पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के भाई, भतीजे और बहुओं ने किया खेल, भारतमाला में मामा परिवार भी नहीं रहा पीछे
Arun Tiwari | May 15, 2026, 19:28 IST
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भारतमाला जमीन घोटाले में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के परिवार के नामांतरण और बंदरबांट के मामले सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने मुआवजा और लाभ के लिए जमीनों को आपस में ट्रांसफर किया। रिपोर्ट अब ED के पास है।
Raipur. छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट में जमकर घोटाला हुआ है। इस पूरे घोटाले में फैमिली मैन फर्जीवाड़ा निकल कर सामने आया है। सत्ता से जुड़े एक नेता के रसूख का फायदा उठाकर उसके पूरे परिवार ने जमीनों की बंदरबांट कर ली। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के भाई,भतीजे, भतीजे की बहू और मामा परिवार ने भारतमाला प्रोजेक्ट आने के बाद अपनी जमीनों को एक दूसरे के नाम पर घर घर का खेल खेल लिया।
परिवार तो परिवार इनके मैनेजर और बिजिनेस पार्टनर के परिवार ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए। इसमें उनका साथ तत्कालीन अधिकारियों ने भी दिया। हम यह सब उस रिपोर्ट के आधार पर बता रहे हैं जो इस फर्जीवाड़े की जांच के बाद तैयार की गई है। यह रिपोर्ट ईडी के हाथ में जिसके बिंदुओं पर कार्रवाई हो रही है।
छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन घोटाले में अब परिवारवाद और फर्जीवाड़े के नए मामले सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा रहा है कि सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों ने प्रोजेक्ट की आड़ में जमीनों की खरीद-फरोख्त और नामांतरण का बड़ा खेल किया।
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के भाई, भतीजे, भतीजे की बहू और मामा पक्ष से जुड़े लोगों ने भारतमाला परियोजना आने के बाद जमीनों को एक-दूसरे के नाम पर ट्रांसफर किया। इस दौरान परिवार के भीतर ही जमीनों की बंदरबांट कर मुआवजे और लाभ हासिल करने की कोशिश की गई। रिपोर्ट में बाकायदा पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के इन लोगों से रिश्तों का जिक्र किया गया है।
यह पूरा मामला राजनांदगांव और दुर्ग जिले का है। दुर्ग जिले की तहसील पाटन में इस प्रोजेक्ट के भूअर्जन के लिए 5 फरवरी 2018 को आशय पत्र जारी किया गया। इन जमीनों का नामांतरण और बंटवारा साल 2018 के मार्च और अप्रैल महीने में हुआ। इसका प्रारंभिक प्रकाशन 21 सितंबर 2021 को हुआ।
अवार्ड पारित 3 मार्च 2025 को किया गया यानी जमीन अधिग्रहण और मुआवजा तय कर दिया गया। आइए आपको बताते हैं कि वे कौन फैमिली मेंबर हैं जिन्होंने इस प्रोजेक्ट के आने के बाद जमीनों की अदला बदली या नामांतरण करवाया।
सौरभ चंद्राकर - अजय चंद्राकर का भतीजा, खसरा 1208/1
अरुणा - अजय चंद्राकर की भाभी, खसरा 1208/7
रंजिता - सौरभ चंद्राकर की पत्नी, खसरा 1208/8
सौरभ चंद्राकर - अजय चंद्राकर का भतीजा, खसरा 1208/9
ग्राम कुरूद की रंजिता चंद्राकर ने दस्तावेजों में अपने पति या पिता का नाम नहीं लिखा। उसकी जगह अपने ससुर आलोक चंद्राकर का नाम दर्ज कराया। आलोक चंद्राकर, अजय चंद्राकर के भाई हैं। दस्तावेज में कहा गया है कि रंजिता सौरभ चंद्राकर की पत्नी है। उन्होंने वास्तविक पारिवारिक पहचान छिपाकर ससुर के नाम का उपयोग किया।
बानी श्री चंद्रवंशी ने अपने पति का नाम दर्ज कराने के बजाय अपने पिता स्वर्गीय आलोक चंद्राकर का नाम दर्ज कराया। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि वह आलोक चंद्राकर के गांव कुरूद स्थित घर में नहीं रहती थीं। यानी जांच में यह सवाल उठाया गया कि उनका उस संपत्ति या पते से वास्तविक संबंध कितना था।
गीता अंजलि चंद्राकर ने अपने पति का नाम नहीं लिखा। इसके बजाय अपने पिता स्वर्गीय आलोक चंद्राकर का नाम दर्ज कराया। उन्होंने जमीन के अवैध प्लॉटिंग और उपखंड विभाजन के दौरान ऐसा किया।
मुआवजा पाने या जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए रिश्तों और नामों का इस्तेमाल किया गया। पति की जगह पिता या ससुर का नाम दर्ज कर जमीन को एक ही परिवार से जुड़ा दिखाया गया। इससे भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया में लाभ लेने की कोशिश की गई।
