अबूझमाड़ में भू-माफिया सक्रिय, तीन विभागों की टीम लगाएगी रोक

Aishwarya Dwivedi | Jun 27, 2026, 09:12 IST
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अबूझमाड़ भूमि अतिक्रमण पर संयुक्त टीम की रोक
अबूझमाड़ भूमि अतिक्रमण पर संयुक्त टीम की रोक

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में नक्सलवाद कमजोर होते ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और जंगलों की कटाई का खेल शुरू हो गया है, जिसे रोकने के लिए संयुक्त टीम बनाई गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

अबूझमाड़ देश के उन गिने-चुने इलाकों में शामिल है जहां अब तक राजस्व सर्वे नहीं हो पाया है। नक्सलवाद कमजोर पड़ने के बाद अब यहां सबसे बड़ी चुनौती अधूरा सर्वे बन गया है। इसका फायदा उठाकर लोग जंगल के भीतर सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। अवैध कटाई रोकने के लिए राजस्व, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई है। ड्रोन आधारित आधुनिक तकनीक से इस पूरे क्षेत्र का सर्वे महज दो महीने में पूरा किया जा सकता है।

अबूझमाड़ में जमीन कब्जे का खेल

छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ इलाका इन दिनों एक नई चुनौती से जूझ रहा है। इस इलाके में नक्सलवाद अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से सुरक्षा का माहौल बेहतर हुआ है। लेकिन इसके साथ ही एक नई समस्या खड़ी हो गई है।

जंगल के भीतर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की कोशिशें तेज हो गई हैं। लोग बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। पेड़ों को काटकर जमीन को समतल किया जा रहा है। वहां नए-नए मकान खड़े किए जा रहे हैं। ग्राम पदमकोट और नेलांगूर में यह खेल साफ देखा जा सकता है।

अबूझमाड़ में भू-माफिया सक्रिय
अबूझमाड़ में भू-माफिया सक्रिय


प्रशासन ने बनाई संयुक्त टीम

नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू की है। इस टीम में वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस के अधिकारी शामिल हैं। गांव के सरपंचों को भी इस टीम के साथ जोड़ा गया है। अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से संवाद करने के निर्देश दिए गए हैं। वे ग्रामीणों को पेड़ों के संरक्षण और संवर्धन के लिए जागरूक कर रहे हैं।

नौ साल में सिर्फ तीन फीसदी सर्वे

अबूझमाड़ के जंगलों और जमीनों का अब तक कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ है। सर्वे के बिना यह तय करना मुश्किल है कि कौन सी जमीन किस विभाग की है। तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार ने 18 मई 2015 को इसका काम सौंपा था। यह वर्कऑर्डर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की को दिया गया था।

उस समय यह पूरा इलाका घने जंगलों और नक्सलियों के प्रभाव में था। इस वजह से सर्वे की रफ्तार बेहद धीमी रही। अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक नौ साल में महज 3 प्रतिशत क्षेत्र का ही सर्वे हो पाया है। आईआईटी रुड़की ने अब तक केवल 27 गांवों और 6 माजरा-टोलों का सर्वे किया है। इनमें से 12 गांवों का केवल सीमा सर्वे ही पूरा हो पाया है। विस्तृत सर्वे का काम अभी भी बाकी है।

ड्रोन तकनीक से दो महीने में समाधान

विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक तरीके से सर्वे करने में कई साल लग जाएंगे। इतने समय में जंगल का एक बड़ा हिस्सा साफ हो सकता है। इसके समाधान के लिए डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (DGPS) सक्षम ड्रोन तकनीक का सुझाव दिया गया है।

यह आधुनिक ड्रोन महज 30 मिनट में एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे कर सकता है। अगर पांच ड्रोन एक साथ काम पर लगाए जाएं तो रोज 80 वर्ग किलोमीटर का सर्वे होगा। इस रफ्तार से 4400 वर्ग किलोमीटर में फैले अबूझमाड़ का सर्वे दो महीने में पूरा हो सकता है। वन विभाग के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या में यह ड्रोन उपलब्ध हैं।

उदंती-सीतानदी में मिली सफलता

छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में यह तकनीक सफल रही है। वहां के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने ड्रोन से ही अतिक्रमण की मैपिंग कराई है। यह ड्रोन 10 सेंटीमीटर तक की बेहद सटीक मैपिंग करने में पूरी तरह सक्षम है।

पारंपरिक सर्वे पद्धति को छोड़कर अब अबूझमाड़ में भी इसे लागू करने की जरूरत है। जमीन का सर्वे पूरा होने के बाद ही राजस्व और वन विभाग अपनी कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे। समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो अबूझमाड़ के बेशकीमती जंगलों को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

FAQ

  1. अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे पूरा क्यों नहीं हो सका है?
    उत्तर: अबूझमाड़ इलाका लंबे समय तक घने जंगलों और नक्सलियों के प्रभाव में रहा है। सुरक्षा कारणों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से यहां पारंपरिक तरीके से सर्वे की रफ्तार बेहद धीमी रही है।
  2. जमीन का सर्वे न होने से वहां क्या परेशानी हो रही है?
    उत्तर: सर्वे न होने से यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सी जमीन किस विभाग की है। इसका फायदा उठाकर भू-माफिया और स्थानीय लोग जंगलों की अवैध कटाई कर सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।
  3. डीजीपीएस (DGPS) ड्रोन तकनीक से सर्वे कैसे आसान होगा?
    उत्तर: यह ड्रोन 30 मिनट में एक वर्ग किलोमीटर की सटीक मैपिंग कर सकता है। पांच ड्रोन की मदद से 4400 वर्ग किलोमीटर के पूरे अबूझमाड़ का सर्वे महज दो महीने में पूरा किया जा सकता है।

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