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Durg 765 Acres Land Scam: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीन से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। पुलिस ने भुइंया सॉफ्टवेयर हैकिंग और फर्जी बंटवारे के जरिए करोड़ों की जमीन और बैंक लोन हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में नंदिनी थाना पुलिस ने भिलाई निवासी नंद किशोर साहू को गिरफ्तार किया है।
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कैसे किया गया 765 एकड़ जमीन घोटाला?
आरोपियों ने ऑनलाइन राजस्व अभिलेख (भुइंया सॉफ्टवेयर) में हैकिंग कर मूल खसरा नंबरों से छेड़छाड़ की। नए 52 बोगस खसरा नंबर बनाए गए और 765 एकड़ भूमि को अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया।
इनमें से आधी जमीन शासकीय और आधी निजी थी, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 500 करोड़ रूपए आंकी गई है। फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों ने बैंकों से मोटे लोन लिए और रकम निजी उपयोग में लगा दी।
बैंक लोन और निवेश
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी दिनू राम यादव और एस. राम बंजारे ने षड्यंत्र रचकर भारतीय स्टेट बैंक, नंदिनी शाखा से 36 लाख रूपए का लोन लिया। इस रकम का बड़ा हिस्सा नंद किशोर साहू के खाते में ट्रांसफर किया गया।
साहू ने करीब 20 लाख रूपए अपनी निजी कंपनी भिलाई–दुर्ग फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी में निवेश कर दिया। पुलिस ने उसे 27 अगस्त को गिरफ्तार किया।
खुलासा कैसे हुआ?
यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने इन फर्जी खसरा नंबरों के आधार पर एचडीएफसी बैंक से लोन लेने की कोशिश की। बैंक ने जब जमीन के दस्तावेजों की जांच कराई तो गड़बड़ी पकड़ में आई। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और बड़ा नेटवर्क सामने आया।
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दुर्ग भूमि घोटाला क्या है?
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पटवारियों पर गाज
प्राथमिक जांच में पाया गया कि इस फर्जीवाड़े में पाटन के पटवारी मनोज नायक और अहिवारा के पटवारी कृष्ण कुमार सिन्हा की आईडी का इस्तेमाल किया गया। एनआईसी से जानकारी मिलने के बाद दोनों पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। आशंका है कि इस घोटाले के तार रायपुर, कोरबा सहित अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस की कार्रवाई
नंदिनी थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 3(5) बीएनएस और 66(सी) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
इस घोटाले में कई और लोगों की संलिप्तता की जांच भी की जा रही है। यह मामला सिर्फ जमीन के फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी सिस्टम की सुरक्षा खामियां, बैंकिंग सिस्टम की लापरवाही और भूमाफियाओं की गहरी जड़ें भी उजागर हुई हैं।
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