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NEWS IN SHORT
- बीजापुर में सुरक्षाबलों ने नक्सली कमांडर DVCM उधम सिंह को मार गिराया।
- उधम सिंह 2021 के टेकुलगुड़ेम हमले में शामिल था, जिसमें 22 जवान शहीद हुए थे।
- मुठभेड़ छत्तीसगढ़–तेलंगाना सीमा के जंगल में हुई।
- उधम सिंह पर 8 लाख रूपए का इनाम था।
- इसी दिन बीजापुर में 12 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया।
NEWS IN DETAIL
बीजापुर में बड़ी कामयाबी
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है।
गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे छत्तीसगढ़–तेलंगाना सीमा क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में नक्सली कमांडर उधम सिंह मारा गया।
तरेम थाना क्षेत्र के अंतर्गत पेद्दागेलूर जंगल में DRG और CRPF कोबरा के जवानों ने नक्सलियों को घेर लिया।
दोनों ओर से रुक-रुककर फायरिंग होती रही। एनकाउंटर के बाद मौके से एक AK-47 राइफल बरामद की गई।
कौन था उधम सिंह
उधम सिंह DVCM रैंक का नक्सली था। वह प्लाटून नंबर-30 का कमांडर और जागूरगुंडा एरिया कमेटी का प्रमुख था। उस पर 8 लाख रूपए का इनाम घोषित था और वह कई बड़ी नक्सली वारदातों में शामिल रहा।
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22 जवानों की शहादत का गुनहगार
3 अप्रैल 2021 को टेकुलगुड़ेम (तरेम) में हुए नक्सली हमले में 22 जवान शहीद हुए थे। NIA जांच में सामने आया था कि 350–400 नक्सलियों ने BGL और स्वचालित हथियारों से हमला किया था। उधम सिंह इस हमले का हिस्सा था।
12 नक्सलियों का सरेंडर
बीजापुर में ही 12 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें नॉर्थ और साउथ बस्तर में सक्रिय बड़े नक्सली शामिल हैं। सभी ने हथियार छोड़कर संविधान की प्रति हाथ में ली। इन पर कुल 54 लाख रूपए का इनाम था।
जनवरी में भी बड़ा एनकाउंटर
इससे पहले 16 जनवरी को बीजापुर नेशनल पार्क क्षेत्र में महिला नक्सली समेत 4 नक्सलियों को मार गिराया गया था। इनमें एरिया कमेटी चीफ दिलीप वेंडजा भी शामिल था।
Sootr Knowledge
- DVCM नक्सली संगठन में डिविजनल कमांडर स्तर का पद होता है।
- टेकुलगुड़ेम हमला नक्सल इतिहास के सबसे घातक हमलों में गिना जाता है।
- DRG स्थानीय स्तर पर गठित विशेष बल है, जो जंगल युद्ध में प्रशिक्षित होता है।
- कोबरा CRPF की एलीट जंगल फोर्स मानी जाती है।
- सरेंडर नीति के तहत नक्सलियों को पुनर्वास और आर्थिक सहायता दी जाती है।
IMP FACTS
- उधम सिंह पर इनाम: ₹8 लाख
- 2021 टेकुलगुड़ेम हमला: 22 जवान शहीद
- सरेंडर करने वाले नक्सली: 12
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1 जनवरी 2024 से अब तक:
- 888 नक्सली मुख्यधारा में लौटे
- 1163 गिरफ्तार
- 231 मुठभेड़ में मारे गए
आगे क्या
- इलाके में बड़े नक्सली लीडरों की तलाश तेज होगी।
- टॉप नक्सलियों पर केंद्रित इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन बढ़ेंगे।
- सरेंडर नीति के जरिए और नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश।
निष्कर्ष
उधम सिंह का एनकाउंटर नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता है। 22 जवानों की शहादत के जिम्मेदार नक्सली का अंत सुरक्षाबलों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है। साथ ही सरेंडर की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि बस्तर में नक्सल संगठन लगातार कमजोर हो रहा है।
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