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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में ACF और रेंजर की सीधी भर्ती में 50% सीटें अब फॉरेस्ट्री ग्रेजुएट्स के लिए आरक्षित होंगी।
- पहले इन पदों के लिए केवल विज्ञान और गणित विषय से स्नातक होना अनिवार्य था।
- नए नियम से वानिकी पढ़े छात्रों को पहली बार सीधा लाभ मिलेगा।
- योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने पर अन्य विषयों के उम्मीदवारों को मौका दिया जाएगा।
- इस फैसले से वन संरक्षण और वन प्रबंधन की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में ACF यानी सहायक वन संरक्षक और रेंजर पदों की सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत सीटें फॉरेस्ट्री सब्जेक्ट से ग्रेजुएट छात्रों के लिए आरक्षित कर दी गईं हैं। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से उपेक्षित रहे फॉरेस्ट्री सब्जेक्ट से ग्रेजुएट्स् को सीधा लाभ मिलेगा। अब तक केवल विज्ञान और गणित विषय से स्नातक उम्मीदवारों को ही इन पदों के लिए पात्र माना जाता था। अब केवल 50 प्रतिशत पदों पर ही नौकरी पा सकेंगे। हालांकि पात्र अभ्यर्थियों के नहीं मिलने से अन्य विषयों को मौका दिया जाएगा।
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फॉरेट्स विशेषज्ञ को प्राथमिकता
अभी तक इन पदों के लिए आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी को विज्ञान और गणित विषय से ग्रेुजएशन की अनिवार्यता थी। जबकि फॉरेस्ट्री में स्नातक 3-4 साल का डिग्री कोर्स है जो छात्रों को वन प्रबंधन, संरक्षण, और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का विज्ञान सिखाता है, जिसमें वन पारिस्थितिकी, वन्यजीव प्रबंधन, और पर्यावरण नीति जैसे विषय शामिल होते हैं। जिसका उद्देश्य वन, वन्य जीवों के व्यवहार और पर्यावरण का विशेषज्ञ तैयार करना है। उसके बावजूद वानिकी पढ़े छात्रों को किसी तरह की प्राथमिकता नहीं मिलती थी।
छात्रों को क्या होगा फायदा
छत्तीसगढ़ का करीब 44 प्रतिशत क्षेत्र वन क्षेत्र है। फिलहाल फॉरेस्ट्री सब्जेक्ट से गेजुएट्स को मौका नहीं मिलने के कारण कई योग्य छात्र मजबूरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे। यह स्थिति वन प्रबंधन के लिहाज से भी उचित नहीं मानी जा रही थी। नए नियमों से अब राज्य के हजारों युवाओं को वन विभाग में सेवा करने का मौका मिलेगा। यह फैसला न केवल रोजगार के नए रास्ते खोलेगा, बल्कि वन संरक्षण और प्रबंधन को भी मजबूत करेगा।
CGPSC के जरिए भर्तियां
नए नियमों में बदलाव के बाद भी इन पदों पर सीजीपीएससी ही भर्ती परीक्षा ही आयोजित करता रहेगा। सहायक वन संरक्षक को द्वितीय श्रेणी अधिकारी माना जाता है, जबकि रेंजर का पद इंस्पेक्टर स्तर का पद होता है। दोनों ही पदों पर वन संरक्षण और प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होती है। देश के कई राज्यों में पहले से ही भारतीय वन नियमों के तहत वानिकी छात्रों को भर्तियों में प्राथमिकता दी जाती रही हैं।
वन संरक्षण को मिलेगा फायदा
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष सचिव जनक प्रसाद पाठक बता रहे हैं कि जंगलों की देखरेख, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे कामों में प्रशिक्षित लोगों की भूमिका अहम होती है। वानिकी पढ़े अधिकारियों की नियुक्ति से वन संरक्षण और प्रबंधन की गुणवत्ता बेहतर होगी। नियमों में संशोधन के तहत 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया हैं अगर इस विषय के अभ्यर्थी नहीं मिलते तो दूसरे विषयों के अभ्यर्थियों से पद भरे जाएंगे।
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