छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बदलाव : अब हर एक किताब पर होगा यूनिक बारकोड
Umeshwari Baghel | Jun 13, 2026, 15:52 IST
किताबों की कालाबाजारी पर कड़ा एक्शन
छत्तीसगढ़ में किताब वितरण अब पूरी तरह डिजिटल होगा। हर किताब पर यूनिक बारकोड लगाया जाएगा और स्कूलों को 5 दिन में स्कैन करना जरूरी होगा। डेटा सीधे DPI और NIC सिस्टम से जुड़ेगा जिससे रियल टाइम निगरानी होगी। देरी या गड़बड़ी पर संस्था प्रमुख जिम्मेदार होंगे।
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में किताब वितरण पर डिजिटल सिस्टम लागू
- हर पाठ्यपुस्तक पर लगेगा यूनिक बारकोड
- 5 दिन में स्कैन अनिवार्य, लापरवाही पर कार्रवाई तय
- रियल टाइम डेटा से DPI और NIC की सख्त निगरानी
- 6 स्थायी और 6 अस्थायी डिपो से होगी सप्लाई व्यवस्था
NEWS IN DETAIL
नई प्रणाली को 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू किया जा सकता है। इसके बाद कक्षा 1 से 10वीं तक की सभी पाठ्यपुस्तकें डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़ जाएंगी।
हर किताब पर यूनिक बारकोड, स्कैनिंग अनिवार्य
स्कूलों को किताबें प्राप्त करने के बाद अधिकतम 5 दिनों के भीतर सभी बारकोड स्कैन करने होंगे। स्कैनिंग के बाद यह डेटा सीधे शिक्षा विभाग के डिजिटल सिस्टम में अपडेट हो जाएगा।
यदि कोई स्कूल निर्धारित समय सीमा में स्कैनिंग नहीं करता है, तो इसे वितरण प्रक्रिया में अनियमितता माना जाएगा और इसकी जिम्मेदारी सीधे संस्था प्रमुख पर तय की जाएगी।
रियल टाइम मॉनिटरिंग से जुड़ेगा पूरा सिस्टम
इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि-किस स्कूल को कितनी किताबें दी गईं, कितनी किताबें छात्रों तक पहुंचीं, किस स्तर पर वितरण में देरी हुई यह पूरा सिस्टम रियल टाइम डेटा उपलब्ध कराएगा, जिससे निगरानी पहले से अधिक मजबूत हो जाएगी।
वितरण में देरी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
इसके अलावा वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी पर संस्था प्रमुख की जवाबदेही तय होगी। इसके लिए स्कूलों से एक लिखित वचन पत्र भी लिया जा रहा है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि समय पर स्कैनिंग और वितरण न होने की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी।
छह स्थायी और छह अस्थायी डिपो तैयार
स्थायी डिपो में रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं। वहीं अस्थायी डिपो के तौर पर भानपुरी, माकड़ीखुना, ककिर और बलरामपुर जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन डिपो का उद्देश्य दूरस्थ इलाकों तक किताबों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
ब्लॉक वार शेड्यूल से होगी वितरण प्रक्रिया
यदि किसी तकनीकी कारण से किसी स्कूल तक किताबें नहीं पहुंच पाती हैं, तो उन्हें टोकन जारी कर अगले दिन प्राथमिकता के आधार पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
शिक्षा विभाग की डिजिटल रणनीति का बड़ा कदम
इससे बीच में स्टॉक गायब होने, किताबों की कालाबाजारी या अनियमित वितरण जैसी समस्याओं पर रोक लगने की उम्मीद है। डिजिटल ट्रैकिंग के कारण पूरे सिस्टम में जवाबदेही तय होगी और हर स्तर पर डेटा आधारित निगरानी संभव हो सकेगी।
निजी स्कूलों पर बढ़ेगी जवाबदेही
पाठ्यपुस्तक निगम की प्रबंध निदेशक किरण कौशल ने निजी स्कूल संगठनों के पदाधिकारियों के साथ इस व्यवस्था को लेकर चर्चा भी की है। इसमें स्कूलों को नई प्रणाली की जानकारी और उसकी जिम्मेदारियों के बारे में अवगत कराया गया।
निष्कर्ष
FAQ
- नई व्यवस्था में किताबों पर क्या बदलाव होगा?
हर किताब पर यूनिक बारकोड लगाया जाएगा, जिससे उसकी ट्रैकिंग और वितरण की पूरी जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगी। - स्कूलों को स्कैनिंग कब तक करनी होगी?
किताबें मिलने के बाद 5 दिनों के भीतर सभी बारकोड स्कैन करना अनिवार्य होगा, वरना इसे गड़बड़ी माना जाएगा। - नियम का पालन न करने पर क्या कार्रवाई होगी?
स्कैनिंग या वितरण में लापरवाही होने पर स्कूल संस्था प्रमुख को जिम्मेदार माना जाएगा और कार्रवाई तय नियमों के अनुसार होगी।
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