डांगी पर आरोप सही, चार्जशीट जारी; पीड़िता की आपत्ति पर बदले अफसर, अब IPS पारुल माथुर रखेंगी पक्ष
VINAY VERMA | Oct 15, 2026, 22:07 IST
सस्पेंडेड IPS डांगी की बढ़ीं मुश्किलें
छत्तीसगढ़ के सस्पेंडेड IPS
के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों पर अब विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ेगी। प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद उनके खिलाफ आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। डीजीपी ने 14 अक्टूबर को हाईकोर्ट में यह जानकारी दी। इस मामले में पीड़िता की आपत्ति के बाद पुलिस विभाग को अपना अफसर भी बदलना पड़ा है।
अब IPS पारुल माथुर विभाग की ओर से पक्ष रखेंगी, जबकि ADG दीपांशु काबराको जांच अधिकारी बनाया गया है।
मामला सिर्फ आरोप और जांच तक सीमित नहीं रहा। पुलिस विभाग की एक महिला सब इंस्पेक्टर की पत्नी ने पहले ही जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि शुरुआती जांच में निष्पक्षता नहीं बरती गई और डांगी को बचाने की कोशिश हो रही है। इसी आधार पर उन्होंने महिला अधिकारी से मामले की जांच कराने की मांग की थी। पीड़िता की याचिका पर हाईकोर्ट ने गृह सचिव और DGP से जवाब मांगा था। अब अधिकारियों की नियुक्ति और आरोप पत्र जारी होने की जानकारी अदालत को दी गई है।
पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रतन लाल डांगी पिछले सात साल से उनका शारीरिक और मानसिक शोषण कर रहे थे। मामला सामने आने के बाद डांगी को पद से हटाया गया और बाद में निलंबित कर दिया गया। गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने पद से हटाने का आदेश जारी किया था। हालांकि, डांगी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा बताया है। ऐसे में विभागीय जांच के नतीजे और आगे की कार्रवाई इस मामले में अहम होंगे।
इस मामले में पहले IPS प्रशांत अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाने की जानकारी दी गई थी। लेकिन पीड़िता ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि महिला अपराध से जुड़े इतने संवेदनशील मामले में महिला अधिकारी को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। इसके बाद गृह सचिव ने प्रशांत अग्रवाल की जगह IPS पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त कर दिया। अब विभाग की तरफ से मामले में पक्ष रखने की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। वहीं, ADG दीपांशु काबरा विभागीय जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे।
पीड़िता के वकील अभिषेक पांडेय के मुताबिक, 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान DGP ने अदालत को बताया कि प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद डांगी को आरोप पत्र जारी किया गया है। जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति की जानकारी भी अदालत को दी गई। गृह सचिव और DGP के जवाब से संतुष्ट होने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। इसका मतलब यह नहीं है कि यौन शोषण के आरोपों पर अदालत ने दोष साबित कर दिया है। अब आगे की प्रक्रिया विभागीय जांच के जरिए चलेगी।
पीड़िता ने शुरुआत में ही जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विभागीय जांच कितनी पारदर्शी तरीके से पूरी होती है और उसके आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है। प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित होने और आरोप पत्र जारी होने के बाद विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। क्या इस बार जांच में पीड़िता को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा मिलेगा? क्या विभागीय जांच में सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल होगी? इन सवालों के जवाब आगे की कार्रवाई से ही मिलेंगे।
पीड़िता ने जताया था शक
सात साल तक शोषण का आरोप
अफसर बदलने की नौबत क्यों आई?
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अब सबसे बड़ा सवाल
नक्सल खत्म हुआ, अब निशानियां मिटाएंगे, अमित शाह बोले, कांग्रेस ने बस्तर को कुछ नहीं दिया
By Arun Tiwari
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें...जबलपुर से इंदौर तक बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, MP SI भर्ती में फॉर्म भरने का फिर मिला मौका
By Sandeep Kumar
छत्तीसगढ़ के तीन राज्य सेवा अफसर बने IAS, केंद्र ने जारी किया आदेश, 2025 की रिक्तियों के आधार पर मिला कैडर
By VINAY VERMA
गरबे में नशा: इंदौर पुलिस ने विजनयगर के सजनप्रभा में हो रहे रास रात्रि गरबा को किया सील
By Sanjay Gupta
MP SI भर्ती: हाई कोर्ट के आदेश पर ESB ने फिर खोला पोर्टल, 20 अक्टूबर तक भर सकेंगे फॉर्म
By Neel Tiwari
CG Top News : सड़क हादसे में पूर्व मंत्री के भाई समेत 3 की मौत, कोल स्कैम में कांग्रेस नेताओं की बढ़ी मुश्किलें, दिवाली पर स्कूलों की छुट्टियां बढ़ी
By Umeshwari Baghel
Rajasthan Top News: मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बेटे ने भरा निर्दलीय नामांकन, बोले-कार्यकर्ताओं में नाराजगी
By Ashish Bhardwaj