अब मेडिकल PG में मिलेगा 50% आरक्षण, हाईकोर्ट ने बदला अपना पुराना आदेश

Harrison Masih | Jan 20, 2026, 19:41 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल PG प्रवेश को लेकर अपने पुराने आदेश में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों को संस्थागत कोटा के तहत 50 प्रतिशत आरक्षण देना वैधानिक है।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल PG कोर्स को लेकर अपने पुराने आदेश में बड़ा बदलाव किया।
  • राज्य के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों को संस्थागत कोटा के तहत 50% आरक्षण वैध माना गया।
  • हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निवास आधारित आरक्षण को गलत, लेकिन संस्थागत प्राथमिकता को सही ठहराया।
  • यह आदेश चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने दिया।
  • फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ के MBBS स्टूडेंट्स का PG में भविष्य सुरक्षित माना जा रहा है।

NEWS IN DETAIL

हाईकोर्ट ने बदला पुराना आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट (PG) कोर्स में प्रवेश को लेकर अपने पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों को संस्थागत कोटा के तहत 50 प्रतिशत आरक्षण देना वैधानिक है।



यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश के उस हिस्से को हटा दिया, जिसमें राज्य सरकार को श्रेणी या संस्थान के आधार पर भेदभाव न करने का निर्देश दिया गया था।



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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया

इस आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों को PG में मेरिट के आधार पर 50% आरक्षण मिलेगा। उन्होंने सरकार से नियमों में तुरंत सुधार कर छात्रहित सुनिश्चित करने की मांग की।



शुभम विहार निवासी डॉ. समृद्धि दुबे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ मेडिकल PG प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(a) और 11(b) को चुनौती दी थी। इन नियमों के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वालों को प्राथमिकता दी जा रही थी। 20 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।



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सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक मामला

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। 18 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद सरकार को हाईकोर्ट से स्पष्टीकरण लेने की अनुमति दी। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया।



अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने दलील दी कि सरकार ने डोमिसाइल आधारित आरक्षण खत्म कर दिया है और केवल संस्थागत आधार पर वरीयता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 50% सीटें संस्थागत कोटे और 50% सीटें ओपन मेरिट के लिए तय की गई हैं।



हाईकोर्ट की अंतिम टिप्पणी

CG High Courtने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि PG मेडिकल सीटों पर निवास के आधार पर आरक्षण गलत है, लेकिन सीमित सीमा तक संस्थागत प्राथमिकता दी जा सकती है। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश की विवादित लाइन को हटा दिया।



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Sootr Knowledge

  • PG मेडिकल सीटों पर डोमिसाइल आरक्षण असंवैधानिक माना गया है।
  • संस्थागत कोटा सीमित दायरे में संवैधानिक रूप से मान्य है।
  • MBBS में 50% सीटें ऑल इंडिया कोटे से भरी जाती हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के तन्वी बहल केस का हवाला अहम रहा।
  • यह फैसला राज्य स्तर पर मेडिकल शिक्षा नीति को प्रभावित करेगा।

IMP FACTS

  • संस्थागत आरक्षण: 50%
  • ओपन मेरिट सीटें: 50%
  • फैसला देने वाली बेंच: CJ रमेश सिन्हा, जस्टिस बीडी गुरु
  • विवादित नियम: PG प्रवेश नियम 2025 के 11(a), 11(b)

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आगे क्या

  • राज्य सरकार नए नियमों के अनुसार PG प्रवेश प्रक्रिया लागू करेगी।
  • सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप संस्थागत कोटा लागू होगा।
  • आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया पर इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य के MBBS छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। संस्थागत कोटे को वैधानिक मान्यता मिलने से PG में स्थानीय मेडिकल छात्रों का भविष्य सुरक्षित हुआ है और मेडिकल शिक्षा में लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब स्पष्टता आ गई है।



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