बस्तर में बदलाव की सबसे बड़ी कहानी; जिन गांवों में कभी गोलियां गूंजती थीं, अब वहां विकास की गूंज
The Sootr | Nov 29, 2025, 11:28 IST
impact feature
बस्तर, जो कभी नक्सल प्रभावित और हिंसा का गढ़ माना जाता था, अब विकास की नई दिशा में बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं।
रायपुर: कभी देश के सबसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में गिने जाने वाला बस्तर आज नई पहचान बना रहा है। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और सीमित संपर्क वाले इस क्षेत्र में लंबे समय तक शासन-प्रशासन की पहुंच नहीं थी। स्कूल खाली पड़े रहते थे। सड़कें अधूरी थीं। आम आदमी का जीवन हमेशा डर के साए में गुजरता था।
बस्तर का नाम आते ही हिंसा, खामोशी और दहशत की तस्वीर उभर आती थी, लेकिन अब वही बस्तर बदल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में एक ऐसी यात्रा शुरू हुई है, जिसने इस क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों को नया मोड़ दिया है। लोग कहने लगे हैं कि बस्तर अब डर नहीं, विकास की नई कहानी है।
सुकमा जिले का बड़ेसट्टी गांव आधिकारिक रूप से बस्तर संभाग की पहली नक्सलमुक्त ग्राम पंचायत घोषित हुआ है। यह घोषणा सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के सपनों की जीत है, जिन्होंने वर्षों तक भय और संघर्ष के बीच जीवन बिताया। स्थानीय लोगों की भूमिका, सुरक्षाबलों की प्रतिबद्धता और सरकार की रणनीति ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है। गांवों में लौटती मुस्कानें इस बात का संकेत हैं कि बस्तर आज खुद को नई दिशा दे रहा है।
प्रदेश सरकार के अनुसार, पहले छत्तीसगढ़ में छह जिले गंभीर रूप से नक्सल प्रभावित श्रेणी में थे। अब यह संख्या घटकर तीन रह गई है। इन जिलों में बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर शामिल है।
यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस लंबे और कठिन अभियान का परिणाम है, जिसके तहत सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाए। प्रशासन ने गांव-गांव जाकर विश्वास बहाली का काम किया। सरकार ने बसवराजू और हिडमा जैसे इनामी नक्सलियों का खात्मा किया, जो कई हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार माने जाते थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने के अभियान में जुटे हैं। उनकी 100 से अधिक बस्तर यात्राएं बताती हैं कि यह सिर्फ घोषणा नहीं, धरातल पर लगातार जारी मिशन है।
बस्तर के जंगलों में चल रहे सुरक्षा अभियानों ने नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। पिछले 22 महीनों में 477 नक्सली मारे गए। 2110 ने आत्मसमर्पण किया। 1785 गिरफ्तार किए गए।
ये आंकड़े संकेत हैं कि अब बस्तर में बंदूक की धमक नहीं, सुरक्षा की मजबूती और प्रशासन की पहुंच का असर है। DRG, CRPF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कठिन परिस्थितियों में लगातार अभियान चलाए। कई ऑपरेशन ऐसे इलाकों में हुए जहां कभी सरकारी वाहन तक पहुंचना मुश्किल था।
![6ef1a767-af8]()
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज हुई है। हाल ही में 258 नक्सलियों ने हथियार डालकर शांति और विकास का रास्ता चुना है। मुख्यमंत्री का कहना है कि हिंसा जीवन को तोड़ती है, आत्मसमर्पण जीवन को नई दिशा देता है। उनकी यह अपील सिर्फ संदेश नहीं, बल्कि उन युवाओं की भावनाओं से जुड़ी है, जो कभी बंदूक उठाने को मजबूर थे और अब सामान्य जीवन की राह तलाश रहे हैं।
नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को कानूनी संरक्षण, रोजगार सहायता, शिक्षा, आवास और पुनर्वास की सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार की इस नीति ने कई युवाओं को हिंसा से दूरी बनाने का मौका दिया है।
आज बस्तर में बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण वजहों में एक है मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शुरू की गई ‘नियद नेल्ला नार’ योजना। इस योजना के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। एक तो सरकार की सीधी पहुंच दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों तक। दूसरा संवाद स्थापित कर जनविश्वास बढ़ाना और तीसरा नागरिक सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना।
अब तक 64 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। पहले जिन गांवों में अधिकारी पहुंचना भी कठिन समझते थे, आज वहीं पर स्वास्थ्य शिविर लगते हैं, अधिकारी ग्रामीणों से बात करते हैं और तुरंत समाधान देते हैं।
स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और राशन दुकानों की गतिविधि बढ़ी है। जिन इलाकों में कभी सन्नाटा रहता था, आज वहां बच्चों की आवाज, प्रशासन की मौजूदगी और रोजमर्रा की गतिविधियों की हलचल दिखती है।
