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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ की 6,000 पदों की आरक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई।
- जस्टिस पीपी साहू ने नए नियुक्ति पत्र जारी करने पर स्टे दिया।
- भर्ती में फिजिकल टेस्ट और मेरिट लिस्ट में गंभीर गड़बड़ी का आरोप।
- आउटसोर्स एजेंसी टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड पर अनियमितता के आरोप।
- मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।
NEWS IN DETAIL
आरक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ में 6 हजार पदों के लिए हुई आरक्षक भर्ती परीक्षा में 2500 नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। बाकी बचे 3 हजार 500 पदों के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। इसमें कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है। अगली सुनवाई तक अब कोई भी नियुक्ति नहीं होगी। भर्ती प्रक्रिया पर कोर्ट ने सुनवाई की और राज्य सरकार से रिकॉर्ड भी तलब किया। कोर्ट ने भर्ती में फिजिकल टेस्ट और मेरिट लिस्ट में अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
जस्टिस पीपी साहू की एकलपीठ ने अगली सुनवाई तक नए नियुक्ति पत्र जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
प्रदेश के सभी जिलों में रिक्त आरक्षक पदों के लिए लिखित और शारीरिक परीक्षा आयोजित की गई थी।
चयन सूची जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने मेरिट में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
वर्ष 2023 में करीब 6000 कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।
कई जिलों के अभ्यर्थियों ने दायर की याचिका
सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली जिलों के अभ्यर्थी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान सहित अन्य ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।
कम अंक वालों के चयन का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मेरिट में स्थान पाने वाले योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर कम अंक लाने वालों को चयनित किया गया।
इससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। भर्ती के दौरान फिजिकल टेस्ट का डेटा रिकॉर्ड करने का कार्य आउटसोर्स एजेंसी टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था।
आरोप है कि एजेंसी ने निष्पक्षता नहीं बरती और पैसों के लेन-देन के जरिए कई अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिया।
बिलासपुर एसएसपी के पत्र को बनाया आधार
याचिकाकर्ताओं ने 19 दिसंबर 2024 को बिलासपुर एसएसपी एवं चयन समिति अध्यक्ष द्वारा पुलिस मुख्यालय रायपुर को लिखे पत्र को आधार बनाया।
इस पत्र में फिजिकल टेस्ट के दौरान गड़बड़ियों की आधिकारिक पुष्टि की गई थी। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि फिजिकल टेस्ट के दौरान गलत डेटा एंट्री की गई और 129 अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
इतना ही नहीं, संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए गए।
भर्ती नियम 2007 के उल्लंघन का आरोप
याचिका में कहा गया है कि पुलिस भर्ती नियम 2007 के नियम-7 के अनुसार अनियमितता पाए जाने पर पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त की जानी चाहिए। इसके बावजूद चयन सूची और नियुक्ति आदेश जारी करना गैरकानूनी है।
हाईकोर्ट को बताया गया कि 6,000 में से लगभग 2,500 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र पहले ही दिए जा चुके हैं। यदि आगे नियुक्तियां जारी रहीं तो जांच प्रभावित हो सकती है।
Sootr Knowledge
- पुलिस भर्ती नियम 2007 भर्ती प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
- फिजिकल टेस्ट भर्ती का सबसे संवेदनशील चरण होता है।
- आउटसोर्स एजेंसियों की भूमिका अक्सर विवादों में रहती है।
- मेरिट से छेड़छाड़ सीधे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
- हाईकोर्ट अंतरिम रोक के जरिए यथास्थिति बनाए रखता है।
IMP FACTS
- कुल पद: 6,000
- नियुक्ति पत्र जारी: लगभग 2,500
- आरोपी आउटसोर्स एजेंसी: टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड
- अनुचित लाभ पाने वाले अभ्यर्थी: 129
- अगली सुनवाई: 23 फरवरी
आगे क्या
- राज्य सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करना होगा।
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जांच रिपोर्ट और रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा।
- जरूरत पड़ी तो पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द हो सकती है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ कांस्टेबल भर्ती (cg Constable Recruitment) प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक ने भर्ती की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो पूरी भर्ती निरस्त होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब सभी की नजरें 23 फरवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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