छत्तीसगढ़ में न्यूनतम वेतन का नया फॉर्मूला, अब वैज्ञानिक गणना से बढ़ेगी मजदूरी

Aishwarya Dwivedi | Apr 21, 2026, 10:41 IST
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छत्तीसगढ़ में नई मजदूरी संहिता लागू, न्यूनतम वेतन वैज्ञानिक आधार पर तय होगा। श्रमिकों को चार श्रेणियों में बांटा जाएगा और पुराने नियम समाप्त होंगे। समान वेतन सभी कर्मचारियों पर लागू होगा।

NEWS IN SHORT

  • नई मजदूरी संहिता लागू।
  • न्यूनतम मजदूरी वैज्ञानिक आधार पर तय होगी।
  • श्रमिकों को चार श्रेणियों में बांटा जाएगा।
  • सभी कर्मचारियों पर समान न्यूनतम वेतन लागू।
  • पुराने नियम समाप्त होंगे।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के श्रमिकों के हित में नई मजदूरी संहिता को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। अब राज्य में दशकों पुराने श्रम कानूनों को हटाकर एक आधुनिक और न्यायसंगत व्यवस्था स्थापित की जाएगी। इस नई संहिता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब श्रमिकों का वेतन केवल काम के घंटों पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक गणना पर आधारित होगा।

रोटी, कपड़ा और मकान

नई संहिता के तहत, न्यूनतम वेतन का निर्धारण करते समय एक श्रमिक परिवार की बुनियादी जरूरतों को केंद्र में रखा गया है। अब वेतन तय करते समय पांच मुख्य बिंदुओं को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा:

पोषण (रोटी): परिवार के प्रति सदस्य के लिए 2700 कैलोरी ऊर्जा सुनिश्चित करने वाला भोजन।

वस्त्र (कपड़ा): प्रति परिवार सालाना 66 मीटर कपड़े की जरूरत।

आवास (मकान): कुल भोजन और कपड़े के खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा मकान किराए के रूप में।

शिक्षा: बच्चों की पढ़ाई का खर्च।

स्वास्थ्य: परिवार के इलाज और दवाओं पर होने वाला व्यय।

समान काम, समान अधिकार

नए नियमों के अनुसार,अब लिंग (पुरुष/महिला) या आयु के आधार पर वेतन में कोई भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, राज्य का न्यूनतम वेतन केंद्र द्वारा निर्धारित 'फ्लोर वेज' से कम नहीं हो सकेगा। यह प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को देश के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में कम आंका जाए।

कौशल के आधार पर चार श्रेणियां

श्रमिकों की कार्यकुशलता और उनके अनुभव को सम्मान देने के लिए नई संहिता में उन्हें चार प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

अकुशल (Unskilled): वे काम जिनमें केवल शारीरिक श्रम और सामान्य परिचालन अनुभव की जरूरत होती है।

अर्द्धकुशल (Semi-skilled): वे कार्य जिन्हें करने के लिए कुछ अनुभव और पर्यवेक्षण (Supervision) की आवश्यकता होती है।

कुशल (Skilled): तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त श्रमिक जो विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम हैं।

अत्यधिक कुशल (Highly Skilled): विशिष्ट निपुणता, गहन तकनीकी ज्ञान और उच्च स्तर के अनुभव वाले विशेषज्ञ।

गणना का आधार

वेतन निर्धारण के लिए एक 'स्टैंडर्ड वर्किंग क्लास फैमिली' का पैमाना तय किया गया है। इसमें पति, पत्नी और दो बच्चों को शामिल किया गया है, जिसे कुल तीन वयस्क उपभोग इकाइयां माना गया है। इसी इकाई के आधार पर कैलोरी, कपड़ा और आवास के खर्चों को जोड़कर न्यूनतम वेतन का अंतिम आंकड़ा निकाला जाएगा।

समाप्त होंगे 60 साल पुराने कानून

इस नई संहिता के लागू होते ही छत्तीसगढ़ में दशकों से चले आ रहे पुराने नियम इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से न्यूनतम वेतन (छत्तीसगढ़) नियम, 1958 और छत्तीसगढ़ वेतन भुगतान नियम, 1962 शामिल हैं। राज्य सरकार का मानना है कि पुराने कानून आज की महंगाई और जीवनशैली के अनुरूप नहीं थे।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य में औद्योगिक शांति और श्रमिकों की आर्थिक समृद्धि की नई इबारत लिखेगा। 'वैज्ञानिक आधार' पर वेतन मिलने से न केवल श्रमिकों का शोषण रुकेगा, बल्कि उनकी क्रय शक्ति बढ़ने से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

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