![26db4150-4f3]()
अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर को कभी नक्सलवाद की पनाहगाह कहा जाता था, आज पूरी तरह भयमुक्त घोषित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद इन क्षेत्रों में लोगों का आत्मविश्वास बहुत बढ़ा है।
गांवों में स्कूल खुल रहे हैं, सड़कों पर आवाजाही बढ़ी है और बाजारों में रौनक लौट रही है। बस्तर समाज खुद कह रहा है कि यह बदलाव पिछले कई दशकों में पहली बार देखने को मिला है।
![164e9fe9-b58]()
नक्सल उन्मूलन अभियान की यह सफलता केंद्र और राज्य के मजबूत तालमेल से संभव हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने इसे भारत की आंतरिक सुरक्षा की बड़ी उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्रालय के नेतृत्व में कई संवेदनशील ऑपरेशन सफल हुए। नई तकनीक और आधुनिक उपकरणों की तैनाती हुई और विकास कार्यों को तेजी मिली।
![731e0701-c65]()
छत्तीसगढ़ का बस्तर आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां नक्सलवाद का अंत अब सपना नहीं, बल्कि वास्तविकता के करीब है। सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक पूरा राज्य नक्सलमुक्त हो जाए।
एक समय गोलियों की गूंज से डरने वाला बस्तर आज विकास, संवाद और उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है। गांवों में शांति लौट रही है। किसान खुले मन से खेती कर रहे हैं और लोग बेखौफ होकर जी रहे हैं।
RO-13257/7
बस्तर का नाम आते ही हिंसा, खामोशी और दहशत की तस्वीर उभर आती थी, लेकिन अब वही बस्तर बदल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में एक ऐसी यात्रा शुरू हुई है, जिसने इस क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों को नया मोड़ दिया है। लोग कहने लगे हैं कि बस्तर अब डर नहीं, विकास की नई कहानी है।
बड़ेसट्टी: बस्तर का पहला नक्सलमुक्त गांव
RO 13270 4
अब सिर्फ तीन जिले गंभीर श्रेणी में
यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस लंबे और कठिन अभियान का परिणाम है, जिसके तहत सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाए। प्रशासन ने गांव-गांव जाकर विश्वास बहाली का काम किया। सरकार ने बसवराजू और हिडमा जैसे इनामी नक्सलियों का खात्मा किया, जो कई हिंसक घटनाओं के लिए जिम्मेदार माने जाते थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने के अभियान में जुटे हैं। उनकी 100 से अधिक बस्तर यात्राएं बताती हैं कि यह सिर्फ घोषणा नहीं, धरातल पर लगातार जारी मिशन है।
477 नक्सली ढेर, 2110 ने किया आत्मसमर्पण
ये आंकड़े संकेत हैं कि अब बस्तर में बंदूक की धमक नहीं, सुरक्षा की मजबूती और प्रशासन की पहुंच का असर है। DRG, CRPF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कठिन परिस्थितियों में लगातार अभियान चलाए। कई ऑपरेशन ऐसे इलाकों में हुए जहां कभी सरकारी वाहन तक पहुंचना मुश्किल था।
6ef1a767-af8
258 नक्सलियों ने डाले हथियार
नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को कानूनी संरक्षण, रोजगार सहायता, शिक्षा, आवास और पुनर्वास की सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार की इस नीति ने कई युवाओं को हिंसा से दूरी बनाने का मौका दिया है।
नियद नेल्ला नार योजना से हो रहा बदलाव
अब तक 64 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। पहले जिन गांवों में अधिकारी पहुंचना भी कठिन समझते थे, आज वहीं पर स्वास्थ्य शिविर लगते हैं, अधिकारी ग्रामीणों से बात करते हैं और तुरंत समाधान देते हैं।
स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और राशन दुकानों की गतिविधि बढ़ी है। जिन इलाकों में कभी सन्नाटा रहता था, आज वहां बच्चों की आवाज, प्रशासन की मौजूदगी और रोजमर्रा की गतिविधियों की हलचल दिखती है।
26db4150-4f3
अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर तक विकास
गांवों में स्कूल खुल रहे हैं, सड़कों पर आवाजाही बढ़ी है और बाजारों में रौनक लौट रही है। बस्तर समाज खुद कह रहा है कि यह बदलाव पिछले कई दशकों में पहली बार देखने को मिला है।
164e9fe9-b58
केंद्र और राज्य का मजबूत समन्वय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्रालय के नेतृत्व में कई संवेदनशील ऑपरेशन सफल हुए। नई तकनीक और आधुनिक उपकरणों की तैनाती हुई और विकास कार्यों को तेजी मिली।
731e0701-c65
नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की ओर कदम
एक समय गोलियों की गूंज से डरने वाला बस्तर आज विकास, संवाद और उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है। गांवों में शांति लौट रही है। किसान खुले मन से खेती कर रहे हैं और लोग बेखौफ होकर जी रहे हैं।
RO-13257/7
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari