डांगी केस में जांच की कुर्सी पर बदला नाम, पहले प्रशांत अग्रवाल, फिर पारुल माथुर, 12 दिन में ऐसा क्या हुआ
Arun Tiwari | Oct 08, 2026, 16:35 IST
आईपीएस रतन लाल डांगी केस
Raipur. छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी से जुड़े चर्चित मामले में जांच की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार सवाल सीधे आरोपों या जांच की दिशा को लेकर नहीं, बल्कि उस अधिकारी के नाम को लेकर उठ रहा है जिसे विभागीय जांच में सरकार का पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी जानी थी।
17 सितंबर 2026 को भेजे गए प्रस्ताव में आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल का नाम प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के तौर पर सामने आया था, लेकिन 29 सितंबर को जारी अंतिम आदेश में उनकी जगह महिला आईपीएस पारुल माथुर को यह जिम्मेदारी दे दी गई। महज 12 दिनों के अंतराल में हुए इस बदलाव ने पूरी प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
रतन लाल डांगी के खिलाफ एक महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपों की जांच शुरू हुई, लेकिन शिकायतकर्ता ने जांच की प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। बाद में मामला न्यायालय तक पहुंचा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई, जिसमें निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
हाईकोर्ट ने मामले में गृह सचिव और पुलिस मुख्यालय से जवाब मांगा था। मामले में पहले की जांच को लेकर भी शिकायतकर्ता की ओर से आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इसी वजह से आगे की जांच के लिए नई व्यवस्था पर विचार किया गया। हाईकोर्ट के समक्ष सरकार की ओर से नई जांच व्यवस्था को लेकर जानकारी भी दी गई थी।
इस पूरे प्रकरण में एक व्हाट्सऐप चैट सामने आने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आया। खबरों के मुताबिक इस चैट में आईपीएस रतन लाल डांगी की ओर से कई अधिकारियों को लेकर टिप्पणियां की गई थीं। इसी बातचीत में सीएम सचिवालय में तैनात अफसर का नाम भी आया था। इसके बाद डांगी के खिलाफ कार्रवाई हुई और मामला विभागीय जांच के दायरे में पहुंचा। पहले की जांच व्यवस्था को लेकर सवाल उठने के बाद नई जांच की जरूरत सामने आई।
नई व्यवस्था के तहत 17 सितंबर को पुलिस मुख्यालय की ओर से गृह विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में आईपीएस दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी और आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने की बात सामने आई। प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की भूमिका विभागीय जांच में सरकार की ओर से पक्ष रखने और मामले से संबंधित दस्तावेज एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने की होती है। यानी इस स्तर पर फाइल में दो नाम स्पष्ट दिखाई दे रहे थे जांच अधिकारी के तौर पर दीपांशु काबरा और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के तौर पर प्रशांत अग्रवाल। लेकिन अंतिम आदेश आने तक तस्वीर बदल गई।
29 सितंबर को गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में दीपांशु काबरा का नाम जांच अधिकारी के रूप में कायम रहा, लेकिन प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की जिम्मेदारी प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला आईपीएस पारुल माथुर को दे दी गई। यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर 17 सितंबर से 29 सितंबर के बीच ऐसा क्या हुआ कि प्रस्तावित नाम बदल दिया गया। क्या यह सामान्य प्रशासनिक बदलाव था,क्या संवेदनशील मामले को देखते हुए सरकार या विभाग ने अंतिम स्तर पर किसी दूसरे अधिकारी को जिम्मेदारी देने का फैसला किया या इसके पीछे कोई और प्रशासनिक कारण था। फिलहाल सामने आए आदेश में इस बदलाव की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
प्रशांत अग्रवाल का नाम सामने आने के बाद उनके रायपुर एसएसपी के कार्यकाल से जुड़े कुछ पुराने मामलों की चर्चा भी शुरू हुई है। मूल रिपोर्ट में महिलाओं से जुड़ी कुछ शिकायतों के संदर्भ में उनके कार्यकाल का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन मामलों में प्रशांत अग्रवाल को दोषी ठहराने वाला कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं है। चूंकि मौजूदा मामला खुद एक महिला की शिकायत से जुड़ा है और जांच की निष्पक्षता पहले ही अदालत के सामने मुद्दा बन चुकी है, ऐसे में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के चयन में हुए बदलाव ने स्वाभाविक रूप से चर्चा बढ़ा दी है।
अंतिम आदेश के बाद अब विभागीय जांच में जांच अधिकारी के रूप में दीपांशु काबरा और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में पारुल माथुर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हाईकोर्ट में भी निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में नई जांच व्यवस्था से उम्मीद यही होगी कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े और शिकायतकर्ता तथा आरोपी दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।
पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन देखें तो तस्वीर कुछ इस तरह बनती है। महिला की शिकायत, जांच प्रक्रिया पर सवाल, मामला हाईकोर्ट तक पहुंचना, नई जांच व्यवस्था का प्रस्ताव, 17 सितंबर को प्रशांत अग्रवाल का नाम और फिर 29 सितंबर को उनकी जगह पारुल माथुर की नियुक्ति। फिलहाल सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल यही है कि प्रस्ताव से अंतिम आदेश तक प्रशांत अग्रवाल का नाम क्यों बदला गया।
इसका आधिकारिक कारण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या किसी विशेष परिस्थिति में लिया गया निर्णय। तब तक इस बदलाव को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब फाइल और जांच की आगे की कार्रवाई से ही मिलने की उम्मीद है।
महिला की शिकायत से शुरू हुआ था मामला
हाईकोर्ट ने मामले में गृह सचिव और पुलिस मुख्यालय से जवाब मांगा था। मामले में पहले की जांच को लेकर भी शिकायतकर्ता की ओर से आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। इसी वजह से आगे की जांच के लिए नई व्यवस्था पर विचार किया गया। हाईकोर्ट के समक्ष सरकार की ओर से नई जांच व्यवस्था को लेकर जानकारी भी दी गई थी।
व्हाट्सऐप चैट ने बढ़ाई थी हलचल
नई जांच में दीपांशु काबरा का नाम
29 सितंबर को बदला नाम
पुराने मामलों की चर्चा क्यों
अब जांच की निगाह पारुल माथुर पर
पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन देखें तो तस्वीर कुछ इस तरह बनती है। महिला की शिकायत, जांच प्रक्रिया पर सवाल, मामला हाईकोर्ट तक पहुंचना, नई जांच व्यवस्था का प्रस्ताव, 17 सितंबर को प्रशांत अग्रवाल का नाम और फिर 29 सितंबर को उनकी जगह पारुल माथुर की नियुक्ति। फिलहाल सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल यही है कि प्रस्ताव से अंतिम आदेश तक प्रशांत अग्रवाल का नाम क्यों बदला गया।
इसका आधिकारिक कारण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या किसी विशेष परिस्थिति में लिया गया निर्णय। तब तक इस बदलाव को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब फाइल और जांच की आगे की कार्रवाई से ही मिलने की उम्मीद है।
सड़कों पर ट्रैक्टर, जगह-जगह चक्काजाम: 1700 करोड़ भुगतान को लेकर किसानों का प्रदर्शन, कवर्धा में राहगीर परेशान
By Umeshwari Baghel
तलाक के लिए अब छह महीने का इंतजार जरूरी नहीं, इंदौर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश पलटा
By Anshika Singh Chauhan
एमपी पुलिस भर्ती में चौंकाने वाले आंकड़े! पिछले साल के मुकाबले 2.25 लाख आवेदन घटे, जानें क्या है वजह
By Manya Jain
एमपी के युवाओं के लिए रोजगार का नया प्लान: हर जिले में तलाशे जाएंगे नए मौके, स्किल ट्रेनिंग पर भी जोर
By Sumit Kumar
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, बोले- कर रहे हैं राजनीतिक नौटंकी
By Ashish Bhardwaj
पूर्व जज गिरिबाला की जमानत फिर अटकी! दहेज हत्या की धारा हटने के दावे पर CBI ने क्या कहा?
By Neel Tiwari
डोटासरा बोले- विपक्ष को डंडों से पीटा; जूली ने सरकार पर लगाए गुंडागर्दी के आरोप, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा
By Jyoti Mahender Bhardwaj