झारखंड से गिरफ्तार पूर्व भाजपा नेता संदीप अग्रवाल ने ऐसे लगाया 300 करोड़ का चूना, दो भाई पहले ही जा चुके हैं जेल
Harrison Masih | Oct 29, 2026, 13:26 IST
पूर्व भाजपा नेता संदीप अग्रवाल गिरफ्तार
रायपुर। कारोबार में निवेश के नाम पर 300 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में भिलाई जिला भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया है। कोलकाता पुलिस ने उसे झारखंड से पकड़ा है। संदीप पर 300 करोड़ रूपए से ज्यादा की कथित ठगी का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया।
वहां से उसे 10 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
संदीप करीब 13 महीने से फरार था। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। बताया जा रहा है कि वह झारखंड के एक थाने में सरेंडर करने पहुंचा था। इसी दौरान कोलकाता पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई। पुलिस ने थाने के बाहर से ही उसे पकड़ लिया।
इस मामले में संदीप के परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी सामने आए हैं। उसके दोनों भाई संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। दोनों को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। वहीं, संजय की पत्नी राखी अग्रवाल भी इस मामले में सह-आरोपी बताई गई हैं।
संदीप अग्रवाल लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। उसकी तलाश गुजरात, पश्चिम बंगाल और झारखंड में की जा रही थी। पुलिस ने कई शहरों में संभावित ठिकानों पर तलाश की।
इन शहरों में अहमदाबाद, गांधीधाम, भुवनेश्वर, रायपुर, भिलाई और कोलकाता शामिल हैं। पुलिस लगातार उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही थी।
आरोप है कि संदीप और उसके परिजनों ने कारोबार की आड़ में लोगों से बड़ी रकम ली। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित गबन की रकम 300 करोड़ रूपए से ज्यादा है।
अब संदीप की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। पुलिस इस कथित धोखाधड़ी से जुड़े लेन-देन और अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
इस मामले में गुजरात के गांधीधाम निवासी कारोबारी पवन मोर की शिकायत अहम है। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय, सचिन, संदीप और राखी अग्रवाल ने कोक एक्सपोर्ट के कारोबार में निवेश का प्रस्ताव दिया था।
आरोपियों ने निवेश पर अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया। इसी भरोसे पर पवन मोर से 89 करोड़ रूपए लिए गए। लेकिन बाद में उन्हें निवेश का रिटर्न नहीं मिला।
जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पवन मोर ने 8 फरवरी 2025 को गांधीधाम बी डिवीजन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया था। इस मामले में गुजरात पुलिस ने संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। दोनों भिलाई के कोयला कारोबारी बताए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक, निवेश के नाम पर रकम ली गई थी। लेकिन वादा किया गया मुनाफा नहीं मिला। इसके बाद रकम वापस मांगने पर भी समाधान नहीं हुआ।
शिकायतकर्ताओं ने संदीप अग्रवाल पर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि वह भिलाई में खुद को भाजपा नेता बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था।
संदीप भिलाई जिला भाजपा का पूर्व कोषाध्यक्ष बताया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उसने कार्रवाई से बचने के लिए अपने राजनीतिक संपर्कों का सहारा लिया।
हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक, संदीप गुजरात के डीसीबी पुलिस स्टेशन से जुड़े एक मामले में पहले से जमानत पर था। इस मामले में पुलिस कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
इसके अलावा, झारखंड पुलिस ने भी अदालत के आदेश पर उसके आवास पर नोटिस चस्पा किया था।
इस मामले में संदीप के बड़े भाई संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल भी जेल में रह चुके हैं। दोनों करीब 13 महीने तक गांधीधाम और धनबाद की जेलों में बंद रहे।
रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों रिहा हुए हैं। दोनों के खिलाफ पहले लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी हुआ था।
लुक आउट सर्कुलर का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य संबंधित व्यक्ति के देश से बाहर जाने या आने की जानकारी प्राप्त करना हो सकता है।
संजय अग्रवाल की पत्नी राखी अग्रवाल का नाम भी इस मामले में आया है। उन्हें सह-आरोपी बताया गया है। जानकारी के अनुसार, वह धनबाद जेल में करीब दो महीने रहने के बाद जमानत पर बाहर आई थीं।
गांधीधाम के कारोबारी पवन मोर ने आरोप लगाया था कि कोक एक्सपोर्ट में निवेश के नाम पर उनसे 89 करोड़ रूपए लिए गए। उन्होंने शिकायत में संजय, सचिन, संदीप और राखी अग्रवाल के नाम लिए थे।
उनका कहना था कि आरोपियों ने भारी मुनाफे का भरोसा दिया था। लेकिन निवेश से रिटर्न नहीं मिला। रकम वापस मांगने पर भी उन्हें पैसे नहीं लौटाए गए।
इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। गुजरात पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए संदीप के दो भाइयों को गिरफ्तार किया था।
पवन मोर ने यह आरोप भी लगाया था कि राजनीतिक संरक्षण के कारण आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी हुई। यह शिकायतकर्ता का आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।
संदीप अग्रवाल और उसके परिवार पर कारोबार के नाम पर 300 करोड़ रूपए से ज्यादा की कथित धोखाधड़ी का आरोप है। वहीं, पवन मोर की शिकायत में 89 करोड़ रूपए की रकम का उल्लेख है।
इन दोनों आंकड़ों का दायरा अलग है। 89 करोड़ रूपए का मामला एक कारोबारी की शिकायत से जुड़ा है। जबकि 300 करोड़ रूपए से ज्यादा की रकम को लेकर व्यापक आरोप लगाए गए हैं।
संदीप की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कथित Financial Fraud से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। इसमें पैसों के लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका अहम होगी।
फिलहाल, संदीप को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कथित ठगी की कुल रकम की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
संदीप करीब 13 महीने से फरार था। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। बताया जा रहा है कि वह झारखंड के एक थाने में सरेंडर करने पहुंचा था। इसी दौरान कोलकाता पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई। पुलिस ने थाने के बाहर से ही उसे पकड़ लिया।
इस मामले में संदीप के परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी सामने आए हैं। उसके दोनों भाई संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। दोनों को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। वहीं, संजय की पत्नी राखी अग्रवाल भी इस मामले में सह-आरोपी बताई गई हैं।
तीन राज्यों में पुलिस कर रही थी तलाश
इन शहरों में अहमदाबाद, गांधीधाम, भुवनेश्वर, रायपुर, भिलाई और कोलकाता शामिल हैं। पुलिस लगातार उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही थी।
आरोप है कि संदीप और उसके परिजनों ने कारोबार की आड़ में लोगों से बड़ी रकम ली। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित गबन की रकम 300 करोड़ रूपए से ज्यादा है।
अब संदीप की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है। पुलिस इस कथित धोखाधड़ी से जुड़े लेन-देन और अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
कोक एक्सपोर्ट में निवेश का दिया था लालच
आरोपियों ने निवेश पर अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया। इसी भरोसे पर पवन मोर से 89 करोड़ रूपए लिए गए। लेकिन बाद में उन्हें निवेश का रिटर्न नहीं मिला।
जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पवन मोर ने 8 फरवरी 2025 को गांधीधाम बी डिवीजन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया था। इस मामले में गुजरात पुलिस ने संजय अग्रवाल और सचिन अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। दोनों भिलाई के कोयला कारोबारी बताए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक, निवेश के नाम पर रकम ली गई थी। लेकिन वादा किया गया मुनाफा नहीं मिला। इसके बाद रकम वापस मांगने पर भी समाधान नहीं हुआ।
संदीप पर राजनीतिक प्रभाव इस्तेमाल करने का आरोप
संदीप भिलाई जिला भाजपा का पूर्व कोषाध्यक्ष बताया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उसने कार्रवाई से बचने के लिए अपने राजनीतिक संपर्कों का सहारा लिया।
हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।
जानकारी के मुताबिक, संदीप गुजरात के डीसीबी पुलिस स्टेशन से जुड़े एक मामले में पहले से जमानत पर था। इस मामले में पुलिस कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
इसके अलावा, झारखंड पुलिस ने भी अदालत के आदेश पर उसके आवास पर नोटिस चस्पा किया था।
दोनों भाइयों को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों रिहा हुए हैं। दोनों के खिलाफ पहले लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी हुआ था।
लुक आउट सर्कुलर का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य संबंधित व्यक्ति के देश से बाहर जाने या आने की जानकारी प्राप्त करना हो सकता है।
संजय अग्रवाल की पत्नी राखी अग्रवाल का नाम भी इस मामले में आया है। उन्हें सह-आरोपी बताया गया है। जानकारी के अनुसार, वह धनबाद जेल में करीब दो महीने रहने के बाद जमानत पर बाहर आई थीं।
89 करोड़ की शिकायत से सामने आया मामला
उनका कहना था कि आरोपियों ने भारी मुनाफे का भरोसा दिया था। लेकिन निवेश से रिटर्न नहीं मिला। रकम वापस मांगने पर भी उन्हें पैसे नहीं लौटाए गए।
इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। गुजरात पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए संदीप के दो भाइयों को गिरफ्तार किया था।
पवन मोर ने यह आरोप भी लगाया था कि राजनीतिक संरक्षण के कारण आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी हुई। यह शिकायतकर्ता का आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।
300 करोड़ से ज्यादा की कथित ठगी की जांच
इन दोनों आंकड़ों का दायरा अलग है। 89 करोड़ रूपए का मामला एक कारोबारी की शिकायत से जुड़ा है। जबकि 300 करोड़ रूपए से ज्यादा की रकम को लेकर व्यापक आरोप लगाए गए हैं।
संदीप की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कथित Financial Fraud से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। इसमें पैसों के लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका अहम होगी।
फिलहाल, संदीप को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कथित ठगी की कुल रकम की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
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