रिटायर्ड CS अमिताभ जैन बने छत्तीसगढ़ के राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, राज्य सूचना आयुक्त के लिए दो नियुक्तियां
VINAY VERMA | Jan 10, 2026, 09:18 IST
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रिटायर्ड सीएस अमिताभ जैन को राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। साथ ही, दो अन्य राज्य सूचना आयुक्त भी नियुक्त हुए हैं। इनमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी उमेश अग्रवाल और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शिरीष चंद्र मिश्रा का नाम शामिल है।
News In Short
- राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का पद अमिताभ जैन को सौंपा गया है।
- अमिताभ जैन की नियुक्ति राज्य शासन की लंबे समय से चली आ रही योजना है।
- राज्य सूचना आयुक्त के दो और पदों पर उमेश अग्रवाल और डॉ. शिरीष चंद्र मिश्रा नियुक्त हुए।
- नियुक्ति को लेकर अंबिकापुर के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में याचिका दायर की थी।
- तीनों नियुक्तियों का आदेश छत्तीसगढ़ राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है।
News In Detail
हालांकि राज्य शासन ने उन्हें एक्सटेंशन देते हुए छत्तीसगढ़ का मुख्य सचिव बनाए रखा था। इनके अलावा राज्य सूचना आयुक्त के पद पर दो और नियुक्तियां हुई हैं। तीनों का आदेश राज्यपाल के जरिए जारी कर दिया गया है।
दिग्गज नामों के बीच ऐलान
कोर्ट के कारण अटका था मामला
वरिष्ठ पत्रकार को भी स्थान
आदेश तत्काल प्रभाव से जारी
इस मामले में जारी आदेश की कॉपी यहां देखें
IMP FACTS
जानें कौन है अमिताभ जैन?
वे 1991 से 1993 तक नीमच में एसडीएम रहे। इसके बाद वे सरगुजा के प्रोजेक्ट अधिकारी बने। 1994 से 1996 तक ग्वालियर में अतिरिक्त कलेक्टर रहे। इसके बाद उन्हें सीईओ बनाया गया।
1997 में वे राजगढ़ के कलेक्टर बने। इसके बाद वे छतरपुर, होशंगाबाद और रायपुर के कलेक्टर भी रहे। उन्होंने वित्त, जनसंपर्क, वन, जेल और परिवहन जैसे विभागों में काम किया। उनके नाम सबसे लंबा कार्यकाल बतौर मुख्य सचिव करने का रिकॉर्ड है।
Sootr Knowledge
तीन साल से खाली था पद
CIC के लिए वॉलंट्री रिटायरमेंट
राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है?
मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त 5 साल तक या 65 साल की उम्र तक अपना पद संभालते हैं, जो भी पहले हो। इनकी पुनर्नियुक्ति नहीं हो सकती।
राज्य सूचना आयोग की ताकतें और जिम्मेदारियां हैं-
- आयोग राज्य सरकार को एक वार्षिक रिपोर्ट देता है, जिसे राज्य सरकार विधानमंडल में पेश करती है।
- आयोग किसी भी मामले में जांच का आदेश दे सकता है, यदि उसे उचित आधार मिले।
- आयोग के पास यह अधिकार है कि वह सार्वजनिक प्राधिकरण से अपने फैसले लागू करवाने के लिए कदम उठाए।
- किसी भी व्यक्ति से शिकायत मिलती है तो उसकी जांच आयोग का कर्तव्य है।
- जांच के दौरान, आयोग किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण के रिकॉर्ड की जांच कर सकता है और इसे रोकने के लिए कोई भी आधार नहीं हो सकता।
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