बस्तर के 41 नक्सल मुक्त गांवों में पहली बार फहराया जाएगा तिरंगा, आजादी के बाद पहला मौका

बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों में इस बार गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक बनने जा रहा है। बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और दंतेवाड़ा के 41 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। नक्सलियों के कोर एरिया और करेगुट्टा पहाड़ पर भी झंडावंदन होगा।

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Harrison Masih
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NEWS IN SHORT

  • बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित 41 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया जाएगा।
  • बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और दंतेवाड़ा के कई गांव दशकों बाद राष्ट्रीय समारोह से जुड़ेंगे।
  • नक्सलियों के कोर एरिया और करेगुट्टा पहाड़ पर भी पहली बार झंडावंदन होगा।
  • सुरक्षा कैंप और बड़े नक्सलियों के खात्मे से क्षेत्र में विश्वास और शांति का माहौल बना।
  • यह आयोजन बस्तर में लोकतंत्र, विकास और संविधान की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।

NEWS IN DETAIL

नक्सल प्रभावित इलाकों में ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस

बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस बार गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक बनने जा रहा है। जिन गांवों में कभी नक्सलियों की दहशत, बंदूक और डर का माहौल था, वहां 26 जनवरी को पहली बार शान से तिरंगा फहराया जाएगा। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. के अनुसार, इस वर्ष नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए 41 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। इनमें 18 गांव नारायणपुर, 13 बीजापुर और 10 सुकमा जिले में स्थित हैं।

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दशकों बाद राष्ट्रीय परंपराओं से जुड़ाव

ये गांव कई दशकों से राष्ट्रीय पर्वों और सरकारी आयोजनों से दूर थे। हाल के महीनों में सुरक्षा कैंप स्थापित होने से स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ाव मजबूत हुआ है।

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दहशत से विकास की ओर बस्तर

आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई और स्थानीय सहयोग से इलाके में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। पिछले साल 13 गांवों में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था, जबकि इस साल कुल 54 गांवों में गणतंत्र दिवस समारोह होगा। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा के अलावा दंतेवाड़ा जिले के पिल्लूर, डोडीसुमार और कमालूर गांवों में भी पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। नक्सलियों के कोर एरिया माने जाने वाले कोडनार, अंजागार, मंडेला, जदूर और बायपेटा गांवों में झंडावंदन को बड़ी सफलता माना जा रहा है।

करेगुट्टा पहाड़ पर पहली बार तिरंगा

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करेगुट्टा पहाड़

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सबसे अहम उपलब्धि करेगुट्टा पहाड़ पर तिरंगे का फहराना है, जिसे नक्सलियों का सबसे मजबूत किला माना जाता था। 25 वर्षों बाद 24,000 सुरक्षाबलों के बड़े ऑपरेशन से इस क्षेत्र को माओवादी कब्जे से मुक्त कराया गया था।

Sootr Knowledge

  • बस्तर संभाग लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है।
  • सुरक्षा कैंप स्थापना से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भरोसा बढ़ा है।
  • राष्ट्रीय पर्व लोकतांत्रिक जुड़ाव का प्रतीक माने जाते हैं।
  • करेगुट्टा पहाड़ नक्सलियों का रणनीतिक गढ़ रहा है।
  • तिरंगा फहराना राज्य की संवैधानिक मौजूदगी का प्रतीक है।

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IMP FACTS

  • पहली बार गणतंत्र दिवस: 41 गांव
  • कुल जिले: बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा
  • करेगुट्टा ऑपरेशन: 24,000 सुरक्षाबल शामिल
  • कुल गांव (इस वर्ष): 54

निष्कर्ष

बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में पहली बार तिरंगे का फहराना केवल एक समारोह नहीं, बल्कि डर से आज़ादी, लोकतंत्र की जीत और विकास की नई शुरुआत का प्रतीक है। यह बदलाव बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाला साबित होगा।

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