बजट सत्र में कांग्रेस का आक्रामक तेवर : जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

Ramanand Tiwari | Feb 16, 2026, 21:25 IST
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Congress's aggressive attitude in the budget session
Photograph: (the sootr)

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस ने सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। मुद्दे किसानों, युवाओं, महिलाओं और आदिवासियों से जुड़े हैं।

NEWS IN SHORT

  • कांग्रेस ने बजट सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति बनाई।
  • इंदौर जल त्रासदी में प्रशासनिक लापरवाही पर जिम्मेदारी तय करने की मांग।
  • किसानों को MSP पर अनिवार्य खरीद नहीं मिल रही, कांग्रेस ने सरकार को घेरा।
  • अटकी हुई सरकारी भर्तियों को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा।
  • महिला अपराध और भ्रष्टाचार पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने साफ संकेत दिया कि इस बार सदन में भाषण नहीं, जनता के मुद्दों की गूंज सुनाई देगी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में उनके निवास पर कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि सरकार को हर मोर्चे पर घेरा जाएगा।

बैठक में बजट सत्र की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस ने तय किया कि जिन मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है, उन्हें सदन के भीतर मजबूती से उठाया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विपक्ष तथ्यों और प्रमाणों के साथ सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा।

विधानसभा में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दे

नीचे वे मुख्य मुद्दे हैं, जिन्हें कांग्रेस बजट सत्र के दौरान प्राथमिकता से उठाने जा रही है-

इंदौर-भागीरथपुरा जल त्रासदी

पीने के पानी में सीवेज मिलावट से 34 से अधिक लोगों की मौत। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया गया। इस पर स्थगन प्रस्ताव दिया गया, लेकिन चर्चा नहीं हुई। कांग्रेस जवाबदेही तय करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग करेगी। यह मुद्दा सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

MSP और किसानों का संकट

किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनिवार्य खरीद नहीं मिल रही। ‘भावांतर मॉडल’ लागू कर सीधी खरीद से बचने का आरोप। संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असर किसानों पर पड़ने की आशंका।

कांग्रेस का कहना है कि किसान को उसका हक मिलना चाहिए, न कि वादों में उलझाया जाए। बढ़ता कर्ज और प्रदेश की आर्थिक हालत बजट का आकार बढ़ा, लेकिन कर्ज उससे भी ज्यादा बढ़ा। प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर सवाल।सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग। यह मुद्दा सीधे वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा है।

मंत्रियों से इस्तीफे की मांग

प्रशासनिक विफलताओं के आधार पर जवाबदेही तय करने की बात। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राजेन्द्र शुक्ल और विजय शाह से इस्तीफे की मांग।कांग्रेस का आरोप है कि जिम्मेदारी तय किए बिना व्यवस्था नहीं सुधरेगी।

अटकी हुई सरकारी भर्तियां

हजारों पद वर्षों से खाली। भर्ती प्रक्रियाएं लंबित। युवाओं का भविष्य अनिश्चित। यह मुद्दा प्रदेश के बेरोजगार युवाओं से सीधे जुड़ा है।

भ्रष्टाचार और महिला अपराध

भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ोतरी का आरोप। महिला अपराधों में वृद्धि चिंता का विषय। सरकार से ठोस कार्रवाई और जवाब की मांग। सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर विपक्ष आक्रामक है।

OBC, आदिवासी और दलित अधिकार

OBC को 27% आरक्षण का मामला छह साल से कानूनी अड़चन में। सरकार पर न्यायालय में प्रभावी पक्ष न रखने का आरोप। आदिवासी और दलित अधिकारों पर लगातार हमलों की बात। कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय का बड़ा मुद्दा मान रही है।

मनरेगा में मजदूरी और भ्रष्टाचार

पूरी मजदूरी न मिलने का आरोप। योजना में भ्रष्टाचार के सवाल। सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग। ग्रामीण रोजगार और गरीब वर्ग का मुद्दा भी प्रमुख एजेंडे में है।

कांग्रेस का संदेश: जवाबदेही से नहीं बच पाएगी सरकार

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हर मुद्दे पर तथ्य और प्रमाण के साथ सरकार से जवाब मांगा जाएगा। बजट सत्र अब केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक और जनहित के सवालों का केंद्र बनेगा।

इस बार सदन में गर्म रहेगा माहौल

मध्यप्रदेश विधानसभा का यह बजट सत्र राजनीतिक रूप से बेहद अहम होने जा रहा है। विपक्ष ने स्पष्ट रणनीति बना ली है और सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की तैयारी है। अब देखना होगा कि सदन में इन मुद्दों पर कितनी गंभीर बहस होती है। जनता को कितने ठोस जवाब मिलते हैं।

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