अलनार खदान में 9 साल से नहीं हुआ खनन, बता दिया पौने तीन लाख टन लोहे का उत्पादन
Arun Tiwari | Jun 06, 2026, 18:17 IST
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बस्तर जिले की अलनार लौह अयस्क खदान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बस्तरिया राज मोर्चा ने आरोप लगाया है कि पिछले 9 वर्षों से खदान में खनन नहीं हुआ, फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में 2.72 लाख टन से अधिक लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया।
Raipur. छत्तीसगढ़ में एक ऐसा कारनामा हुआ है जिससे सुनकर आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। क्या आपको लगता है कि बिना खदान को खोदे लाखों टन मटेरियल निकल सकता है। आप कहेंगे शायद नहीं लेकिन छत्तीसगढ़ में ये मुमकिन है। दंतेवाड़ा के अलनार में लौह अयस्क की खदान है। यह खदान आरती स्पंज एवं पावर के पास है।
इस खदान में 9 साल से माइनिंग नहीं हुई और यहां से पौने तीन लाख टन लोहा निकालना बता दिया गया। यह आरोप लगाया है बस्तरिया राज मोर्चा ने। मोर्चा ने सवाल उठाया कि यदि विवाद सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के लोगों से जुड़ा होगा तो क्या उन पर कार्रवाई नहीं होगी।
बस्तर जिले की अलनार लौह अयस्क खदान को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। बस्तरिया राज मोर्चा ने दावा किया है कि जिस खदान में 9 साल से खनन हुआ ही नहीं वहां सरकारी रिकॉर्ड में लाखों टन लौह अयस्क उत्पादन दिखा दिया गया है। संगठन ने इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
संगठन के अनुसार अलनार क्षेत्र में स्थित लौह अयस्क खदान का लीज क्षेत्र लगभग 31.56 हेक्टेयर है। दावा किया गया है कि लंबे समय तक खदान में न तो खनन कार्य हुआ और न ही लोह अयस्क निकाला गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में साल 2018 से 2025 के बीच करीब 2 लाख 72 हजार 181 टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया है। इसी तथ्य को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।
बस्तरिया राज मोर्चा की जिला संयोजक विमला सोरी का कहना है कि जिस खदान से लाखों टन लौह अयस्क निकाले जाने का दावा किया गया है, वहां तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं नहीं है। संगठन के प्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में खनिज निकाला गया होता तो भारी वाहनों की आवाजाही, परिवहन मार्ग और अन्य प्रमाण दिखाई देते। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे प्रमाण नहीं मिल रहे हैं।
संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि लाखों टन लौह अयस्क का उत्खनन हुआ, तो उसके परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि उत्पादन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है, जिसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।
स्थानीय लोगों और संगठन के कार्यकर्ताओं का दावा है कि अलनार खदान क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से किसी बड़े खनन अभियान जैसी गतिविधियां नहीं देखी गईं। उनका कहना है कि रिकॉर्ड में दिखाए गए उत्पादन के अनुरूप न तो मशीनरी की मौजूदगी नजर आई और न ही परिवहन व्यवस्था का कोई ठोस प्रमाण सामने आया।
यही कारण है कि उत्पादन के आंकड़ों की सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मोर्चा का आरोप है कि यदि खनन कार्य नहीं हुआ और फिर भी उत्पादन दर्ज किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। संगठन ने इस मामले को राजस्व और खनिज संसाधनों से जुड़े संभावित आर्थिक नुकसान से भी जोड़ा है।
बस्तरिया राज मोर्चा ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि उत्पादन के आंकड़ों, परिवहन चालानों, रॉयल्टी भुगतान, बिक्री विवरण और खनन अनुमति से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यह मामला केवल खनन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अभिलेखों में फर्जीवाड़े और आर्थिक अपराध की श्रेणी में भी आता है।
अलनार की लौह अयस्क की यह खदान छत्तीसगढ़ के मेसर्स आरती स्पंज एवं पावर के पास है। इस कंपनी के संचालक बीजेपी से जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीजेपी से जुड़े इन रसूखदारों के खिलाफ इस फर्जीवाड़े पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। नियमानुसार दो साल तक खनन होने पर खदान की स्वीकृति रद्द कर दी जाती है लेकिन यहां तो मामला 9 साल का है।
एसडीएम राजीव कुजूर का कहना है कि इस मामले की जांच की जाएगी। बस्तर मोर्चा ने शिकायत की है उसके अनुसार सभी पहलुओं पर जांच होगी। हम समय समय पर भौतिक सत्यापन करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह कैसा सत्यापन है जिसमें खदान चल नही रही और उत्पादन हो रहा है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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इस खदान में 9 साल से माइनिंग नहीं हुई और यहां से पौने तीन लाख टन लोहा निकालना बता दिया गया। यह आरोप लगाया है बस्तरिया राज मोर्चा ने। मोर्चा ने सवाल उठाया कि यदि विवाद सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के लोगों से जुड़ा होगा तो क्या उन पर कार्रवाई नहीं होगी।
बिना खनन उत्पादन :
संगठन के अनुसार अलनार क्षेत्र में स्थित लौह अयस्क खदान का लीज क्षेत्र लगभग 31.56 हेक्टेयर है। दावा किया गया है कि लंबे समय तक खदान में न तो खनन कार्य हुआ और न ही लोह अयस्क निकाला गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में साल 2018 से 2025 के बीच करीब 2 लाख 72 हजार 181 टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया है। इसी तथ्य को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।
खनन नहीं, फिर उत्पादन कैसे :
संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि लाखों टन लौह अयस्क का उत्खनन हुआ, तो उसके परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि उत्पादन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है, जिसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।
रिकॉर्ड में उत्पादन :
यही कारण है कि उत्पादन के आंकड़ों की सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मोर्चा का आरोप है कि यदि खनन कार्य नहीं हुआ और फिर भी उत्पादन दर्ज किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। संगठन ने इस मामले को राजस्व और खनिज संसाधनों से जुड़े संभावित आर्थिक नुकसान से भी जोड़ा है।
एफआईआर की मांग :
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यह मामला केवल खनन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अभिलेखों में फर्जीवाड़े और आर्थिक अपराध की श्रेणी में भी आता है।
विवाद का बीजेपी कनेक्शन :
एसडीएम राजीव कुजूर का कहना है कि इस मामले की जांच की जाएगी। बस्तर मोर्चा ने शिकायत की है उसके अनुसार सभी पहलुओं पर जांच होगी। हम समय समय पर भौतिक सत्यापन करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह कैसा सत्यापन है जिसमें खदान चल नही रही और उत्पादन हो रहा है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
FAQ
- अलनार लौह अयस्क खदान विवाद क्या है?
बस्तरिया राज मोर्चा ने आरोप लगाया है कि बस्तर के अलनार क्षेत्र की खदान में पिछले 9 वर्षों से खनन नहीं हुआ, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 2.72 लाख टन से अधिक लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया है। - अलनार खदान किस कंपनी के पास है?
अलनार की लौह अयस्क खदान मेसर्स आरती स्पंज एंड पावर के पास लीज पर होने का दावा किया गया है। - अलनार खदान से कितना लौह अयस्क उत्पादन दिखाया गया है?
आरोप के अनुसार, वर्ष 2018 से 2025 के बीच सरकारी रिकॉर्ड में करीब 2 लाख 72 हजार 181 टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया है।
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