भारत माला में हुआ 500 करोड़ से ज्यादा का खेल, राजस्व के 25 अधिकारी जाएंगे जेल

Arun Tiwari | Feb 17, 2026, 17:15 IST
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More than Rs 500 crore played in Bharat Mala
Photograph: (the sootr)

छत्तीसगढ़ में भारत माला परियोजना में 500 करोड़ के मुआवजा घोटाले का पर्दाफाश हुआ। 25 से अधिक राजस्व अधिकारियों की गिरफ्तारी हो सकती है, जिनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

news in short :

  • भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला मामला
  • 500 करोड़ पार पहुंचेगा आंकड़ा
  • जांच एजेंसी को 11 जिलों से मिली जानकारी
  • राजस्व के 25 अधिकारी जा सकते है जेल
RAIPUR. छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट में हुआ घोटाला 500 करोड़ के पार पहुंच सकता है। ईओडब्ल्यू के पास 11 जिलों से आ रही प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आ रहा है कि बड़े पैमाने पर यह घोटाला हुआ है। इस घोटाले में राजस्व विभाग के कई अधिकारी रडार पर हैं।

सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसी राजस्व के 25 अधिकारियों को गिरफ्तार कर सकती है। प्रमाणों के आधार पर इन अधिकारियों की लिस्ट तैयार हो रही है। हाल ही में गिरफ्तार हुए डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और तहसीलदार लखेश्वर पसाद से पूछताछ में कई अहम सुराग ईओडब्ल्यू के हाथ लगे हैं।

news in detaill :

500 करोड़ के पार पहुंचा घोटाला

छत्तीसगढ़ के भारतमाला प्रोजेक्ट में बड़ा घोटाला सामने आ रहा है। 11 जिलों तक पहुंची इसकी जांच ने ईओडब्ल्यू को हैरान कर दिया है। 11 जिलों से होकर गुजर रहे रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर में मुआवजा वितरण में 500 करोड़ रुपए तक के घोटाला होने की बात सामने आ रही है।

इस घोटाले की जांच में राज्य के कई अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि यह स्थिति तब है जब पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि राज्य की जांच एजेंसी एनएचएआई अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।

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राजस्व के 25 अफसरों पर लटकी तलवार

जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि इस घोटाले में शामिल 25 से अधिक राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारियों की जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है। ईओडब्ल्यू ने उन अधिकारियों और रसूखदारों की सूची तैयार कर ली है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए 500 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित की है।

शासन के खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने की कानूनी प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। जांच एजेंसी को हाल ही में गिरफ्तार हुए शशिकांत कुर्रे और लखेश्वर प्रसाद से पूछताछ में कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। इन सुरागों के आधार पर फरार तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू की भी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।

भारतमाला के करॅप्ट किरदार

  1. निर्भय साहू, एसडीएम
  2. लखेश्वर प्रसाद किरण नायब तहसीलदार
  3. शशिकांत कुर्रे, तहसीलदार
  4. जितेंद्र कुमार साहू, पटवारी
  5. दीपक देव इंजीनियर, जल संसाधन विभाग
  6. रोशन लाल वर्मा, आरआई
  7. विजय जैन, कारोबारी
  8. अमरजीत सिंह गिल, बैंक मैनेजर
  9. हरजीत सिंह खनूजा, जमीन दलाल
  10. उमा तिवारी, फर्जी मुआवजा लेने वाली आरोपी
  11. दिनेश पटेल तत्कालीन पटवारी
  12. लेखराम देवांगन तत्कालीन पटवारी
  13. बसंती घृतलहरे तत्कालीन पटवारी
  14. विनय कुमार गांधी, कारोबारी
  15. हृदय लाल गिलहरे, ग्रामीण
  16. योगेश कुमार देवांगन, ग्रामीण

अब आगे क्या

जांच एजेंसियों ने इन 11 जिलों से कई दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें मुआवजा वितरण, भूमि विभाजन और भुगतान से जुड़े अहम सबूत शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, घोटाले की रकम और बढ़ सकती है तथा और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसी इन सबूतों के आधार पर आगे बड़ी कार्रवाई कर सकती है।

निष्कर्ष

भारत माला मुआवजा घोटाले ने न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि विकास परियोजनाओं की आड़ में किस तरह सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, जिससे प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल तेज हो गई है।

the sootr knowledge

भारत माला परियोजना का मकसद राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार करना था, लेकिन मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। जांच में पाया गया कि भूमि अधिग्रहण के दौरान एक ही खसरे की जमीन को कागजों में कई हिस्सों में बांटकर दिखाया गया। इससे एक ही जमीन पर बार-बार मुआवजा लिया गया या फिर दरों को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर भुगतान कराया गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वर्गमीटर से कम भूमि पर मुआवजा दर अधिक होने का प्रावधान है। इसी नियम का दुरुपयोग करते हुए बड़ी-बड़ी जमीनों को कागजों पर छोटे टुकड़ों में विभाजित किया गया। उदाहरण के तौर पर जिस एक एकड़ जमीन का वास्तविक मुआवजा करीब 20 लाख रुपये बनता था, उसे फर्जी विभाजन दिखाकर करोड़ों रुपये तक पहुंचा दिया गया। अब तक 500 से अधिक खसरों को जांच के दायरे में लिया जा चुका है।

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important points :

  • 500 करोड़ का मुआवजा घोटाला उजागर
  • बड़ी जमीनों को कागजों में छोटे-छोटे टुकड़ों में दिखाकर एक ही खसरे पर बार-बार या बढ़ी हुई दरों पर मुआवजा लिया गया।
  • 25 से ज्यादा अफसर जांच के घेरे में
  • 500 से अधिक खसरे और हजारों दस्तावेज जब्त
  • एनएचएआई अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
Tags:
  • जांच एजेंसी
  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
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