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Raipur. छत्तीसगढ़ की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए मंगलवार का दिन बेहद अहम रहने वाला है। विधानसभा में पेश होने जा रहा राज्य का नया बजट केवल आय-व्यय का हिसाब नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि सरकार अपने बड़े चुनावी वादों को जमीन पर उतारने के लिए कितनी गंभीर है।
किसानों को बोनस, महिलाओं को नकद सहायता, युवाओं को रोजगार और गांवों को विकास – इन सबके बीच संतुलन बैठाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहने वाला है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार राज्य का बजट आकार करीब 1.90 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा बजट होगा।
पिछले बजट की तुलना में इस बार सरकार खर्च बढ़ाकर विकास और कल्याण दोनों का संदेश देने की तैयारी में है।
किसानों के नाम पर सबसे बड़ा दांव
राज्य की राजनीति में किसान सबसे बड़ा मुद्दा हैं और बजट में भी यही सबसे बड़ा फोकस रहने वाला है। धान खरीदी, समर्थन मूल्य के ऊपर अतिरिक्त राशि और किसान प्रोत्साहन योजनाओं पर हजारों करोड़ खर्च होने की संभावना है।
सरकार यह संदेश देना चाहेगी कि किसान उसकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। कृषि सिंचाई योजनाओं, पंप कनेक्शन और ग्रामीण सड़कों के लिए भी नए प्रावधान किए जा सकते हैं। अगर किसानों के लिए बड़े ऐलान होते हैं तो यह बजट पूरी तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था केंद्रित माना जाएगा।
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महिलाओं के लिए नकद योजनाओं पर जोर
महिलाओं के लिए चल रही प्रत्यक्ष लाभ योजनाएं बजट का बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने वाली योजनाओं पर भारी खर्च पहले से हो रहा है और इस बार इसमें बढ़ोतरी संभव है।
सरकार महिला वोट बैंक को मजबूत करने के संकेत इस बजट के जरिए देने की कोशिश कर सकती है। स्व-सहायता समूहों और पोषण योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त राशि रखे जाने की संभावना है।
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युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद
बेरोजगारी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में युवाओं को साधने के लिए कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और नई भर्तियों के संकेत बजट में मिल सकते हैं।
सरकारी विभागों में खाली पदों को भरने और तकनीकी शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने पर भी सरकार जोर दे सकती है। अगर रोजगार से जुड़ी ठोस घोषणाएं होती हैं तो यह बजट युवाओं के लिए राहत भरा माना जाएगा।
सड़क और शहरों पर खर्च बढ़ाने की तैयारी
सरकार इस बजट (CG Budget Session) को विकास का चेहरा देने के लिए सड़क, पुल, शहरी सुविधाओं और औद्योगिक परियोजनाओं पर खर्च बढ़ा सकती है।
औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए नई नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की घोषणा संभव है।
इससे सरकार यह दिखाना चाहेगी कि राज्य केवल योजनाओं पर खर्च नहीं कर रहा बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था भी तैयार कर रहा है।
असली परीक्षा – वादे बनाम खजाना
सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि सरकार अपने बड़े-बड़े वादों को पूरा करने के लिए पैसा कहां से लाएगी। कल्याणकारी योजनाओं पर भारी खर्च और विकास परियोजनाओं की जरूरत – दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा।
यही वजह है कि आने वाला बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि सरकार की आर्थिक सोच और राजनीतिक प्राथमिकताओं की असली तस्वीर भी होगा।
अगर बजट में बड़े ऐलान होते हैं तो यह सरकार की आक्रामक आर्थिक रणनीति का संकेत माना जाएगा, लेकिन अगर घोषणाएं सीमित रहीं तो सवाल भी उतनी ही तेजी से उठेंगे।
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