एक पटवारी ने सरकार को लगाया 30 करोड़ का चूना, 3 ने मिलकर लगा दी 22 करोड़ की चपत, भारतमाला का घोटाला

Arun Tiwari | Jan 27, 2026, 16:14 IST
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भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर में सामने आए मुआवजा घोटाले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में पहला पूरक चालान विशेष न्यायालय, रायपुर में पेश किया है।

News in short:

  • भारत माला घोटाले में EOW की चार्जशीट
  • तत्कालीन पटवारियों पर गड़बड़ी का आरोप
  • ज़मीन को छोटे छोटे प्लॉट में बांटा
  • सरकार को 50 करोड़ रुपये की चपत

News in detail.

भारतमाला में घोटाला :

भारत माला परियोजना के अंतर्गत रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर मुआवजा घोटाला मामले में राज्य ईओडब्ल्यू ने विशेष न्यायालय रायपुर में तीन तत्कालीन पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान पेश किया है।

इसमें आरोपियों की वजह से शासन को 40 करोड़ रुपए का नुकसान होना बताया गया है। एक पटवारी ने 30 करोड़ का चूना सरकार को लगाया। दो अन्य ने 10 करोड़ की हेराफेरी कर दी। इनके अलावा एक और पटवारी ने तहसीलदार के साथ मिलकर 12 करोड़ की गड़बड़ी कर दी।

यह सब गड़बड़ी भारतमाला प्रोजेक्ट में अधिग्रहित की गई जमीन को छोटे छोटे प्लॉट में बांटकर की गई। यह सब गड़बड़ी मिला ली जाए तो आंकड़ा 50 करोड़ के पार जाता है।

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पटवारी और तहसीलदार का 12 करोड़ का गठजोड़ :

रायपुर जिले के ग्राम नायक बांधा में भारतमाला परियोजना के लिए किए गए भू-अर्जन में करीब 12 करोड़ रुपये की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। प्रकरण की शिकायत मिलने के बाद रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कांवरे ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार नायकबांधा में 12 अप्रैल 2019 में जमीन अधिग्रहण किया गया था। इस दौरान प्रदीप साहू के नाम खसरा नंबर 1260, 1262 और 1264 की भूमि दर्ज थी। आरोप है कि अधिक मुआवजा राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रदीप ने अपनी जमीन को दान पत्र के जरिए 21 छोटे-छोटे टुकड़ों में रजिस्ट्री करा दी।

आरोप है कि यह पूरा खेल मुआवजा राशि बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण में पटवारी जितेंद्र साहू और तत्कालीन तहसीलदार की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर नामांतरण किया गया। इसके बाद अधिकारियों की सांठगांठ से मुआवजा प्रकरण तैयार कर एनएचएआई को करीब 12 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

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ये पटवारी सब पर भारी:

ईओडब्ल्यू-एसीबी के मुताबिक इस मामले में आरोपी तत्कालीन पटवारी दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती धृतलहरे को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। तीनों आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय रायपुर में पूरक चालान प्रस्तुत किया गया है।

इन आरोपी पटवारियों ने लगाया चूना :

पटवारी नम्बर 1 दिनेश पटेल :
ग्राम नायकबांधा के तत्कालीन पटवारी दिनेश पटेल ने खाता दुरुस्ती, प्रपत्र-10, आपत्ति निराकरण के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया। अवार्ड के समय अधिग्रहित भूमि को प्लाट में बांटकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई गई। इससे सरकार को 30 करोड़ 82 लाख 14 हजार 868 रुपए की आर्थिक क्षति हुई।

पटवारी नम्बर 2 लेखराम देवांगन :
ग्राम टोकरो के तत्कालीन पटवारी लेखराम देवांगन ने खाता दुरुस्ती, प्रपत्र-10, भुगतान प्रतिवेदन के माध्यम से प्रक्रिया में पद का दुरुपयोग किया। उनके द्वारा अवार्ड के समय मूल खसरों को कृत्रिम प्लाट में दिखाकर अधिक मुआवजा कराया गया। इससे शासन को 7.16 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति हुई।

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पटवारी नम्बर 3 बसंती धृतलहरे :
इसी तरह ग्राम भेलवाडीह की तत्कालीन पटवारी बसंती धृतलहरे ने भी मूल खसरों को अवार्ड चरण में कृत्रिम प्लॉट में बांटकर अधिक मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई। इसके कारण सरकार को 1 करोड़ 67 लाख 47 हजार 464 रुपए की आर्थिक हानि हुई।

Sootr Knowledge:

छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट में अधिकारियों, दलालों, कारोबारियों और नेताओं ने मिलकर करोड़ों का भ्रष्टाचार किया। ईओडब्ल्यू का कहना है कि आरोपियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर भू-अभिलेखों में हेरफेर, खाता विभाजन (बंटवारा) और नामांतरण से जुड़े कूटरचित दस्तावेज तैयार किए।

Important Points:

. भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर में मुआवजा घोटाला सामने आया।
. राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने चालान विशेष अदालत में पेश किया।
. आरोप है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर मूल खसरों को छोटे प्लॉट में बांटा गया।
. इस गड़बड़ी से शासन को लगभग 50 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने का खुलासा हुआ।

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अब आगे क्या :

चालान पेश होने के बाद विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत में सुनवाई शुरू होगी, जहां आरोप तय किए जाएंगे। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि मुआवजा घोटाले में कुछ और अधिकारी, दलाल या लाभार्थी भी घेरे में आ सकते हैं। क्षति की भरपाई के लिए शासन वसूली और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई शुरू कर सकता है।

निष्कर्ष :

आरोपियों पर शासन की अर्जित भूमि को फिर से सरकार को विक्रय कर मुआवजा देने, निजी भूमि का गलत मुआवजा देने, भूमि स्वामी के बदले किसी अन्य को मुआवजा देने, निजी भूमि का गलत मुआवजा और उसके टुकड़े कर प्लॉट में बांटकर शासन का आर्थिक नुकसान करने के भी आरोप हैं।

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