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Raipur. छत्तीसगढ़ में जिस तरह से खनन संबंधी उद्योग बढ़ रहे हैं। जिससे लोगों का स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा बन गया है। उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई ऐश लोगों के स्वास्थ्य को बिगाड़ रही है।
सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। यह मुद्दा विधानसभा में भी जोर शोर से उठ रहा है। सरकार ने अपने बजट में भी इसके प्रबंधन पर खास ज़ोर दिया है।
कांग्रेस का सवाल, सरकार का जवाब:
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले में संचालित उन उद्योगों की जानकारी मांगी, जिनसे फ्लाई ऐश (Fly Ash) निकलता है।
उन्होंने 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान अवैध या बिना अनुमति फ्लाई ऐश डंपिंग के मामलों और उन पर हुई कार्रवाई का ब्योरा भी पूछा। साथ ही फ्लाई ऐश और कोयले के परिवहन से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने और लागू करने को लेकर सवाल उठाए।
ओपी चौधरी का जवाब:
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि रायगढ़ जिले में 24 ताप विद्युत संयंत्र राख का उपयोग भू भराव और खदान भराव में कर रहे हैं। इनमें से छह संयंत्र अपने ऐश डाइक में अस्थायी रूप से राख का भंडारण भी करते हैं।
मंत्री ने कहा कि 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की अवधि में अवैध या बिना अनुमति फ्लाई ऐश डंपिंग के 49 मामले संज्ञान में आए हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने उद्योगों से होने वाले अपशिष्ट परिवहन में प्रदूषण रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जो 1 अगस्त 2024 से लागू है। इसके अलावा औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और निगरानी प्रणाली 1 मई 2025 से प्रभावी की गई है।
कांग्रेस से 10 गुना ज्यादा कार्रवाई :
उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि बोतल्दा और बनीपाथर गांवों के पास सड़क किनारे अब भी फ्लाई ऐश फेंकी जा रही है और अधिकारियों द्वारा गलत जानकारी दी जा रही है।
इस पर मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में परिवहन उल्लंघनों पर कार्रवाई पिछली कांग्रेस सरकार की तुलना में 10 गुना ज्यादा हुई है।
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