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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्रवाई देखने 120 सरेंडर नक्सली पहुंचे
- गुरुवार रात सभी सरेंडर नक्सली डिप्टी CM विजय शर्मा के निवास पर डिनर के लिए पहुंचे थे
- विधानसभा में प्रवेश से पहले सभी की सुरक्षा जांच की गई, इसके बाद उन्हें दर्शक दीर्घा में बैठाया गया।
- विधायकों ने किसानों की ट्रेनिंग में खर्च और परीक्षा में नकल का मुद्दा उठाकर अपनी ही सरकार से जवाब मांगा
- वित्त मंत्री के जवाब पर विपक्ष ने हंगामा किया
NEWS IN DETAIL
120 सरेंडर नक्सली पहुंचे विधानसभा
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब 120 सरेंडर नक्सली कार्रवाई देखने पहुंचे। इनमें कई बड़े पूर्व नक्सली लीडर शामिल थे।
इनमें झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा भी शामिल था, जिसने तीन महीने पहले जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और 1 करोड़ का इनामी पूर्व नक्सली सतीश उर्फ रूपेश भी मौजूद रहा।
डिप्टी CM के निवास पर डिनर
विधानसभा पहुंचने से एक दिन पहले गुरुवार रात सभी सरेंडर नक्सली डिप्टी CM विजय शर्मा के निवास पर डिनर के लिए पहुंचे थे। वहां उनकी मुलाकात मंत्री ओपी चौधरी, रामविचार नेताम, बीजेपी अध्यक्ष किरण सिंहदेव और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी कराई गई।
कड़ी सुरक्षा के बीच प्रवेश
विधानसभा की कार्रवाई देखने पहुंचे सरेंडर नक्सलियों को पहले सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। जांच के बाद ही उन्हें दर्शक दीर्घा में बैठने की अनुमति दी गई। सदन के बाहर मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
सदन में सत्ता पक्ष के तल्ख तेवर
इधर सदन के भीतर सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरा। प्रमोद मिंज, अजय चंद्राकर और रिकेश सेन ने परीक्षा में नकल और परीक्षा केंद्र से वंचित किए जाने का मुद्दा उठाया।
विधायकों ने कहा कि कई छात्र 15 किलोमीटर दूर जाकर परीक्षा देने को मजबूर हैं, जो केंद्र सरकार के नियमों का उल्लंघन है। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब देते हुए कहा कि अगले शिक्षा सत्र से व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
वित्त मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में हंगामा किया और विकास कार्यों की स्वीकृति की मांग उठाई।
Knowledge
- झीरम घाटी हमला 2013 में जगदलपुर के पास हुआ था, जिसमें कई कांग्रेस नेताओं की हत्या हुई थी।
- सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) नक्सल संगठन में शीर्ष स्तर का पद माना जाता है।
- नक्सली सरेंडर पॉलिसी के तहत राज्य सरकार पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करने की सुविधा देती है।
- विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए दर्शक दीर्घा में पूर्व अनुमति और सुरक्षा जांच अनिवार्य होती है।
- परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अलग-अलग दिशा-निर्देश लागू होते हैं।
IMP FACTS
- 120 सरेंडर नक्सली पहुंचे विधानसभा
- रूपेश पर 1 करोड़ का इनाम घोषित था
- चैतू झीरम हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है
- डिप्टी CM निवास पर डिनर के बाद पहुंचे विधानसभा
- सत्ता पक्ष ने परीक्षा और किसानों की ट्रेनिंग का मुद्दा उठाया
आगे क्या
सरकार सरेंडर नक्सलियों के पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। वहीं विधानसभा में उठे परीक्षा और विकास कार्यों के मुद्दों पर अगली बैठक में ठोस निर्णय की संभावना है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ विधानसभा में 120 सरेंडर नक्सलियों की मौजूदगी ने राजनीति और समाज दोनों में चर्चा तेज कर दी है। एक ओर सरकार इसे पुनर्वास नीति की सफलता के रूप में देख रही है, तो दूसरी ओर सदन में शिक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव भी जारी है।
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