मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ पूरे देश में नंबर 1, लाखों गर्भवती महिलाओं को मिली मदद
The Sootr | Mar 19, 2026, 15:55 IST
Impact Feature
छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के सफल क्रियान्वयन में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य ने पंजीकरण और भुगतान प्रक्रिया में रिकॉर्ड बनाया है।
Raipur. छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि किसी योजना को जमीन पर सही तरीके से लागू किया जाए तो उसका असर सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के क्रियान्वयन में देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि उन लाखों महिलाओं की कहानी है, जिन तक समय पर मदद पहुंची और जिनका मातृत्व ज्यादा सुरक्षित हुआ।
इस योजना का मकसद गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उनके पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में तेज काम करते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सफलता प्रशासनिक टीम की लगातार निगरानी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत और पूरे सिस्टम के समन्वय का परिणाम है।
इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण है रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में तेजी। प्रदेश सरकार ने शुरुआत से ही यह तय किया कि ज्यादा से ज्यादा गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन हो। वर्ष 2023-24 में 1,75,797 महिलाओं ने इस योजना में रजिस्ट्रेशन कराया था। इसके बाद 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2,19,012 हो गई।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जो तय लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है। यह बताता है कि योजना को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है और सिस्टम भी ज्यादा सक्रिय हुआ है।
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रजिस्ट्रेशन के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है आवेदन को मंजूरी देना और समय पर भुगतान करना। छत्तीसगढ़ ने इस हिस्से में भी तेजी दिखाई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने फॉर्म भरवाने में मदद की। पर्यवेक्षकों ने उनका सत्यापन किया और परियोजना अधिकारी से लेकर प्रदेश स्तर तक मंजूरी की प्रक्रिया को तेज किया गया।
परिणाम यह हुआ कि कुल आवेदनों में से 83 प्रतिशत का परीक्षण कर उन्हें भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से स्वीकृति मिलने की दर भी 83.87 प्रतिशत रही, जो देश में सबसे अधिक है।
किसी भी योजना की असली परीक्षा तब होती है जब लोगों की शिकायतें सामने आती हैं। यहां भी छत्तीसगढ़ ने बेहतर काम किया है। अधिकतर शिकायतें भुगतान में देरी से जुड़ी थीं। प्रशासन ने इन्हें प्राथमिकता पर लिया और जहां कमी मिली, उसे तुरंत दूर किया गया। राज्य में 93 प्रतिशत शिकायतों का समाधान कर लिया गया।
हालांकि केंद्र के आंकड़ों में 30 दिन से अधिक लंबित शिकायतें 7 प्रतिशत दर्ज की गईं, लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर बना रहा। यह दिखाता है कि सरकार सिर्फ योजना शुरू करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करने पर भी ध्यान दिया गया।
यदि पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो योजना का असर साफ दिखाई देता है। छत्तीसगढ़ में अब तक 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इनमें से 5,40,624 महिलाओं को स्वीकृति मिल चुकी है। यह आंकड़े बताते हैं कि योजना का दायरा तेजी से बढ़ा है और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचा है।
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को कुल 5 हजार रुपए की सहायता दी जाती है। दूसरी बेटी के जन्म पर यह राशि बढ़ाकर 6 हजार रुपए कर दी जाती है।
यह पैसा तीन किस्तों में दिया जाता है...
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि इस योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक मदद मिल रही है, जिससे सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिल रहा है। सरकार का मानना है कि जब गर्भवती महिला स्वस्थ होगी, तभी आने वाली पीढ़ी भी स्वस्थ होगी। इसी सोच के साथ इस योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आपको बता दें कि इस योजना का असर अब गांव-गांव में दिख रहा है। महिलाएं समय पर अस्पताल जा रही हैं, जांच करा रही हैं और बच्चों का टीकाकरण भी बेहतर तरीके से हो रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार घर-घर जाकर महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। इससे संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है और शिशु मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिल रही है।
छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि एक संकेत है कि सही योजना, मजबूत मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर काम करने से बड़े बदलाव संभव हैं। राज्य सरकार अब इस मॉडल को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि हर जरूरतमंद महिला तक समय पर मदद पहुंच सके। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना ने छत्तीसगढ़ में सिर्फ आंकड़े नहीं बनाए, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में सुरक्षा, भरोसा और नई उम्मीद दी है।
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इस योजना का मकसद गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उनके पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में तेज काम करते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह सफलता प्रशासनिक टीम की लगातार निगरानी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत और पूरे सिस्टम के समन्वय का परिणाम है।
तेज रजिस्ट्रेशन से बनी मजबूत नींव
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2,04,138 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जो तय लक्ष्य का 93.3 प्रतिशत है। यह बताता है कि योजना को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है और सिस्टम भी ज्यादा सक्रिय हुआ है।
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आवेदन से भुगतान तक तेज प्रक्रिया
परिणाम यह हुआ कि कुल आवेदनों में से 83 प्रतिशत का परीक्षण कर उन्हें भुगतान के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से स्वीकृति मिलने की दर भी 83.87 प्रतिशत रही, जो देश में सबसे अधिक है।
शिकायतों के समाधान में भी आगे
हालांकि केंद्र के आंकड़ों में 30 दिन से अधिक लंबित शिकायतें 7 प्रतिशत दर्ज की गईं, लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर बना रहा। यह दिखाता है कि सरकार सिर्फ योजना शुरू करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करने पर भी ध्यान दिया गया।
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3 साल में लाखों महिलाओं को मिला लाभ
कैसे मिलती है आर्थिक मदद
यह पैसा तीन किस्तों में दिया जाता है...
- रजिस्ट्रेशन के समय 1,000 रुपए
- छह महीने बाद 2,000 रुपए
- बच्चे के जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद 2,000 रुपए
इस सहायता का मकसद यह है कि गर्भवती महिला को पौष्टिक आहार मिले, वह समय पर जांच कराए और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो सके।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस
आपको बता दें कि इस योजना का असर अब गांव-गांव में दिख रहा है। महिलाएं समय पर अस्पताल जा रही हैं, जांच करा रही हैं और बच्चों का टीकाकरण भी बेहतर तरीके से हो रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार घर-घर जाकर महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। इससे संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है और शिशु मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिल रही है।
सुरक्षा, भरोसा और नई उम्मीद
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