोड़ा ज्यादा देना पड़ेगा लेकिन जब आप कुछ दिन पुरानी पोस्ट पर पहुंच जाएं तो नोटिस कीजिए कि मध्यप्रदेश के तमाम बड़े नेताओं का फोकस किस मुद्दे पर है। आपको ज्यादा पोस्ट किसानों से जुड़ी नजर आएगी। कहीं मूंग दाल खरीदी के मुद्दे पर पोस्ट होगा तो कहीं खाद खरीदी पर बात होगी। अब धीरे धीरे स्क्रॉल करते हुए ताजी पोस्ट की तरफ आईए और समझिए कि ट्रेंड में क्या अंतर आया है। बीते कुछ दिनों की पोस्ट से आप को ये समझ आ जाएगा कि कांग्रेस का पूरा फोकस ज्यादातर जैन जी पर यानी कि युवाओं पर शिफ्ट हो चुका है।

बीजेपी ने छात्र राजनीति पर लगाम कसने के लिए कैंपस इलेक्शन तक के अलग अलग नियम बना दिए। नए तरह से चुनाव कराए और कई बार चुनाव नहीं भी कराए। उस पार्टी के लिए सोचना बहुत जरूरी है कि उसके बाद भी छात्र नेता उभर कर आए। युवाओं को एकजुट किया और ऐसा प्रदर्शन कर डाला कि सरकार को सकते में डाल दिया। छात्र नेता हर दौर में आते रहे हैं। इस बार कॉकरोच का चोला पहन कर जैन जी बन कर आए हैं। जिनसे डील कैसे करना है ये हर पार्टी के लिए बड़ा सवाल बन चुका है। खासतौर से बीजेपी के लिए। और विपक्ष के लिए तो समझिए वो वरदान बन कर उभरे हैं। जो विपक्ष सरकार को घेरने के लिए तमाम मुद्दों के बीच भटकता रहा उसे जैन जी आंदोलन ने एक डायरेक्शन दे दिया है। अब विपक्ष को पता है कि उसे स्टूडेंट्स को जोड़कर राजनीति करनी है।

सबसे अच्छी बात ये कि जेन जी किसी मीडिया चैनल पर भी निर्भर नहीं है। उनका अपना नेटवर्क है अपने चैनल हैं। और खबरों को पेश करने का, उन्हें देखने और समझने का एक अलग नजरिया और तरीका है।

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क्या फिर से जैन जी के आंदोलन की बातें...

लेकिन उन पर फिर से बात करना इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि पूरे प्रदेश की सियासत जेन जी के मुद्दों पर गर्माई हुई है। एक तरफ बीजेपी की कोशिश है कि वो जैन जी को भी वैसे ही इंप्रेस कर ले जैसी उनसे पहले की पीढ़ियों को कर चुकी है। पर बूमर और मिलेनियल्स जिस तरह सिर्फ राम मंदिर बन जाने से ही बीजेपी के मुरीद बन गए हैं। ये जेन जी इतनी आसानी से हाथ नहीं आ रही है। इसलिए अब सीएम खुद युवा संसद कर रहे हैं छात्रों से मुलाकात कर रहे हैं। इन फॉर्मल होने की कोशिश कर रहे हैं। और उधर कांग्रेस भी जेन जी की सही नब्ज टटोलने की कोशिश कर रही है।

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छात्रों की गूंज कार्यक्रम के साथ राहुल गांधी नब्ज तक पहुंचे..

इस नाम के साथ राहुल गांधी के कुछ कार्यक्रम हो चुके हैं और अब उन्हें मप्र में भी करने की तैयारी है। लेकिन सरकार ने इस कार्यक्रम को करने की परमिशन नहीं दी है।

पिछले एपिसोड में मैंने आपको बताया था कि सीजेपी के स्कूल ठीक करो अभियान में भी मप्र में मुश्किलें आ रही हैं और अब राहुल गांधी के कार्यक्रम पर जम कर सियासत हो रही है। जीतू पटवारी ने इस मामले में एक लंबा चौड़ा ट्वीट किया है। उन्होंने सीएम और नगरीय प्रशासन मंत्री के नाम से लिखा है कि कांग्रेस के प्रस्ताव को संज्ञान में लेते हुए इंदौर के नेहरू स्टेडियम को “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के लिए तत्काल उपलब्ध करवाया जाए!

