BSP में 114 करोड़ की स्क्रैप चोरी: छत्तीसगढ़ सरकार की हरी झंडी के बाद अब CBI करेगी जांच
Harrison Masih | Sept 29, 2026, 12:43 IST
BSP स्क्रैप चोरी केस
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से लोहा-स्क्रैप चोरी के मामले में अब जांच का दायरा बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने के लिए सहमति दे दी है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना का उल्लेख छत्तीसगढ़ राजपत्र में किया गया है। इसके बाद अपराध क्रमांक 277/2026 से जुड़े मामले की जांच अब CBI के दायरे में आ गई है।
राज्य सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना यानी CBI को पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी शक्तियों और क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। ऐसे में अब स्क्रैप चोरी से जुड़े पूरे नेटवर्क, चोरी किए गए माल की मात्रा, उसकी खरीद-बिक्री और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच केंद्रीय एजेंसी कर सकती है।
BSP स्क्रैप चोरी का मामला उस समय सामने आया, जब पुलिस ने अकलोरडीही खदान पारा स्थित एके ट्रेडर्स से करीब 250 टन लौह स्क्रैप बरामद किया था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने स्क्रैप के साथ कई वाहन और मशीनें भी जब्त की थीं।
बरामदगी के बाद पुरानी भिलाई थाने में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया। शुरुआती जांच में पुलिस ने स्क्रैप के स्रोत और उसे BSP से बाहर निकालने के तरीके की पड़ताल शुरू की।
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो स्क्रैप को BSP से बाहर निकालने और उसे दूसरे स्थानों तक पहुंचाने से जुड़ी कई कड़ियां सामने आने लगीं। पुलिस ने संजय सिंह को मामले का मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि स्क्रैप को बाहर निकालने के लिए फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। इसके बाद पुलिस ने स्क्रैप की आवाजाही और उसे आगे खपाने से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की।
मामले की जांच का एक सिरा रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड तक भी पहुंचा। पुलिस के अनुसार, चोरी के स्क्रैप की इस कंपनी में खपत किए जाने की बात जांच में सामने आई।
इसके बाद कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग (60) और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह (39) को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक, अब तक इस मामले में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से 3 आरोपी जमानत पर बाहर हैं, जबकि 5 आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
इस मामले में BSP से एक साल के दौरान करीब 114 करोड़ रुपए के लोहा-स्क्रैप की चोरी का अनुमान सामने आया है। हालांकि, चोरी की वास्तविक मात्रा और इससे हुए आर्थिक नुकसान का अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब CBI की जांच शुरू होने के बाद इस अनुमान की भी जांच की जा सकती है कि वास्तव में कितने मूल्य का स्क्रैप बाहर गया और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन लंबे समय से इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग कर रहे थे। उन्होंने इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय इस्पात मंत्रालय, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष समेत कई स्तरों पर पत्राचार किया था।
विधायक ने CBI के साथ-साथ ED, EOW और ACB से भी मामले की जांच कराने की मांग की थी। अब राज्य सरकार की ओर से CBI जांच के लिए सहमति दिए जाने के बाद मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की औपचारिक एंट्री हो गई है।
राज्य शासन की सहमति और राजपत्र में अधिसूचना का उल्लेख होने के बाद अब CBI के सामने मामले की जांच का रास्ता खुल गया है। केंद्रीय एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों, आरोपों और पहले हुई पुलिस जांच की जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि BSP से स्क्रैप कथित तौर पर किस तरह बाहर निकाला जाता था, इसे कहां ले जाया जाता था और आगे इसकी बिक्री या खपत किस तरह होती थी।
CBI जांच की अधिसूचना जारी होने के बाद विधायक रिकेश सेन ने देर रात वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि BSP से राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी करने वालों को अब जांच के दायरे में लाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह कहते थे कि मामले में CBI जांच नहीं होगी, उन्हें अब जवाब मिल गया है। विधायक ने इस कार्रवाई को मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
BSP से जुड़े इस स्क्रैप चोरी मामले में पहले ही 21 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। अब CBI की जांच शुरू होने के बाद मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, किन लोगों से पूछताछ होती है और चोरी किए गए स्क्रैप की वास्तविक मात्रा कितनी निकलती है, इस पर नजर रहेगी।
250 टन स्क्रैप बरामद होने के बाद सामने आया मामला
बरामदगी के बाद पुरानी भिलाई थाने में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया। शुरुआती जांच में पुलिस ने स्क्रैप के स्रोत और उसे BSP से बाहर निकालने के तरीके की पड़ताल शुरू की।
जांच में सामने आई स्क्रैप बाहर निकालने की कड़ी
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि स्क्रैप को बाहर निकालने के लिए फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। इसके बाद पुलिस ने स्क्रैप की आवाजाही और उसे आगे खपाने से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की।
रसमड़ा की स्टील कंपनी तक पहुंची जांच
इसके बाद कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग (60) और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह (39) को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक, अब तक इस मामले में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से 3 आरोपी जमानत पर बाहर हैं, जबकि 5 आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
करीब 114 करोड़ रुपए की चोरी का अनुमान
अब CBI की जांच शुरू होने के बाद इस अनुमान की भी जांच की जा सकती है कि वास्तव में कितने मूल्य का स्क्रैप बाहर गया और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
विधायक रिकेश सेन ने की थी CBI जांच की मांग
विधायक ने CBI के साथ-साथ ED, EOW और ACB से भी मामले की जांच कराने की मांग की थी। अब राज्य सरकार की ओर से CBI जांच के लिए सहमति दिए जाने के बाद मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की औपचारिक एंट्री हो गई है।
राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद बढ़ी हलचल
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि BSP से स्क्रैप कथित तौर पर किस तरह बाहर निकाला जाता था, इसे कहां ले जाया जाता था और आगे इसकी बिक्री या खपत किस तरह होती थी।
विधायक ने कहा- राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी करने वालों पर होगी कार्रवाई
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह कहते थे कि मामले में CBI जांच नहीं होगी, उन्हें अब जवाब मिल गया है। विधायक ने इस कार्रवाई को मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
अब CBI जांच पर टिकी नजर
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