अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा : छत्तीसगढ़ में 7 साल की जेल और 1 लाख जुर्माना
Umeshwari Baghel | Aug 18, 2026, 16:56 IST
अवैध कॉलोनी पर 7 साल जेल
छत्तीसगढ़ में अवैध कॉलोनियों पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। बिना रजिस्ट्रेशन और विकास अनुमति कॉलोनी बनाने पर 3 से 7 साल तक जेल और कम से कम 1 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। प्लॉट खरीदने से पहले दस्तावेज जांचना जरूरी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
- प्लॉट खरीदने से पहले जरूर जांचें जरूरी दस्तावेज
- नियम तोड़े तो 7 साल तक हो सकती है जेल
- कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन और विकास अनुमति जरूरी
- EWS के लिए 15 प्रतिशत जमीन रखना अनिवार्य
प्रशासन ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। प्लॉट या मकान खरीदने से पहले केवल विज्ञापन और कॉलोनाइजर के दावों पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। खरीदारों को रजिस्ट्रेशन, विकास अनुमति और स्वीकृत ले-आउट जैसे दस्तावेज जरूर देखने चाहिए।
कॉलोनी बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी
इसी तरह मकान या अपार्टमेंट बनाकर बेचने वाले बिल्डर के लिए भी जरूरी पंजीयन प्रमाण-पत्र होना चाहिए। बिना रजिस्ट्रेशन और अनुमति के कॉलोनी विकसित करने पर संबंधित निकाय कार्रवाई कर सकता है। यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 और कॉलोनाइजर से संबंधित नियमों के तहत लागू की गई है।
अवैध कॉलोनी पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई
इसके साथ कम से कम एक लाख रुपए जुर्माना भी लगाया जा सकता है। न्यायालय परिस्थितियों के आधार पर प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर राशि देने का आदेश भी दे सकता है। इसलिए केवल जमीन की रजिस्ट्री हो जाना किसी कॉलोनी को पूरी तरह वैध साबित नहीं करता।
पांच साल तक मान्य रहता है कॉलोनाइजर का पंजीयन
हर कॉलोनी के लिए सक्षम अधिकारी से अलग विकास अनुमति लेना जरूरी होता है। स्वीकृति में कॉलोनी का ले-आउट, सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं का विवरण शामिल होता है। इसका उद्देश्य यह है कि लोगों को प्लॉट बेचने के बाद जरूरी सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े।
EWS के लिए 15 प्रतिशत जमीन का प्रावधान
इसके अलावा कॉलोनी के कुछ भूखंड संबंधित नगरपालिका के पास बंधक रखे जाते हैं। ये भूखंड विकास कार्य पूरे होने तक सुरक्षा के तौर पर रखे जाते हैं। इस व्यवस्था से कॉलोनाइजर पर सड़क, पानी, नाली और दूसरी सुविधाएं पूरी करने का दबाव बना रहता है।
प्लॉट खरीदने से पहले क्या जांचें
इसके बाद कॉलोनी की विकास अनुमति और स्वीकृत ले-आउट जांचना जरूरी है। खरीदार को यह भी देखना चाहिए कि जिस प्लॉट की खरीद की जा रही है, वह नगरपालिका के पास बंधक तो नहीं है।
इसके अलावा कॉलोनी में मंजूर विकास कार्य वास्तव में पूरे हुए हैं या केवल कागजों पर दिखाए गए हैं, इसकी जानकारी भी लेनी चाहिए।
सिर्फ सस्ता प्लॉट देखकर फैसला न करें
ऐसे मामलों में वर्षों तक कानूनी विवाद भी चल सकते हैं। इसलिए जमीन खरीदते समय जल्दबाजी करने के बजाय दस्तावेजों की सरकारी स्तर पर जांच करवाना सुरक्षित तरीका है।
सूरजपुर जिला प्रशासन ने भी कॉलोनाइजरों और बिल्डरों से नियमों का पालन करने को कहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में अवैध कॉलोनी बनाने पर कितनी सजा हो सकती है?
दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक जेल और कम से कम 1 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। - प्लॉट खरीदने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज जांचने चाहिए?
कॉलोनाइजर रजिस्ट्रेशन, विकास अनुमति, स्वीकृत ले-आउट और प्लॉट की बंधक स्थिति जरूर जांचें। - क्या सिर्फ रजिस्ट्री होने से प्लॉट पूरी तरह वैध माना जाता है?
नहीं, रजिस्ट्री के साथ कॉलोनी की जरूरी सरकारी मंजूरी और विकास अनुमति भी होना जरूरी है।
ये खबरें भी पढ़े...
ग्वालियर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा, तीन माह के अंदर वसूल करें राशि
सूरजपुर में स्कूल गेट पर छात्रों का प्रदर्शन, प्राचार्य पर अभद्रता के आरोप
संविदा-प्लेसमेंट कर्मियों को iGOT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava