निर्यात शुल्क बढ़ने से बिगड़ा गणित, Bsp ई-ऑक्शन मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Umeshwari Baghel | Aug 06, 2026, 17:43 IST
Bsp ई-ऑक्शन मामले में हाई कोर्ट का राहत से इनकार
भिलाई स्टील प्लांट के ई-ऑक्शन में 10 लाख रुपए की बयाना राशि जब्ती मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने कामधेनु ट्रेडिंग की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह संविदात्मक विवाद है और इसका समाधान मध्यस्थता प्रक्रिया से होगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- BSP ई-ऑक्शन विवाद में हाई कोर्ट का फैसला
- 10 लाख जब्ती पर कामधेनु को नहीं मिली राहत
- 22 लाख के सौदे पर हाई कोर्ट सख्त
- निर्यात शुल्क बढ़ा, सौदा अटका, याचिका खारिज
- BSP मामले में मध्यस्थता का रास्ता साफ
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला संविदा यानी अनुबंध से जुड़ा हुआ है। ऐसे विवादों के समाधान के लिए अनुबंध में मध्यस्थता (Arbitration) का प्रावधान मौजूद है। इसलिए सीधे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करना उचित नहीं है।
22 लाख रुपए के सौदे पर आया था संकट
इसके बाद कंपनी ने सौदे की प्रक्रिया के तहत 10 लाख रुपए की बयाना राशि सहित कुल करीब 22 लाख रुपए जमा कर दिए थे। लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं।
निर्यात शुल्क बढ़ने से बिगड़ा व्यापार गणित
कंपनी का तर्क था कि अचानक शुल्क बढ़ने से बाजार की स्थिति बदल गई और इस सौदे को पूरा करना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया। इसके बाद कंपनी ने BSP प्रबंधन से राहत देने की मांग की थी।
BSP ने जब्त कर ली थी राशि
कोर्ट ने कहा- मध्यस्थता प्रक्रिया अपनाएं
हाई कोर्ट ने जब याचिकाकर्ता से इस संबंध में जानकारी मांगी तो कंपनी की ओर से भी माना गया कि अनुबंध में मध्यस्थता की शर्त मौजूद है।
संविदात्मक विवाद में नहीं होगा सीधा हस्तक्षेप
कोर्ट ने कहा कि निर्यात शुल्क बढ़ने से व्यापार प्रभावित होना और बयाना राशि जब्त करना दोनों ही अनुबंध की शर्तों से जुड़े विषय हैं। इनका फैसला मध्यस्थता मंच के जरिए ही किया जाना चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता कंपनी कानून के अनुसार मध्यस्थता या अन्य वैधानिक विकल्प अपना सकती है।
FAQ
- हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
हाई कोर्ट ने कामधेनु ट्रेडिंग की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह संविदात्मक (कॉन्ट्रैक्ट) विवाद है और इसका समाधान मध्यस्थता (Arbitration) के जरिए किया जाना चाहिए। - कंपनी ने कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया था?
कंपनी ने BSP द्वारा 10 लाख रुपए की बयाना राशि (EMD) और जीएसटी राशि जब्त किए जाने को चुनौती देते हुए रकम वापस करने की मांग की थी। - विवाद की मुख्य वजह क्या थी?
कंपनी का कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा लौह उत्पादों पर निर्यात शुल्क 15% से बढ़ाकर 50% किए जाने के बाद सौदा आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं रहा, इसलिए वह अनुबंध पूरा नहीं कर सकी।
यह खबरें भी पढ़े....
केंद्र सरकार ने EPF के 64 साल पुराने नियमों में किया बदलाव, कर्मचारी संगठन हुआ नाराज पर क्यों ?
बीजेपी पार्षद भिलाई स्टील प्लांट से तांबे का तार चोरी करते पकड़ा
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला : प्याज निर्यात शुल्क किया 20% कम, किसानों को राहत
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava