भाजपा शासनकाल में किसानों की आय होगी दोगुनी, समझाने वाला नेता खुद उगाता था अवैध अफीम

VINAY VERMA | Mar 08, 2026, 24:12 IST
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Photograph: (the sootr)

छत्तीसगढ़ में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के खेत में 8 करोड़ की अफीम की अवैध खेती का खुलासा. पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सरकार पर संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

News in short

  • आरटीआई एक्टिविस्ट है विनायक
  • 150 एकड़ जमीन पर कब्जे का आरोप
  • भाजपा किसान मोर्चा का पदाधिकारी था विनायक
  • किसानों की आय दोगुनी का करता था प्रचार
  • अफीम का प्रोसेसिंग यूनिट कहां? बड़ा सवाल
  • 24 घंटे बाद भी आरोपी विनायक ताम्रकार फरार

News in detail

छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती करने वाले विनायक ताम्रकार के पास भाजपा की ओर से बड़ी जिम्मेदारी थी। वह प्रदेश में घूम-घूमकर किसानों से मिलता और उन्हें बताता कि भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जो किसानों की आय दोगुनी कर सकती है।

यह काम वह भाजपा किसान मोर्चा के पदाधिकारी के रूप में करता था। अफीम की अवैध खेती का खुलासा होने के बाद भाजपा ने उसे पार्टी से निकाल दिया है।

दुर्ग जिले के समोदा गांव में अफीम की अवैध खेती पर कई अन्य खुलासे हुए हैं। अफीम की अवैध खेती करने वाला विनायक ताम्रकार आरटीआई एक्टिविस्ट भी था।

वह आरटीआई के जरिए दस्तावेज निकालकर लोगों को धमकाता था। उसी दस्तावेज के जरिए विनायक ने गांव की 150 एकड़ से ज्यादा शासकीय जमीन पर कब्जा कर रखा था।

आरटीआई एक्टिविस्ट होने के कारण दुर्ग सहित आसपास के जिलों के प्रशासनिक महकमे में उसकी पैठ थी। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आरोप है कि विनायक ताम्रकार का संबंध जिले के सांसद, गृहमंत्री सहित कलेक्टर और बड़े IAS अधिकारियों से है। भूपेश बघेल ने मामले को विधानसभा में उठाने की बात कही है।

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एआई की मदद से खुलासा

अफीम की अवैध खेती का खुलासा तब हुआ जब होलिका दहन के लिए लकड़ी जुटाने गांव के कुछ लड़के भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के खेत में पहुंच गए। लकड़ी इकट्ठा करने के दौरान उन्होंने खेत में लगी फसल की तस्वीरें भी अपने मोबाइल से खींच लीं। यह तस्वीरें गांव के सरपंच अरुण गौतम तक पहुंचीं। फसल को देखकर उन्हें संदेह हुआ कि यह सामान्य खेती नहीं है। इसके बाद उन्होंने फसल की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद ली। एआई के जरिए यह स्पष्ट हुआ कि खेत में अफीम उगाई जा रही है।

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कार्रवाई के बजाय गिरफ्तारी

फसल की पहचान होते ही सरपंच अरुण गौतम ने तुरंत पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना दी। आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद पुलिस तत्काल मौके पर नहीं पहुंची। होली के दिन रात में पुलिस ने सूचना देने वाले सरपंच अरुण गौतम को ही गिरफ्तार कर लिया। इधर खुलासा होने के 24 घंटे बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। उसे फरार बताया जा रहा है।

5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अफीम

पुलिस के मुताबिक जिस खेत में अफीम की खेती की जा रही थी वह लगभग 5 एकड़ 62 डिसमिल जमीन में फैली हुई थी। प्राथमिक अनुमान के अनुसार इस अवैध फसल की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को आरोपी बनाया है, हालांकि दोनों आरोपी मौके से फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर खेती होने के बावजूद लंबे समय तक किसी को इसकी जानकारी न होना कई सवाल खड़े करता है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहुंचे मौके पर

मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद खेत देखने मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के संबंध प्रदेश के गृह मंत्री, दुर्ग के सांसद और जिले के कई अधिकारियों से हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं है।

तीन साल से खेती, फिर भी पुलिस को भनक नहीं

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अफीम की खेती पिछले तीन साल से हो रही थी तो पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। अफीम के पौधों की एक खास गंध होती है जो दूर तक फैलती है। ग्रामीणों का भी कहना है कि यदि समय रहते जांच होती तो यह मामला पहले ही सामने आ सकता था।

प्रोसेसिंग और बाजार को लेकर भी सवाल

मामले में एक और बड़ा सवाल यह है कि तीन साल से खेत में उगाई जा रही अफीम को प्रोसेस कहां किया जाता था। अफीम से डोडा, हिरोइन और ब्राउन शुगर जैसे नशीले पदार्थ तैयार किए जाते हैं। वहीं इससे खसखस भी बनाया जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन होने पर इसके लिए एक पूरा नेटवर्क होना जरूरी है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि यह अफीम कहां भेजी जाती थी और किस बाजार में इसकी सप्लाई होती थी? अगर राज्य मे ंप्रोसेसिंग यूनिट है तो इसका खुलासा क्यों नहीं हो रहा।

सख्त नियंत्रण में होती है अफीम

अफीम की खेती भारत में पूरी तरह नियंत्रित व्यवस्था के तहत होती है। इसकी खेती केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की निगरानी में ही की जा सकती है। सरकार लाइसेंस प्राप्त किसानों से करीब 2000 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से अफीम खरीदती है, जबकि तस्कर इसे काले बाजार में करीब एक लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक बेचते हैं। अफीम से मॉर्फिन जैसी शक्तिशाली दर्द निवारक दवाएं भी बनाई जाती हैं।

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सरकार की बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी

सूत्रों के अनुसार अब प्रशासन इस मामले में सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि जिस खेत में अफीम की खेती की गई थी वहां बुलडोजर चलाने की तैयारी की जा रही है। भाजपा ने विनायक को पार्टी से निकाल बाहर किया है। लेकिन केवल खेत पर कार्रवाई करने से मामला खत्म नहीं होगा। इस पूरे नेटवर्क की जांच हो और यह पता लगाया जाए कि आखिर तीन साल तक यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चलता रहा।

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