राहुल जी नेता प्रतिपक्ष हैं! वे शिक्षा की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर पूरे देश में जनजागृति का अभियान चला रहे हैं! यह कार्यक्रम राजनीतिक दल का प्रचार नहीं, यह देश के भविष्य, हमारे युवाओं, उनके सपनों और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा संवाद है! सच यह भी है कि युवाओं के सपने तभी सुरक्षित रहेंगे, जब शिक्षा सुरक्षित रहेगी! शिक्षा बचेगी, तभी देश का भविष्य बचेगा! इसलिए, मैं नियम-कायदे की आड़ में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को रोकने की बहस और बयानबाजी में भी नहीं पड़ना चाहता! सरकार विषय की गंभीरता और राष्ट्रीय महत्व को समझे और इंदौर के नेहरू स्टेडियम को “छात्रों की गूंज” के लिए उपलब्ध करवाए!

राहुल गांधी के कार्यक्रम को परमिशन नहीं मिली है।

मैं यहां ये सवाल नहीं उठाउंगा कि क्या बीजेपी सरकार इस कार्यक्रम से डर रही है। क्योंकि मेरी टीम ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया को जम कर खंगाला है। और इस कार्यक्रम से जुड़ी अलग अलग राय को सुना भी है। यकीनन इस कार्यक्रम में शामिल होने में अधिकांश छात्रों को कोई दिक्कत नहीं है। वो राहुल गांधी को सुन भी रहे हैं और उनसे जुड़ भी रहे हैं।

बीजेपी को ये डर सताना लाजमी है कि वो अब तक राहुल गांधी की जो इमेज गढ़ते रहे वो इन कार्यक्रमों के जरिए काफी हद तक धुंधली पड़ रही है। हर तस्वीर के दो पहलू होते हैं इसलिए ये तय है कि कुछ लोग राहुल गांधी से इंप्रेस होते हैं और कुछ आलोचक बन जाते हैं। डर इस बात का है कि इंप्रेस होने वालों की संख्या ज्यादा हो गई तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

इसलिए छात्रों की गूंज पर सियासी पारा हाई है। मप्र में जैन जी से रूबरू होकर कांग्रेस यकीनन पॉलिटिकल माइलेज ले सकती है। बीजेपी के इस किले को भेदने के लिए कांग्रेस को जैन जी में नई व्यू रचना नजर आ चुकी है।

जिसका रास्ता युवाओं के मुद्दों से होकर ही जाता है। एक तरफ छात्रों की गूंज की बात है तो दूसरी तरफ टीईटी पर विशेष सत्र बुलाने की मांग भी जोरो पर है। कांग्रेस अध्यक्ष छात्रों की गूंज पर पोस्ट डाल रहे हैं तो नेताप्रतिपक्ष विशेष सत्र की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर उमंग सिंगार ने सीएम और राज्यपाल को पत्र भी लिखा है और दावा किया है कि टीईटी कराने के फैसले से करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। सिंगार ने तमिलनाडू सरकार के फैसले का भी जिक्र किया है और कहा है कि जब दूसरे राज्य युवाओं के हित में फैसला ले सकते हैं तो मध्यप्रदेश में ऐसा क्यों संभव नहीं है।

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मप्र की राजनीति मेरा यूथ मेरा मिशन बनाम छात्रों की गूंज कार्यक्रम

अपने मिशन के जरिए बीजेपी युवाओं को कौशल विकास और रोजगार आधारित शिक्षा देने की बात कर रही है। और एप के जरिए कांग्रेस सीधे छात्रों से कनेक्ट कर रही है। कांग्रेस के बाकी नेता युवाओं से जुड़े हर मुद्दे को तरजीह दे रहे हैं। जिसे देखकर ये तो अंदाजा लगाया ही जा सकता है कि आने वाले चुनाव में सिर्फ लाडली बहनों को रिझाने के लिए घोषणाएं नहीं होंगी। बल्कि जेन जी के लिए भी पिटारा खुलेगा और घोषणाओं का अंबार लगेगा।

अब किस पार्टी का भाग्य क्या होगा ये जेन जी वोटर तय करेगा। क्या उनका फैसला ट्रेंडिंग रील्स के बेसिस पर होगा या सोशल मीडिया में रम चुका ये युवा वोटर ईवीएम पर बटन दबाने से पहले अपना भला बुरा सोच कर वोट कर सकेगा। इस सवाल का जवाब जानना दिलचस्प होगा।

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