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Photograph: (thesootr)
News In Short
छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और समय सीमा पर कड़ा ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण की निगरानी के लिए अलग यूनिट बनाने की बात कही।
सड़क निर्माण में बिलो रेट पर टेंडर लेने वालों की जवाबदेही तय होगी।
300 गांवों में प्राथमिकता से सड़क निर्माण की योजना बनाई गई।
मंत्री और मुख्यमंत्री के हाथों सड़क निर्माण के शिलान्यास होंगे।
News In Detail
प्रदेश में सड़क निर्माण में क्वॉलिटी और समय सीमा में लापरवाही को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय में हुई बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि काम में कमी मिली तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव भी थे।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि अब निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि यह पब्लिक से जुड़ा मामला है, इससे सरकार की छवि बनती और बिगड़ती है।
अलग-अलग यूनिट के आदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने की जरुरत है।
माननीयों के हाथों भूमिपूजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण (road construction) कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाए।
बैठक में बागबहारा-कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।
समय पर पूरा हो काम
मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया टेंडर से लेकर निर्माण टाइम लिमिट में पूरी हो। साथ में यह भी कहा कि बिलो रेट पर टेंडर लेने वाले ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।
300 गांवों पर विशेष फोकस
प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है। सीएम ने आदेश दिया है कि इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण प्राथमिकता से हो।
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