प्राचार्यों के प्रमोशन का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने प्रमोशन पर लगी रोक हटाई
Pravesh Shukla | Jul 01, 2025, 14:23 IST
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्राचार्यों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रमोशन के आदेश जारी होने के बाद पोस्टिंग पर लगी रोक हटा दी है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्राचार्यों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्रमोशन के आदेश जारी होने के बाद पोस्टिंग पर लगी रोक हटा दी है। प्राचार्य पदोन्नति फोरम के साथ ही प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं।
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इन याचिकाओं में बताया गया था कि, पहले कोर्ट के आदेश के बावजूद कई शिक्षकों को प्राचार्य पद पर प्रमोशन देकर ज्वॉइन करा दिया गया। सुनवाई के बाद जस्टिस रजनी दुबे की बेंच ने इस पर फैसला सुसक्षित रख लिया था। जिस पर कोर्ट ने मंगलवार को आदेश जारी किया। पोस्टिंग के खिलाफ लगी याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने इसे कोर्ट की अवमानना का मामला माना। शुरुआती सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आगामी आदेश तक की गई सभी ज्वॉइनिंग को अमान्य कर दिया था।
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इस मामले में जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच में बीते 11 जून से 16 जून तक सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने बहस के दौरान बीएड डिग्री को प्राचार्य पद के लिए जरूरी बताया। इसके अलावा, उन्होंने माध्यमिक स्कूलों के प्रधान पाठकों से लेक्चरर बने शिक्षकों की वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया।
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हाईकोर्ट में लगाई गई याचिकाओं का एक मामला साल 2019 से जुड़ा हुआ है। जबकी दूसरी याचिकाएं 2025 में बीएड और डीएलएड योग्यता से संबंधित हैं। इस दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि प्रमोशन के नियम को लेकर सभी कैटेगरी के शिक्षको के हितों का ध्यान रखा गया है। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।
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इन याचिकाओं में बताया गया था कि, पहले कोर्ट के आदेश के बावजूद कई शिक्षकों को प्राचार्य पद पर प्रमोशन देकर ज्वॉइन करा दिया गया। सुनवाई के बाद जस्टिस रजनी दुबे की बेंच ने इस पर फैसला सुसक्षित रख लिया था। जिस पर कोर्ट ने मंगलवार को आदेश जारी किया। पोस्टिंग के खिलाफ लगी याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने इसे कोर्ट की अवमानना का मामला माना। शुरुआती सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आगामी आदेश तक की गई सभी ज्वॉइनिंग को अमान्य कर दिया था।
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बीएड की अनिवार्यता को दी थी चुनौती
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सरकार की कोर्ट से दलील
हाईकोर्ट में लगाई गई याचिकाओं का एक मामला साल 2019 से जुड़ा हुआ है। जबकी दूसरी याचिकाएं 2025 में बीएड और डीएलएड योग्यता से संबंधित हैं। इस दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि प्रमोशन के नियम को लेकर सभी कैटेगरी के शिक्षको के हितों का ध्यान रखा गया है। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।
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FAQ
- छत्तीसगढ़ में प्राचार्यों के प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्राचार्यों के प्रमोशन के आदेश के बाद पोस्टिंग पर लगी रोक को हटा दिया है, जिससे प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में प्राचार्यों के प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्राचार्यों के प्रमोशन के आदेश के बाद पोस्टिंग पर लगी रोक को हटा दिया है, जिससे प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है। - याचिकाकर्ताओं ने बीएड डिग्री को लेकर कोर्ट में क्या तर्क दिया?
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि प्राचार्य पद के लिए बीएड डिग्री अनिवार्य होनी चाहिए और साथ ही प्रधान पाठकों से लेक्चरर बने शिक्षकों की वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया। - राज्य सरकार ने कोर्ट में प्रमोशन नियमों को लेकर क्या सफाई दी?
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि प्रमोशन के नियम सभी कैटेगरी के शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।
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