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Ambikapur. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पटवारियों के तबादलों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर द्वारा महज तीन दिनों के भीतर पटवारियों की दूसरी तबादला सूची जारी कर दी गई है, जिससे राजस्व विभाग के भीतर हलचल तेज हो गई है। बार-बार हो रहे तबादलों से न केवल पटवारियों में असमंजस की स्थिति है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व कामकाज प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है।
जारी आदेश के अनुसार जिले में कुल 58 पटवारियों का तबादला किया गया है। खास बात यह है कि इनमें कई ऐसे पटवारी शामिल हैं, जिनका स्थानांतरण हाल ही में जारी पहली सूची में किया गया था। अब दूसरी सूची आने से उन्हें फिर से नए हल्के में पदस्थ किया गया है।
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प्रशासनिक निर्णय पर उठे सवाल
तीन दिन के भीतर दूसरी सूची जारी होने से यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर पहली सूची जारी करते समय क्या पर्याप्त समीक्षा नहीं की गई थी। राजस्व विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी तबादलों में बदलाव से फील्ड स्तर पर कामकाज प्रभावित होता है और रिकॉर्ड हस्तांतरण की प्रक्रिया भी उलझ जाती है।
कई पटवारियों को एक बार स्थानांतरण आदेश मिलने के बाद नए क्षेत्र में कार्यभार ग्रहण करने की तैयारी करनी पड़ी, लेकिन दूसरी सूची जारी होने से उन्हें फिर से बदलाव का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में असर की आशंका
राजस्व मामलों में पटवारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी और जमीन संबंधी विवादों में पटवारी की सक्रियता जरूरी रहती है। लगातार तबादलों से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबित मामलों के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार बदलते पटवारियों के कारण जमीन संबंधी काम समय पर नहीं हो पाते। नए पटवारी को क्षेत्र की जानकारी लेने में समय लगता है, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
प्रशासन ने बताया नियमित प्रक्रिया
जिला प्रशासन का कहना है कि यह तबादले प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर किए गए हैं और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर इस तरह के निर्णय लिए जाते हैं।
हालांकि लगातार दूसरी सूची जारी होने से यह मामला चर्चा में आ गया है। अब यह देखना होगा कि क्या आगे भी तबादलों में बदलाव होता है या यह सूची अंतिम साबित होती है।
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