अब जूता-छिपाई और फोन पर बातचीत बंद... सेन समाज ने बदले सगाई-शादी के नियम
Harrison Masih | Mar 05, 2026, 12:47 IST
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सेन समाज ने शादी और सामाजिक परंपराओं में बड़ा बदलाव करते हुए जूता-छिपाई जैसी रस्मों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही सगाई के बाद शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन की मोबाइल पर निजी बातचीत भी बंद करने का फैसला लिया गया है।
NEWS IN SHORT
- सेन समाज ने शादी की कई रस्मों पर प्रतिबंध लगाया
- सगाई के बाद लड़का-लड़की की मोबाइल पर निजी बातचीत पर रोक
- रिश्ता तय करने के दौरान लड़का या लड़की पक्ष से अधिकतम 15 लोगों के जाने की सीमा
- सगाई में अंगूठी पहनाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई
- विधवा महिलाओं को विवाह और संस्कारों में पूर्ण अधिकार देने और बेटियों को अंतिम संस्कार में कंधा देने की अनुमति
NEWS IN DETAIL
सेन समाज का बड़ा फैसला
समाज का मानना है कि इन रस्मों के दौरान अक्सर पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती थी, जिससे रिश्तों में तनाव पैदा होता था। इसलिए सामाजिक सहमति के बाद यह फैसला लिया गया है।
मोबाइल पर बातचीत पर रोक
इसी वजह से अब सगाई के बाद शादी तक दोनों के बीच मोबाइल पर निजी बातचीत पर रोक लगा दी गई है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में बातचीत जरूरी हो तो वह केवल माता-पिता की मौजूदगी में ही हो सकेगी।
रिश्ता तोड़ने पर होगी कार्रवाई
समाज का उद्देश्य है कि ऐसे फैसलों से अनावश्यक विवाद, मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।
शादी की परंपराओं में भी बदलाव
- सेन समाज ने विवाह से जुड़ी कई अन्य परंपराओं में भी बदलाव किए हैं।
- रिश्ता तय करने के दौरान अधिकतम 15 लोग ही दूसरे पक्ष के घर जाएंगे।
- सगाई में अंगूठी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
- वरमाला केवल विवाह के दिन ही पहनाई जाएगी।
- शादी की रस्मों में 100-100 रुपए देने का सामान्य नियम बनाया गया है।
महिलाओं को सम्मान और समानता का अधिकार
- सेन समाज ने महिलाओं को अधिक अधिकार देने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
- विधवा महिलाओं को पुत्र-पुत्री के विवाह और अन्य संस्कारों में पूर्ण अधिकार दिया गया है।
- बेटा न होने की स्थिति में बेटियों को अंतिम संस्कार में कंधा देने की अनुमति दी गई है।
- समाज में छोटे-बड़े “पार” की परंपरा समाप्त कर समानता का संदेश दिया गया है।
- इसके अलावा मृत्यु के बाद कफन ओढ़ाने की प्रथा बंद कर मृतक परिवार को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है।
अन्य समाजों में भी सामाजिक सुधार
धोबी समाज
धोबी समाज में विवाह से पहले दूल्हा-दुल्हन दोनों का मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य किया गया है, ताकि उम्र और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी स्पष्ट हो सके।
मनवा कुर्मी समाज
मनवा कुर्मी समाज ने मृत्युभोज, DJ और प्री-वेडिंग शूट पर प्रतिबंध लगा दिया है।
साहू समाज
साहू समाज ने विधवा महिलाओं के लिए तालाब में चूड़ी उतारने की प्रथा बंद कर दी है। अब महिलाएं घर पर ही यह रस्म पूरी कर सकती हैं।
पटेल और कुर्मी समाज
पटेल समाज ने शादी में बुफे सिस्टम पर प्रतिबंध लगाकर सादा भोजन का नियम बनाया है, जिसमें दाल-चावल, बड़ा, पुड़ी और एक मीठा शामिल होगा।
मराठी और अन्य समाज
मराठी समाज में बच्चों में संस्कार बढ़ाने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती और पुण्यतिथि मनाई जाती है, जबकि राजपूत और निषाद समाज गरीब परिवारों की शादी और शोक के समय आर्थिक मदद करने की पहल कर रहे हैं।
निष्कर्ष
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