स्कूल शिक्षा विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटरों को नियमित करने का आदेश, अन्य विभागों पर भी पड़ सकता है असर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के दो डाटा एंट्री ऑपरेटरों को नियमित नियुक्ति देने का आदेश दिया। यह फैसला अन्य संविदा कर्मचारियों के लिए भी अहम हो सकता है।

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VINAY VERMA
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Order to regularize data entry operators of School Education Department

Photograph: (the sootr)

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो डाटा एंट्री ऑपरेटरों को नियमित नियुक्ति का आदेश दिया।
  • कोर्ट ने कहा, राज्य का दायित्व है कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष और समान व्यवहार करना।
  • याचिकाकर्ताओं ने 2022 में संविदा नियुक्ति को चुनौती दी थी, अब मिली जीत।
  • यह मामला 2012 के संयुक्त विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति हुई थी।
  • यह फैसला संविदा कर्मचारियों के लिए एक मिसाल और भविष्य में लाभकारी हो सकता है।

NEWS IN DETAIL

RAIPUR. छत्तीसगढ़ में संविदा कर्मचारियों की लंबी कानूनी लड़ाई को बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत कार्यरत दो डाटा एंट्री ऑपरेटरों को नियमित नियुक्ति देने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले को संविदा कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे अन्य विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को भी कानूनी आधार मिल सकता है।

न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि एक आदर्श नियोक्ता के रूप में राज्य का दायित्व है कि वह अपने कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार करे, चाहे उनकी नियुक्ति संविदा हो या नियमित। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पद स्वीकृत और नियमित प्रकृति के हैं, तो केवल विज्ञापन में संविदात्मक उल्लेख कर कर्मचारियों को नियमित लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

इन कर्मचारियों ने दी थी कानूनी चुनौती

हंस कुमार रजवाड़े और जय प्रकाश चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 25 अक्टूबर 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विभाग ने उनकी नियुक्ति को नियमित मानने से इंकार करते हुए संविदा नियुक्ति बताया था।

दोनों याचिकाकर्ताओं ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से तर्क दिया कि उनकी नियुक्ति विधिवत चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी। उनके पद पहले से नियमित रूप से स्वीकृत थे।

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2012 के संयुक्त विज्ञापन से जुड़ा मामला

मामला वर्ष 2012 के एक संयुक्त विज्ञापन से जुड़ा है। जिसमें श्रेणी तृतीय और चतुर्थ पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इस विज्ञापन में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद भी शामिल थे। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि बीईओ ऑफिस के लिए ये पद पहले से ही नियमित आधार पर स्वीकृत थे।

उन्होंने यह भी बताया कि 18 सितंबर 2007 को नियमित भर्ती पर लगाया गया प्रतिबंध उस समय तक हटा लिया गया था, जब विज्ञापन जारी हुआ। ऐसे में नियमित भर्ती में कोई कानूनी बाधा नहीं थी। इसके बावजूद विज्ञापन में पदों को संविदात्मक बताया गया।

परिवीक्षा अवधि बना अहम आधार

याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2012-13 में निश्चित वेतन पर की गई थी। उनके नियुक्ति आदेश में दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि का प्रावधान भी था। जो सामान्यतः नियमित नियुक्तियों में लागू होता है। दस वर्षों से अधिक सेवा देने के बाद दोनों ने 21 जनवरी 2022 को नियमितीकरण की मांग का अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। जिसे 25 अक्टूबर 2022 को खारिज कर दिया गया था।

सरकार का आदेश रद्द, नियमित करने का निर्देश

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 25 अक्टूबर 2022 के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को स्वीकृत नियमित पदों के विरुद्ध नियमित किया जाए।

संविदाकर्मियों के लिए मिसाल

इस फैसले को संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में अन्य विभागों में कार्यरत संविदाकर्मियों के मामलों में भी मिसाल साबित हो सकता है।

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