संकट में रास्ता न मिले, तो आभार व्यक्त करना शुरू कीजिए
The Sootr | Aug 16, 2026, 09:56 IST
jeevan sootr gratitude power in crisis
कठिन समय में आभार व्यक्त करना मानसिक तनाव को कम करता है। यह हमारा ध्यान कमी से हटाकर समाधान की ओर ले जाता है। रोज छोटी चीजों के प्रति धन्यवाद जीवन बदल सकता है।
मैं आज का यह लेख अपनी एक घटना से शुरू करता हूँ।
तकरीबन डेढ़ साल पहले मैं काठमांडू गया था। वहाँ एक धार्मिक कार्यक्रम था, जिसमें रूस, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया, यूके, अमेरिका और भारत सहित कई देशों से लोग आए थे। भारत से मैं वहाँ अकेला था। वहाँ कुछ साइकोथेरपिस्ट भी थे, लेकिन कार्यक्रम मूल रूप से पूरी तरह आध्यात्मिक था।
उस कार्यक्रम के दौरान मेरे भीतर बहुत कुछ बदल रहा था। जो बातें पहले समझ नहीं आती थीं, वे धीरे-धीरे समझ में आने लगी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे मन के अंदर वर्षों से जमी हुई कुछ गांठें खुल रही हैं। मुझे भीतर से बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मुझे लगा कि शायद यह मेरे जीवन का एक नया जन्म है।
अब जब नया जन्म हुआ है, तो जन्मदिन पर मिठाई बाँटते हैं।
मैंने सोचा, क्यों न मैं भी सबको कुछ मीठा खिलाऊँ। अगले दिन मैंने वहाँ मौजूद लगभग सौ-डेढ़ सौ लोगों के लिए छोटी-सी चॉकलेट खरीदी। बौद्ध गुरु के आने से पहले मैंने वहाँ उपस्थित साधकों को एक-एक चॉकलेट देना शुरू किया।
मेरे मन में सिर्फ एक भाव था—इन लोगों ने मेरी इस यात्रा में कहीं न कहीं योगदान दिया है। किसी ने मेरे साथ बात की, किसी ने अपना अनुभव साझा किया, किसी की उपस्थिति ने मुझे कुछ सिखाया। शायद इन लोगों को खुद भी पता नहीं था कि उन्होंने मेरे जीवन में क्या योगदान दिया है।
मैं बस उनका आभार व्यक्त कर रहा था।
लेकिन जैसे-जैसे लोग चॉकलेट लेने लगे, उनके चेहरे पर मुस्कान आने लगी। कोई मुस्कुराया, किसी ने धन्यवाद कहा और किसी के चेहरे पर अचानक खुशी दिखाई दी।
मुझे तब तक अंदाजा नहीं था कि मैं क्या कर रहा हूँ।
मैं तो सिर्फ gratitude कर रहा था।
तभी वहाँ मौजूद गुरु के एक शिष्य मेरे पास आए और उन्होंने कहा, “आज आप गुरु के पास बैठिए।”
मैंने पूछा, “लेकिन मेरी जगह तो पीछे है, मुझे वहाँ क्यों बैठना है?”
उन्होंने कहा, “आपको अंदाजा भी नहीं है कि आप कितना बड़ा काम कर रहे हैं। लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना बहुत बड़ी बात है।”
उस दिन मैं लगभग तीन घंटे गुरु के पास बैठा।
मेरे लिए यह बहुत बड़ा अनुभव था।
और उस दिन मुझे एक बात समझ आई—कई बार हम जो कर रहे होते हैं, उसका असर हमें दिखाई नहीं देता, लेकिन वह किसी और के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन ला रहा होता है।
जीवन सूत्र किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना भी एक तरह की साधना है। और शायद आध्यात्म की शुरुआत भी यहीं से होती है—जब हमारा ध्यान सिर्फ अपने ऊपर से हटकर दूसरे के जीवन पर जाता है।
आमतौर पर हम उन्हीं चीजों के लिए धन्यवाद देते हैं जो हमें बड़ी दिखाई देती हैं।
• किसी ने पैसे की मदद कर दी।
• किसी ने बीमारी में अस्पताल पहुँचा दिया।
• किसी ने नौकरी दिलाने में मदद की।
• किसी ने मुश्किल समय में हमारा साथ दिया।
• किसी ने कोई जरूरी सामान या सुविधा उपलब्ध कराई।
लेकिन जीवन सिर्फ बड़ी-बड़ी मददों से नहीं चलता।
हमारे आसपास हर दिन हजारों छोटी-छोटी चीजें होती हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी मदद कर रही होती हैं। समस्या यह है कि हम उन्हें देखना बंद कर चुके हैं।
ग्रेटिट्यूड हमें यह देखने की आदत डालता है—“मेरे पास क्या-क्या है?”
