/sootr/media/media_files/2026/01/31/11-applications-received-for-state-biodiversity-board-chairman-post-cg-2026-01-31-15-49-46.jpg)
NEWS IN SHORT
- बायो डायवर्सिटी बोर्ड के चेयरमैन की प्रक्रिया
- इसके लिए कुल 11 आवेदन आए
- इनमें से 8 रिटायर्ड आईएफएस अफसरों के
- सियासी जुगाड़ लगाने की भी कवायद
NEWS IN DETAIL
बोर्ड चेयरमैन बनने की होड़ :
छत्तीसगढ़ वन विभाग में बायोडायवर्सिटी बोर्ड (जैव विविधता प्राधिकरण) का चेयरमैन बनने रिटायर्ड आईएफएस अफसरों में जबरदस्त होड़ मची है।
बोर्ड चेयरमैन बनने के लिए 11 अर्जियां वन विभाग को मिली हैं। इनमें 8 रिटायर्ड आईएफएस अफसर हैं। इनमें से 5 पीसीसीएफ पद से रिटायर हुए हैं, जबकि 3 पीसीसीएफ रैंक से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।
इनके अलावा एक समाज सेवी संस्था के संचालक, एक कृषि विवि के प्रोफेसर और आईटी सेक्टर से जुड़ी एक महिला ने आवेदन दिया है।
2022 के पूर्व तक विभागीय मंत्री बोर्ड के पदेन अध्यक्ष हुआ करते थे। कांग्रेस शासनकाल में इस सिस्टम को बदलकर तत्कालीन पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी को चेयरमैन बनाया गया। वे नवंबर में रिटायर हुए और पद खाली हो गया।
ये खबर भी पढ़ें... राष्ट्रपति ने संसद में किया छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खात्मे का जिक्र, कहा हथियार छोड़ अब पंडुम कैफे चला रहे
पहली बार आवेदन के जरिए नियुक्ति :
सरकार ने राज्य में पहली बार बायोडायवर्सिटी बोर्ड चेयरमैन का चयन समिति के माध्यम से करने का निर्णय लिया और आवेदन मंगवाए।
चेयरमैन पद का विज्ञापन जारी होते ही रिटायर्ड आईएफएस अफसरों की अर्जियों की एक तरह से लाइन लग गई। इतना ही नहीं, अर्जियों के साथ राजनीतिक जोड़-जुगाड़ भी लगाए जा रहे हैं।
लगभग सभी अफसरों का किसी न किसी से राजनीतिक संपर्क है। इस वजह से चेयरमैन की पोस्टिंग राजनीतिक पेंच में फंस गई है।
ये आई हैं अर्जियां :
राकेश चतुर्वेदी - रिटायर्ड पीसीसीएफ
एमटी नंदी - रिटायर्ड पीसीसीएफ
प्रमाश चंद्र पांडे - रिटायर्ड पीसीसीएफ
सुधीर अग्रवाल - रिटायर्ड पीसीसीएफ
शैलेंद्र कुमार सिंह - रिटायर्ड पीसीसीएफ
बी आनंद बाबू - रिटायर्ड पीसीसीएफ
बीपी नोन्हारे - रिटायर्ड पीसीसीएफ
संजय ओझा - रिटायर्ड पीसीसीएफ
प्रीति तिवारी - आईटी सेक्टर
विजय कुमार गुप्ता - संचालक आस्था जन विकास समिति
दीपक शर्मा - प्रोफेसर कृषि विवि
ये हैं बोर्ड चेयरमैन की सुविधाएं :
बोर्ड चेयरमैन को करीब 2 लाख रूपए मासिक वेतन, सरकारी गाड़ी और मेडिकल अलाउंस समेत कई सरकारी सुविधाएं मिलती हैं।
इस पद के लिए वन-पर्यावरण से जुड़े नियम और कानूनों की जानकारी जरूरी है। यही वजह है कि वन विभाग के अफसरों का दावा ज्यादा मजबूत माना जा रहा है।
Sootr Knowledge:
बायो डायवर्सिटी बोर्ड का काम गांव-गांव जाकर पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (पीबीआर) बनाना होता है। इसमें गांव की जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान के साथ ग्राम पंचायत की भौगोलिक स्थिति (नदी, जंगल, पहाड़), जनसंख्या और समुदाय की जानकारी दर्ज होती है।
इसमें औषधीय वनस्पतियां, जंगली पौधे, कृषि फसलें और स्थानीय किस्मों के पौधों की जानकारी शामिल होती है। साथ ही जीव-जंतु, जंगली जानवर, पक्षी, मछलियां, कीट, तितलियां, सूक्ष्मजीवों का ब्यौरा दर्ज रहता है।
रजिस्टर की जानकारी के आधार पर बोर्ड नष्ट हो रहे संसाधनों या प्रजातियों के संरक्षण व सुरक्षा का काम करता है।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ के टॉप 10 आईएफएस करोड़पति, पीसीसीएफ पर मुख्य सचिव से ज्यादा प्रॉपर्टी
Important Points:
.बायोडायवर्सिटी बोर्ड चेयरमैन पद के लिए पहली बार आवेदन प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके तहत कुल 11 आवेदन प्राप्त हुए।
. आवेदनों में रिटायर्ड आईएफएस अधिकारियों का वर्चस्व रहा, 11 में से 8 आवेदन पूर्व आईएफएस अफसरों के हैं।
. चेयरमैन पद नवंबर में रिक्त हुआ, जब तत्कालीन चेयरमैन और पूर्व पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी सेवानिवृत्त हुए।
. पद से जुड़ी सुविधाएं और अधिकार इसे आकर्षक बनाते हैं, जिसमें करीब 2 लाख रूपए वेतन, सरकारी वाहन और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
. चयन प्रक्रिया फिलहाल राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों में उलझी हुई है, सभी आवेदनों को शासन को भेज दिया गया है और अंतिम फैसला वहीं होना है।
अब आगे क्या :
बोर्ड के अधिकारी कहते हैं कि बोर्ड चेयरमैन का कार्यकाल खत्म होने के बाद राज्य शासन से विज्ञापन जारी करने के निर्देश थे।
विज्ञापन देखकर जिन्होंने आवेदन किया है, उनकी अर्जियां शासन के समक्ष भेज दी गई हैं। फैसला शासन स्तर पर होगा।
ये खबर भी पढ़ें... आईएफएस एसोसिएशन की नई टीम का गठन: मोहंता अध्यक्ष, विजय बने सचिव
निष्कर्ष :
बायोडायवर्सिटी बोर्ड के चेयरमैन पद के लिए पहली बार अपनाई गई आवेदन प्रक्रिया ने इस पद के महत्व को साफ तौर पर उजागर कर दिया है।
बड़ी संख्या में रिटायर्ड आईएफएस अधिकारियों की दावेदारी यह संकेत देती है कि अनुभव और प्रशासनिक समझ को चयन में प्रमुख आधार माना जा रहा है।
हालांकि राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों के चलते फैसला फिलहाल उलझा हुआ नजर आता है, लेकिन शासन का अंतिम निर्णय तय करेगा कि जैव विविधता संरक्षण की जिम्मेदारी किस अनुभवी हाथों में सौंपी जाएगी।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us