फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ता छत्तीसगढ़, निवेश, रोजगार और लोकल ब्रांड को नई ताकत
The Sootr | Jan 28, 2026, 16:23 IST
Impact Feature
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ फूड प्रोसेसिंग हब बनने की ओर अग्रसर है। निवेश प्रोत्साहन, नई औद्योगिक नीति और जशप्योर जैसे लोकल ब्रांड्स के जरिए राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
Raipur. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार कृषि को उद्योग से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार देने और लोकल उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री साय ने पिछले दिनों नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री चिराग पासवान से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस मुलाकात को छत्तीसगढ़ के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के दौरान दोनों के बीच छत्तीसगढ़ से जुड़े कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने खास तौर पर खाद्य सुरक्षा, कृषि आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के विस्तार से जुड़े विषयों पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में मजबूत आधार रखता है और अगर यहां आधुनिक फूड प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होता है तो इससे किसानों, युवाओं और छोटे उद्यमियों को बड़ा फायदा मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ में की जाए। उन्होंने बताया कि इस संस्थान से राज्य के युवाओं को आधुनिक फूड टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग तकनीक और फूड इंडस्ट्री से जुड़े रोजगार के अवसरों की ट्रेनिंग मिल सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संस्थान से हजारों छात्र, किसान और फूड बेस्ड स्टार्टअप सीधे लाभान्वित होंगे। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव को सकारात्मक तरीके से लेते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिया और कहा कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि वर्ल्ड फूड इंडिया के रीजनल समिट का आयोजन रायपुर में किया जाना चाहिए। उन्होंने रायपुर की कनेक्टिविटी, खाद्य परंपरा और विविध कृषि उत्पादों का जिक्र करते हुए कहा कि यह शहर ऐसे बड़े आयोजन के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि ऐसा आयोजन क्षेत्रीय खाद्य परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाएगा और फूड सेक्टर में निवेश और स्टार्टअप के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यह आयोजन हर दो साल में दिल्ली के वर्ल्ड फूड इंडिया या गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट फूड फेस्ट की तरह आयोजित किया जाए।
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फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए प्रदेश में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर भी काम चल रहा है। प्रदेश में फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने और खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए फूड इर्रेडिएशन यूनिट बनाने की योजना है। इन प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य सरकार केंद्र से सहयोग चाहती है। इन सुविधाओं के शुरू होने से खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच और स्टोरेज क्षमता में बड़ा सुधार आएगा।
राज्य की नई औद्योगिक नीति में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को खास प्राथमिकता दी गई है। निवेशकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा उद्योग राज्य में आएं। इसी नीति के तहत Drools कंपनी छत्तीसगढ़ में लगभग एक हजार करोड़ रुपए का निवेश कर रही है। इस निवेश से करीब 3 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसका फायदा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंचेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को राइस ब्रान ऑयल हब के रूप में विकसित करना है। इससे देश की तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार मानती है कि छत्तीसगढ़ में धान उत्पादन ज्यादा होता है और इसी वजह से राइस ब्रान ऑयल उत्पादन के लिए यहां बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इन बदलावों से नीति को ज्यादा निवेश अनुकूल, स्पष्ट और प्रतिस्पर्धी बनाया गया है। इससे औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में नए अवसर बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है। सरकार का फोकस रोजगार बढ़ाने और उद्योगों को सरल प्रक्रियाओं के जरिए आकर्षित करने पर है।
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जशपुर जिले को फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में एक उभरते ब्रांड के रूप में तैयार किया जा रहा है। जशपुर की जलवायु और भौगोलिक स्थिति कई तरह की फसलों के लिए अनुकूल है। यहां धान, कोदो-कुटकी, रागी, सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, काजू, कटहल, अदरक, हल्दी, नींबू, चाय और महुआ जैसी फसलों का अच्छा उत्पादन होता है।
फूड प्रोसेसिंग के जरिए इन उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं जैसे स्नैक्स, हेल्दी ब्रेकफास्ट प्रोडक्ट, एनर्जी बार और रेडी टू ईट या रेडी टू कुक फूड। इसे लेकर वहां स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
जशप्योर ब्रांड पहले से लोकप्रिय है और अब इसे नई पहचान देने की तैयारी है। सरकार ने फैसला किया है कि जशपुर की महिलाओं के लोकल ब्रांड जशप्योर का ट्रेडमार्क उद्योग विभाग को सौंपा जाएगा। इससे इस ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
जशपुर की महिलाएं महुआ और अन्य वनोपज से कई तरह के उत्पाद बना रही हैं। इनमें महुआ जूस, महुआ लड्डू, कुकीज, कैंडी, रागी पास्ता और कोदो-कुटकी चावल जैसे हेल्दी उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों की खासियत यह है कि इनमें किसी तरह की मिलावट या केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता। ये पूरी तरह प्राकृतिक और स्वदेशी होते हैं। इसी वजह से इन्हें फॉरेस्ट गोल्ड या ग्रीन गोल्ड भी कहा जा रहा है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल विजन को आगे बढ़ाते हुए जशप्योर जैसे लोकल ब्रांड को नई ताकत दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल आदिवासी महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने में मदद करेगी।
अभी जशप्योर से जुड़ी 90 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं आदिवासी समुदाय से हैं और वे प्रोडक्ट बनाने से लेकर पैकिंग और मार्केटिंग तक हर स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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इसी कड़ी में मुख्यमंत्री साय ने पिछले दिनों नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री चिराग पासवान से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस मुलाकात को छत्तीसगढ़ के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के दौरान दोनों के बीच छत्तीसगढ़ से जुड़े कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने खास तौर पर खाद्य सुरक्षा, कृषि आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के विस्तार से जुड़े विषयों पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में मजबूत आधार रखता है और अगर यहां आधुनिक फूड प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होता है तो इससे किसानों, युवाओं और छोटे उद्यमियों को बड़ा फायदा मिलेगा।
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NIFTEM की स्थापना छग में हो
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संस्थान से हजारों छात्र, किसान और फूड बेस्ड स्टार्टअप सीधे लाभान्वित होंगे। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव को सकारात्मक तरीके से लेते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिया और कहा कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि वर्ल्ड फूड इंडिया के रीजनल समिट का आयोजन रायपुर में किया जाना चाहिए। उन्होंने रायपुर की कनेक्टिविटी, खाद्य परंपरा और विविध कृषि उत्पादों का जिक्र करते हुए कहा कि यह शहर ऐसे बड़े आयोजन के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि ऐसा आयोजन क्षेत्रीय खाद्य परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाएगा और फूड सेक्टर में निवेश और स्टार्टअप के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यह आयोजन हर दो साल में दिल्ली के वर्ल्ड फूड इंडिया या गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट फूड फेस्ट की तरह आयोजित किया जाए।
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सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर
राज्य की नई औद्योगिक नीति में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को खास प्राथमिकता दी गई है। निवेशकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा उद्योग राज्य में आएं। इसी नीति के तहत Drools कंपनी छत्तीसगढ़ में लगभग एक हजार करोड़ रुपए का निवेश कर रही है। इस निवेश से करीब 3 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसका फायदा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंचेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
राइस ब्रान ऑयल हब बनेगा प्रदेश
राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इन बदलावों से नीति को ज्यादा निवेश अनुकूल, स्पष्ट और प्रतिस्पर्धी बनाया गया है। इससे औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में नए अवसर बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है। सरकार का फोकस रोजगार बढ़ाने और उद्योगों को सरल प्रक्रियाओं के जरिए आकर्षित करने पर है।
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तेजी से उभर रहा जशपुर
फूड प्रोसेसिंग के जरिए इन उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं जैसे स्नैक्स, हेल्दी ब्रेकफास्ट प्रोडक्ट, एनर्जी बार और रेडी टू ईट या रेडी टू कुक फूड। इसे लेकर वहां स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
जशप्योर ब्रांड पहले से लोकप्रिय है और अब इसे नई पहचान देने की तैयारी है। सरकार ने फैसला किया है कि जशपुर की महिलाओं के लोकल ब्रांड जशप्योर का ट्रेडमार्क उद्योग विभाग को सौंपा जाएगा। इससे इस ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
जशपुर की महिलाएं महुआ और अन्य वनोपज से कई तरह के उत्पाद बना रही हैं। इनमें महुआ जूस, महुआ लड्डू, कुकीज, कैंडी, रागी पास्ता और कोदो-कुटकी चावल जैसे हेल्दी उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों की खासियत यह है कि इनमें किसी तरह की मिलावट या केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता। ये पूरी तरह प्राकृतिक और स्वदेशी होते हैं। इसी वजह से इन्हें फॉरेस्ट गोल्ड या ग्रीन गोल्ड भी कहा जा रहा है।
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महिलाओं की भूमिका अहम: सीएम
अभी जशप्योर से जुड़ी 90 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं आदिवासी समुदाय से हैं और वे प्रोडक्ट बनाने से लेकर पैकिंग और मार्केटिंग तक हर स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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