छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के 6 नेता दोषमुक्त, 15 साल पुराना मामला
VINAY VERMA | Jan 06, 2026, 21:58 IST
Photograph: (the sootr)
रायपुर कोर्ट ने 15 साल पुराने केस में कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल समेत 6 नेताओं को दोषमुक्त कर दिया है। यह जीत विपक्ष के संघर्ष की बड़ी जीत मानी जा रही है।
RAIPUR. छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े एक 15 साल पुराने मामले में रायपुर कोर्ट ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुबोध हरितवाल सहित छह कांग्रेस नेताओं को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
दोषमुक्त किए गए कांग्रेस नेताओं में सुबोध हरितवाल, गुलजेब अहमद, इस्माइल अहमद, डॉ. रामेश्वर सोनवानी, शाहबाज हुसैन और नदीम सलाट शामिल हैं। मामला 2010 का है, जब तत्कालीन भाजपा सरकार में रायपुर के 108 एंबुलेंस सेवा के निजीकरण के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन किया गया था।
प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं पर मौदहापारा पुलिस द्वारा गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने कांग्रेस नेताओं पर बलवा, मारपीट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए थे। इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के बाद यह केस न्यायालय में विचाराधीन रहा। जो लगभग 15 वर्षों तक चला।
हालांकि मुकदमे की लंबी अवधि के दौरान अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। अदालत में अभियोजन की ओर से केवल एक ही गवाह पेश किया जा सका। जिसे आरोपों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
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कांग्रेस नेताओं के बचाव में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता भगवानू नायक ने अदालत में यह स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक प्रेरित था। नायक ने कहा कि इस मुकदमे का उद्देश्य विपक्ष के नेताओं को डराना और दबाना था, और इसके लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं पेश किए गए। इसके बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सभी छह नेताओं को दोषमुक्त घोषित किया। जिसके बाद न्यायिक दंडाधिकारी सावित्री रक्सेल की न्यायालय ने सभी छह आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया।
फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने राहत की सांस ली। कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल ने कहा कि यह भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्षता और मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने कहा, “हम भारतीय न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हैं। भाजपा शासनकाल में हमें राजनीतिक कारणों से झूठे मामलों में फंसाया गया था। 15 लंबे वर्षों के बाद आज हमें न्याय मिला है। यह साबित करता है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।” सुबोध हरितवाल ने आगे कहा कि यह फैसला उस राजनीतिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है, जहां सत्ता के दुरुपयोग के जरिए विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है।
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कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर उत्साह देखा गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह निर्णय केवल छह नेताओं के लिए राहत नहीं है, बल्कि सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए भी एक संदेश है। जो लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं और बाद में राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार होते हैं।
दोषमुक्त किए गए कांग्रेस नेताओं में सुबोध हरितवाल, गुलजेब अहमद, इस्माइल अहमद, डॉ. रामेश्वर सोनवानी, शाहबाज हुसैन और नदीम सलाट शामिल हैं। मामला 2010 का है, जब तत्कालीन भाजपा सरकार में रायपुर के 108 एंबुलेंस सेवा के निजीकरण के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन किया गया था।
कांग्रेस नेताओं पर क्या था आरोप?
हालांकि मुकदमे की लंबी अवधि के दौरान अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। अदालत में अभियोजन की ओर से केवल एक ही गवाह पेश किया जा सका। जिसे आरोपों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
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बचाव पक्ष मजबूत रहा
बरी हुए नेताओं ने माना आभार
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