यहीं से फर्क शुरू होता है।
संकट के समय gratitude क्यों उपयोगी हो सकता है?
जब हम किसी परेशानी में फँसे होते हैं, तो हमारा ध्यान बार-बार उसी समस्या पर जाता है।
पैसे की समस्या है तो पैसा ही दिखाई देता है।
रिश्ते में समस्या है तो वही रिश्ता दिखाई देता है।
बिजनेस में समस्या है तो घाटा ही दिखाई देता है।
और धीरे-धीरे हमारा पूरा मानसिक संसार उसी समस्या के आसपास घूमने लगता है।
ग्रेटिट्यूड उस ध्यान को थोड़ा बदलता है।
यह समस्या को खत्म करने का जादू नहीं है। बल्कि यह हमें समस्या के बीच भी उन चीजों को देखने की क्षमता देता है जो अभी हमारे जीवन में मौजूद हैं।
मनोविज्ञान में attention और cognitive reappraisal पर हुए शोध यह दिखाते हैं कि किसी परिस्थिति को देखने का तरीका हमारी भावनात्मक प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है। Gratitude पर हुए शोधों में भी इसके संबंध को सकारात्मक भावनात्मक अनुभव, सामाजिक जुड़ाव और prosocial behavior से जोड़ा गया है।
इसलिए gratitude को सिर्फ आध्यात्मिक बात मानकर छोड़ देना ठीक नहीं है।
यह हमारे ध्यान को प्रशिक्षित करने का एक अभ्यास भी हो सकता है।
याद रखिए जिस समस्या पर हमारा ध्यान लगातार जाता है, वह हमारे लिए और बड़ी दिखाई देने लगती है। जब हम अपना ध्यान बदलते हैं, तो कई बार वही रास्ते दिखाई देने लगते हैं जो पहले हमारी नजर में नहीं थे।
एक व्यक्ति मेरे पास आया। बिजनेस करता था और उसके ऊपर काफी उधारियाँ थीं। कई लोगों से उसके पैसे वापस नहीं आ रहे थे। वह बहुत परेशान था।
मैंने उससे सेशन के लिए कहा, लेकिन उसने कहा, “मेरे पास समय नहीं है।”
मैंने कहा, “कोई बात नहीं।”
मेरे पास एक Gratitude Journal की booklet थी, जिसे मैंने खुद तैयार किया था। मैंने वह उसे दे दी और कहा, “बस इसे भरना शुरू करिए।”
मैंने उससे एक छोटा-सा अभ्यास करने को कहा—हर दिन पाँच अलग-अलग लोगों के प्रति gratitude लिखना है। अगले दिन वे पाँच लोग repeat नहीं होने चाहिए।
उसने यह अभ्यास शुरू कर दिया।
लगभग एक सप्ताह के भीतर उसने बताया कि उसके बकाया पैसे वापस आने लगे।
अब मैं यह दावा नहीं करता कि सिर्फ gratitude करने से उसके पैसे वापस आए। ऐसा कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। लेकिन एक चीज जरूर बदली थी—उसका ध्यान।
पहले उसका पूरा ध्यान इस बात पर था कि “लोग मेरे पैसे नहीं दे रहे हैं।”
अब उसका मन रोज यह खोज रहा था कि “मेरे जीवन में ऐसे कौन-कौन लोग हैं, जिन्होंने मेरी मदद की है?”
यानी उसका ध्यान कमी से योगदान की तरफ जाने लगा।
हो सकता है समाधान उसके सामने पहले से मौजूद रहा हो। लेकिन समस्या पर लगातार केंद्रित रहने के कारण वह उसे देख नहीं पा रहा था।
Gratitude की असली खूबसूरती छोटी चीजों को देखना है
हम अक्सर बड़ी चीजों के लिए gratitude करते हैं। लेकिन असली अभ्यास तब शुरू होता है जब हम छोटी चीजों को देखना शुरू करते हैं।
• क्या आपने कभी केंचुए के लिए gratitude किया है? वह मिट्टी में सुरंगें बनाकर मिट्टी की संरचना और पानी के प्रवेश में योगदान देता है।
• क्या आपने कभी घर की छिपकली के लिए gratitude किया है? वह छोटे-छोटे कीड़े खाती है और हमारे आसपास के ecosystem का हिस्सा है।
• क्या आपने कभी उस किसान के लिए gratitude किया है, जिसका चेहरा आपने शायद कभी देखा भी नहीं?
• क्या आपने कभी उस सफाईकर्मी के लिए gratitude किया है, जो सुबह-सुबह आपके आसपास की जगह साफ करता है?
• क्या आपने कभी उस व्यक्ति के लिए gratitude किया है जिसने वर्षों पहले आपको एक ऐसी बात कही थी, जिसने आपका जीवन बदल दिया?
पहली बार gratitude करेंगे तो बड़ी चीजें याद आएँगी।
फिर छोटी चीजें।
फिर उससे भी छोटी।
और धीरे-धीरे आपकी नजर महीन होती चली जाएगी।
यही gratitude का अभ्यास है।
एक छोटा प्रयोग सुबह उठिए। एक कागज और पेन लीजिए। मन में सोचकर छोड़ मत दीजिए—लिखिए।
हर दिन पाँच अलग-अलग लोगों के प्रति gratitude लिखिए।
अगले दिन फिर पाँच नए लोग।
कोशिश कीजिए कि कोई व्यक्ति repeat न हो।
यह अभ्यास 100 दिन तक कीजिए।
हो सकता है आपको 100 दिन की जरूरत ही न पड़े।
हो सकता है दस दिन में कुछ बदलने लगे।
हो सकता है किसी रिश्ते को देखने का आपका नजरिया बदल जाए।
हो सकता है आपको अपनी समस्या का कोई नया रास्ता दिखाई दे।
और हो सकता है सबसे बड़ा परिवर्तन बाहर नहीं, आपके भीतर हो।
Gratitude समस्या से भागना नहीं है
यह बात बहुत जरूरी है।
अगर आर्थिक समस्या है तो gratitude के साथ financial planning भी करनी होगी।
अगर रिश्ते में समस्या है तो gratitude के साथ communication और boundaries की जरूरत होगी।
अगर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या है तो professional help भी जरूरी हो सकती है।
Gratitude कोई जादू की छड़ी नहीं है।
यह दिशा बदलने का अभ्यास है।
यह आपको समस्या से आँखें बंद करना नहीं सिखाता। यह आपको समस्या के बीच भी यह देखने की क्षमता देता है कि आपके जीवन में अभी क्या मौजूद है।
और शायद यही सबसे बड़ी बात है।
हम अक्सर जिंदगी में उन चीजों की शिकायत करते रहते हैं जो हमारे पास नहीं हैं।
लेकिन कभी-कभी रुककर यह नहीं देखते कि
जो आज हमारे पास है, उसमें से बहुत कुछ कभी हमारी प्रार्थना हुआ करता था।
इसलिए अगली बार जब जीवन बहुत भारी लगे, जब आपको लगे कि रास्ता दिखाई नहीं दे रहा, तो तुरंत घबराकर समाधान खोजने के बजाय एक कागज उठाइए।
“मेरे जीवन में कौन-कौन है, जिनके कारण मैं आज यहाँ हूँ?”
फिर पाँच नाम लिखिए।
अगले दिन पाँच नए नाम।
फिर पाँच और।
धीरे-धीरे आपकी नजर उन चीजों पर जाएगी जिन्हें आपने देखना बंद कर दिया था।
और शायद उसी रास्ते में आपको वह भी दिखाई दे जाए जिसकी आपको तलाश थी।
जीवन का सरल सूत्र कई बार जिंदगी हमें रास्ता देती रहती है, लेकिन हमारा ध्यान सिर्फ समस्या पर होता है। Gratitude उस ध्यान को वापस जीवन की ओर मोड़ने का एक सरल अभ्यास है।
जिस जीवन के लिए हम रोज शिकायत करते हैं, उसी जीवन में ऐसी हजारों चीजें भी मौजूद हैं, जिनके लिए हमें आभार व्यक्त करना चाहिए।
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उस कार्यक्रम के दौरान मेरे भीतर बहुत कुछ बदल रहा था। जो बातें पहले समझ नहीं आती थीं, वे धीरे-धीरे समझ में आने लगी थीं। ऐसा लग रहा था जैसे मन के अंदर वर्षों से जमी हुई कुछ गांठें खुल रही हैं। मुझे भीतर से बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मुझे लगा कि शायद यह मेरे जीवन का एक नया जन्म है।
अब जब नया जन्म हुआ है, तो जन्मदिन पर मिठाई बाँटते हैं।
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मैंने कहा, “कोई बात नहीं।”
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अब उसका मन रोज यह खोज रहा था कि “मेरे जीवन में ऐसे कौन-कौन लोग हैं, जिन्होंने मेरी मदद की है?”
यानी उसका ध्यान कमी से योगदान की तरफ जाने लगा।
हो सकता है समाधान उसके सामने पहले से मौजूद रहा हो। लेकिन समस्या पर लगातार केंद्रित रहने के कारण वह उसे देख नहीं पा रहा था।
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• क्या आपने कभी घर की छिपकली के लिए gratitude किया है? वह छोटे-छोटे कीड़े खाती है और हमारे आसपास के ecosystem का हिस्सा है।
• क्या आपने कभी उस किसान के लिए gratitude किया है, जिसका चेहरा आपने शायद कभी देखा भी नहीं?
• क्या आपने कभी उस सफाईकर्मी के लिए gratitude किया है, जो सुबह-सुबह आपके आसपास की जगह साफ करता है?
• क्या आपने कभी उस व्यक्ति के लिए gratitude किया है जिसने वर्षों पहले आपको एक ऐसी बात कही थी, जिसने आपका जीवन बदल दिया?
पहली बार gratitude करेंगे तो बड़ी चीजें याद आएँगी।
फिर छोटी चीजें।
फिर उससे भी छोटी।
और धीरे-धीरे आपकी नजर महीन होती चली जाएगी।
यही gratitude का अभ्यास है।
एक छोटा प्रयोग सुबह उठिए। एक कागज और पेन लीजिए। मन में सोचकर छोड़ मत दीजिए—लिखिए।
हर दिन पाँच अलग-अलग लोगों के प्रति gratitude लिखिए।
अगले दिन फिर पाँच नए लोग।
कोशिश कीजिए कि कोई व्यक्ति repeat न हो।
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और शायद यही सबसे बड़ी बात है।
हम अक्सर जिंदगी में उन चीजों की शिकायत करते रहते हैं जो हमारे पास नहीं हैं।
लेकिन कभी-कभी रुककर यह नहीं देखते कि
जो आज हमारे पास है, उसमें से बहुत कुछ कभी हमारी प्रार्थना हुआ करता था।
इसलिए अगली बार जब जीवन बहुत भारी लगे, जब आपको लगे कि रास्ता दिखाई नहीं दे रहा, तो तुरंत घबराकर समाधान खोजने के बजाय एक कागज उठाइए।
और लिखिए
फिर पाँच नाम लिखिए।
अगले दिन पाँच नए नाम।
फिर पाँच और।
धीरे-धीरे आपकी नजर उन चीजों पर जाएगी जिन्हें आपने देखना बंद कर दिया था।
और शायद उसी रास्ते में आपको वह भी दिखाई दे जाए जिसकी आपको तलाश थी।
जीवन का सरल सूत्र कई बार जिंदगी हमें रास्ता देती रहती है, लेकिन हमारा ध्यान सिर्फ समस्या पर होता है। Gratitude उस ध्यान को वापस जीवन की ओर मोड़ने का एक सरल अभ्यास है।
जिस जीवन के लिए हम रोज शिकायत करते हैं, उसी जीवन में ऐसी हजारों चीजें भी मौजूद हैं, जिनके लिए हमें आभार व्यक्त करना चाहिए।
लेखक- अमित कुमार निरंजन: सेल्फ एवं रिलेशनशिप ट्रांसफॉर्मेशन कोच (काउंसलिंग साइकॉलोजिस्ट और हिप्नोथेरेपिस्ट) लेखक और पूर्व वरिष्ठ पत्रकार है। इन्होंने आनंद पथ - आंतरिक सुख की सार्थक तलाश नाम की किताब लिखी जो व्यक्तिगत Transformation के विषयों पर आधारित है।
मैं इतना करती हूं फिर भी वो नोटिस नहीं करते… कैसे बचाएं अपनी लव लाइफ
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