कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए मार्च तक 3 कोर्स अनिवार्य, नहीं तो अप्रैल से सैलरी पर लगेगा ब्रेक

VINAY VERMA | Jan 20, 2026, 20:22 IST
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छत्तीसगढ़ में अब सरकारी नौकरी सिर्फ फाइल आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों और कर्मचारियों को काम करने का तरीका, व्यवहार, नेतृत्व और जवाबदेही सरकार अब खुद सिखाएगी।

NEWS IN SHORT:

  • छग के कर्मचारी अधिकारियों की होगी ट्रेनिंग
  • काम में दक्ष बनाना चाहती है सरकार
  • ट्रेनिंग को प्रमोशन से भी जोड़ा
  • ट्रेनिंग नहीं तो नहीं मिलेगा वेतन
  • सरकारी रवैया से कर्मचारी-अधिकारियों में आक्रोश
  • संगठनों ने इसे दबाव बनाने का तरीका बताया
  • मांगों को जल्द पूरा करने की शासन से मांग

NEWS IN DETAIL :

केंद्र सरकार की तर्ज पर छग सरकार नें भी विजन 2047 की परिकल्पना की है जिसके तहत साल 2047 तक भारत को विकसित बनाने में छग की अहम भूमिका होगी। सरकार इसे साकार करने कई कदम उठा रही है। जिसमें से एक कदम प्रदेश के कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर काम में दक्ष करना है। जिससे प्रदेश में धीमे गति से सरक रही फाइलों में तेजी आए।



कर्मचारी अधिकारियों का व्यवहार जनता केंद्रित हो। काम के दौरान उनका व्यवहार बेहतर हो सके और अपने सरकार के विजन को प्रदेश का अंतिम कर्मचारी समझ सके। ऐसा न करने वालों पर सरकार ने कार्रवाई का भी प्रावधान रखा है। तय 5 कोर्स में से 3 कोर्स नहीं करने वालों का अप्रैल से वेतन रुक जाएगा। साथ ही प्रमोशन पर भी असर दिखाई देगा।



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क्या कहा गया है आदेश में

सामान्य प्रशासन सचिव अविनाश चंपावत के साइन से 3 जनवरी 2026 को जारी आदेश में साफ कहा गया है कि राज्य के सभी विभाग, मंत्रालय, सचिवालय और अधीनस्थ कार्यालय आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म से अनिवार्य रूप से जुड़ेंगे। यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित है, जो कर्मचारियों की भूमिका, पद और जिम्मेदारी के अनुसार कोर्स सुझाएगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और लापरवाही, सुस्ती व गैर-पेशेवर रवैये पर लगाम लगेगी।



विभाग में कैपेसिटी बिल्डिंग यूनिट

सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक विभाग में डिपार्टमेंटल कैपिसिटी बिल्डिंग यूनिट गठित की जाए। यह यूनिट विभाग की जरूरत के अनुसार प्लान तैयार करेगी। इसपर पूरा काम 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से करना होगा। इसी योजना के तहत यह तय होगा कि किस अधिकारी या कर्मचारी को कौन-सा कोर्स करना है।



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मार्च तक 3 कोर्स अनिवार्य

आदेश में सबसे सख्त प्रावधान यह है कि हर अधिकारी और कर्मचारी को 31 मार्च 2026 तक कम से कम 3 कोर्स अनिवार्य रूप से पूरे करने होंगे। वहीं, प्रत्येक विभाग को अपने स्तर पर आईगॉट प्लेटफॉर्म पर कम से कम 5 कोर्स उपलब्ध कराने होंगे। इसका सर्टिफिकेट भी सबमिट करना होगा। सर्टिफिकेट नहीं देने वालों पर सैलरी रोकने का प्रावधान किया गया है।





तीन स्तर पर होगा प्रशिक्षण

सरकार ने प्रशिक्षण को तीन हिस्सों में बांटा है—


Induction Program -नए कर्मचारियों के लिए


Mid-Career Learning -मध्य स्तर के अधिकारियों के लिए


Self Learning स्व-अध्ययन


इनमें कार्यप्रणाली, प्रक्रियात्मक ज्ञान, नैतिकता, नेतृत्व, नागरिक केंद्रित सोच और डिजिटल दक्षता जैसे विषय शामिल हैं। कोर्स पूरे होने पर ऑनलाइन परीक्षा होगी और सफल होने पर डिजिटल प्रमाण-पत्र मिलेगा।



धमकी देना बंद करे सरकार

इधर छग कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन कें संयोजक कमल वर्मा का कहना है कि प्रदेश कें कर्मचारी अधिकारी किसी भी ट्रेनिंग के पक्ष में हैं। लेकिन सरकार वेतन रोकने-प्रमोशन बाधित करने जैसी धमकी देना बंद करें। सरकार को कर्मचारी हितों और मांगों को भी ध्यान में रखना चाहिए। ताकि प्रदेश में किसी तरह का आंदोलन ना हो। क्योंकि आंदोलन से भी काम प्रभावित होता है।



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प्रशिक्षण संस्थानों की मदद

प्लान तैयार करने और प्रशिक्षण में सहयोग के लिए छत्तीसगढ़ अकादमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, पंचायती एवं ग्रामीण विकास अकादमिक संस्थान, स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर और IIIT नवा रायपुर को जिम्मेदारी दी गई है।



APAR और प्रमोशन से जुड़ेगा प्रशिक्षण

सरकार ने साफ कर दिया है कि वर्ष 2026-27 से APAR में iGOT कर्मयोगी के कोर्स जोड़े जाएंगे। यानी भविष्य में पदोन्नति, इंक्रीमेंट और अन्य लाभों पर प्रशिक्षण का सीधा असर पड़ेगा। यही वजह है कि अफसर-कर्मचारियों में इसे लेकर बेचैनी बढ़ गई है। सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि आदेश का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करें। 15 दिनों के भीतर ई-ऑफिस के जरिए सामान्य प्रशासन विभाग को प्रगति रिपोर्ट भेजनी होगी। अनुपालन की समीक्षा उच्च स्तर पर की जाएगी।



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निष्कर्ष

सरकार का कहना है कि iGOT कर्मयोगी से अफसर-कर्मचारियों में प्रोफेशनलिज्म आएगा और प्रशासन “कुर्सी-केंद्रित” नहीं बल्कि “नागरिक-केंद्रित” बनेगा। अब देखना यह है कि सरकारी अमला इस “शऊर की पाठशाला” को कितनी गंभीरता से लेता है, या मार्च की डेडलाइन आते-आते फिर नई मोहलत की मांग उठती है।



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