भरतलाल चंद्राकर - अजय चंद्राकर का मामा परिवार, खसरा 357/10
मनोहर सिंह चंद्राकर - अजय चंद्राकर का मामा परिवार, खसरा 357/11
सुषमा - अजय चंद्राकर का मामा परिवार, खसरा 357/12
विशाखा - अजय चंद्राकर का मामा परिवार,खसरा 357/13
योगेश - अजय चंद्राकर का मामा परिवार,खसरा 357/3
रेखा - अजय चंद्राकर का मामा परिवार,खसरा 357/8
मीना बाई - अजय चंद्राकर का मामा परिवार, खसरा 357/9
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि केवल परिवार ही नहीं, बल्कि उनके मैनेजर और बिजनेस पार्टनर से जुड़े लोगों ने भी इस नेटवर्क का फायदा उठाया। आरोप है कि जमीनों के लेन-देन में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही और नियमों को नजरअंदाज कर प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे मामले की जांच के बाद तैयार रिपोर्ट अब ED के पास पहुंच चुकी है और रिपोर्ट में शामिल बिंदुओं के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। भारत माला प्रोजेक्ट से जुड़े इस घोटाले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
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परिवार तो परिवार इनके मैनेजर और बिजिनेस पार्टनर के परिवार ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए। इसमें उनका साथ तत्कालीन अधिकारियों ने भी दिया। हम यह सब उस रिपोर्ट के आधार पर बता रहे हैं जो इस फर्जीवाड़े की जांच के बाद तैयार की गई है। यह रिपोर्ट ईडी के हाथ में जिसके बिंदुओं पर कार्रवाई हो रही है।
भारतमाला का फैमिली मैन फर्जीवाड़ा :
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के भाई, भतीजे, भतीजे की बहू और मामा पक्ष से जुड़े लोगों ने भारतमाला परियोजना आने के बाद जमीनों को एक-दूसरे के नाम पर ट्रांसफर किया। इस दौरान परिवार के भीतर ही जमीनों की बंदरबांट कर मुआवजे और लाभ हासिल करने की कोशिश की गई। रिपोर्ट में बाकायदा पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के इन लोगों से रिश्तों का जिक्र किया गया है।
भारतमाला प्रोजेक्ट के बाद नामांतरण :
अवार्ड पारित 3 मार्च 2025 को किया गया यानी जमीन अधिग्रहण और मुआवजा तय कर दिया गया। आइए आपको बताते हैं कि वे कौन फैमिली मेंबर हैं जिन्होंने इस प्रोजेक्ट के आने के बाद जमीनों की अदला बदली या नामांतरण करवाया।
प्रोजेक्ट आने के बाद किया नामांतरण :
अरुणा - अजय चंद्राकर की भाभी, खसरा 1208/7
रंजिता - सौरभ चंद्राकर की पत्नी, खसरा 1208/8
सौरभ चंद्राकर - अजय चंद्राकर का भतीजा, खसरा 1208/9
खेल करने में ये चालाकी भी की गई :
बानी श्री चंद्रवंशी ने अपने पति का नाम दर्ज कराने के बजाय अपने पिता स्वर्गीय आलोक चंद्राकर का नाम दर्ज कराया। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि वह आलोक चंद्राकर के गांव कुरूद स्थित घर में नहीं रहती थीं। यानी जांच में यह सवाल उठाया गया कि उनका उस संपत्ति या पते से वास्तविक संबंध कितना था।
गीता अंजलि चंद्राकर ने अपने पति का नाम नहीं लिखा। इसके बजाय अपने पिता स्वर्गीय आलोक चंद्राकर का नाम दर्ज कराया। उन्होंने जमीन के अवैध प्लॉटिंग और उपखंड विभाजन के दौरान ऐसा किया।
मुआवजा पाने या जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए रिश्तों और नामों का इस्तेमाल किया गया। पति की जगह पिता या ससुर का नाम दर्ज कर जमीन को एक ही परिवार से जुड़ा दिखाया गया। इससे भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया में लाभ लेने की कोशिश की गई।
अजय चंद्राकर का मामा परिवार भी खेल में शामिल :
मनोहर सिंह चंद्राकर - अजय चंद्राकर का मामा परिवार, खसरा 357/11
सुषमा - अजय चंद्राकर का मामा परिवार, खसरा 357/12
विशाखा - अजय चंद्राकर का मामा परिवार,खसरा 357/13
योगेश - अजय चंद्राकर का मामा परिवार,खसरा 357/3
रेखा - अजय चंद्राकर का मामा परिवार,खसरा 357/8
मीना बाई - अजय चंद्राकर का मामा परिवार, खसरा 357/9
काम करने वाले लोग भी शामिल :
रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे मामले की जांच के बाद तैयार रिपोर्ट अब ED के पास पहुंच चुकी है और रिपोर्ट में शामिल बिंदुओं के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। भारत माला प्रोजेक्ट से जुड़े इस घोटाले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
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