छत्तीसगढ़ की रेवेन्यू कोर्ट में प्रतिदिन लाखों की वसूली, उगाही के लिए निजी कर्मचारी
VINAY VERMA | Mar 01, 2026, 10:42 IST
chhattisgarh revenue court corruption illegal staff transfer
छत्तीसगढ़ के तहसील कार्यालयों में फौती नामांतरण के नाम पर अवैध वसूली का बड़ा खुलासा हुआ है। यहां सरकारी काम के लिए निजी लड़के रखे गए थे। विवाद के बाद 13 बाबुओं का तबादला कर दिया गया है।
Raipur. छत्तीसगढ़ के तहसील कार्यालयों में वसूली का खेल जोर-शोर से चल रहा है। यहां काम करने के एवज में बड़े पैसे की मांग तो होती ही है, हद तो यह है कि वसूली के लिए भी प्राइवेट लोगों को रखा गया है।
यह प्राइवेट कर्मचारी अवैध तरीके से बकायदा कोर्ट परिसर में बैठते हैं। बाकायदा उनका सीटिंग अरेंजमेंट होता है... वे शासकीय काम करते हैं, शासकीय सील-साइन लगाते हैं। दिनभर के वसूली का एक हिस्सा इनके हक में भी जाता है...
किसी को इसकी जानकारी नहीं होती। वहीं, हाल में हुए एक विवाद ने इस खेल की पोल खोल दी है। बहरहाल, बचाव में आनन-फानन में इन कर्मचारियों को रखने का जिम्मेदार ठहराते हुए दो शासकीय बाबुओं का तबादला कर दिया गया है।
तीन दिन पहले नायब तहसीलदार ख्याति नेताम की कोर्ट में एक विवाद हुआ था। कुछ वकील फौती नामांतरण* के लिए तहसील कार्यालय गए थे। इसी बीच सिविल के वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण कुमार त्रिपाठी की एसोसिएट एडवोकेट सुनीता अरख भी वहां गई थीं। वहीं, वहां मौजूद खुद को कर्मचारी बताने वाले लोग फौती नामांतरण का ऑर्डर देने के लिए वकीलों से पैसा मांगने लगे। सुनीता अरख ने इसका विरोध किया तो मौजूद कथित कर्मचारियों ने ऑर्डर कॉपी देने से मना कर दिया। साथ ही, नायब तहसीलदार से बात करने का कहने लगे।
बात जब उनके सीनियर कृष्ण कुमार त्रिपाठी तक पहुंची तो उन्होंने भी जाकर विरोध किया। इस दौरान पता चला कि वहां मौजूद सारे कर्मचारी का संबंध कोर्ट से नहीं था। वे वकीलों से पैसों की उगाही करने के लिए रखे गए थे। इस दौरान लंबा विवाद हुआ जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।
सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में कुछ वकील और वहां मौजूद कथित कर्मचारियों के बीच विवाद होता दिख रहा है। एक वरिष्ठ वकील कृष्ण कुमार त्रिपाठी अवैध पैसे लेने का विरोध कर रहे हैं। उस दौरान एक कथित कर्मचारी से उसका नाम पूछते हैं।
कथित कर्मचारी अपना नाम पहले राज और बाद में राज कुमार बताता है। वे पूरा नाम पूछने के दौरान अन्य जातियों का ऑप्शन देते हैं। जिसे लेकर कुछ लोग विरोध जता रहे हैं, जबकि वहां मौजूद सभी लोग उगाही के विरोध में थे।
कृष्ण कुमार त्रिपाठी का कहना है कि मैं 40 सालों से प्रैक्टिस कर रहा हूं। करीब 9 राज्यों की कोर्ट में मेरे केस लगे हैं। इसके बावजूद कभी किसी कोर्ट में सुविधा शुल्क नहीं दिया। मैं कभी पक्षकारों के पैसे अवैध रूप से देने का पक्षधर नहीं रहा।
रायपुर तहसील कार्यालय स्थित रेवेन्यू कोर्ट में भी ऐसा ही हुआ। मेरा नाम पूछने का मतलब उनकी जवाबदेही तय करने से था। बाद में पता चला कि वे सारे लोग अवैध तरीके से कोर्ट परिसर में बैठते हैं।
कृष्ण कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि उनके केस का ऑर्डर 15 फरवरी को ही हो चुका था। इसके बावजूद, इसे 25 फरवरी तक ऑनलाइन नहीं किया गया था। उसके पीछे का एक ही कारण है लेन-देन।
त्रिपाठी के अनुसार वसूली के संबंध में नायब तहसीलदार की सफाई है कि वीडियो में दिख रहे लोगों का संबंध कोर्ट से नहीं है। लेकिन कोर्ट में वे किस नियम के तहत काम कर रहे थे, इस संबंध में वे मौन हो जाती हैं।
25 फरवरी के विवाद के बाद जब इसका वीडियो वायरल हुआ तो 27 तारीख को वहां के कुछ कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया था। अवैध रूप से कोर्ट परिसर में जमे कर्मचारी भी अब कोर्ट नहीं आ रहे हैं।
इस मामले में thesootr ने नायब तहसीलदार ख्याति नेताम से भी बात की। उनका कहना था कि मैं पिछले 1 सप्ताह से मेडिकल लीव पर हूं, इसलिए न तो इस मामले में मुझे जानकारी है और न ही मैं कुछ बता पाऊंगी।
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यह प्राइवेट कर्मचारी अवैध तरीके से बकायदा कोर्ट परिसर में बैठते हैं। बाकायदा उनका सीटिंग अरेंजमेंट होता है... वे शासकीय काम करते हैं, शासकीय सील-साइन लगाते हैं। दिनभर के वसूली का एक हिस्सा इनके हक में भी जाता है...
किसी को इसकी जानकारी नहीं होती। वहीं, हाल में हुए एक विवाद ने इस खेल की पोल खोल दी है। बहरहाल, बचाव में आनन-फानन में इन कर्मचारियों को रखने का जिम्मेदार ठहराते हुए दो शासकीय बाबुओं का तबादला कर दिया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
बात जब उनके सीनियर कृष्ण कुमार त्रिपाठी तक पहुंची तो उन्होंने भी जाकर विरोध किया। इस दौरान पता चला कि वहां मौजूद सारे कर्मचारी का संबंध कोर्ट से नहीं था। वे वकीलों से पैसों की उगाही करने के लिए रखे गए थे। इस दौरान लंबा विवाद हुआ जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।
क्यों हो रही वीडियो की चर्चा?
कथित कर्मचारी अपना नाम पहले राज और बाद में राज कुमार बताता है। वे पूरा नाम पूछने के दौरान अन्य जातियों का ऑप्शन देते हैं। जिसे लेकर कुछ लोग विरोध जता रहे हैं, जबकि वहां मौजूद सभी लोग उगाही के विरोध में थे।
छत्तीसगढ़ की रेवेन्यू कोर्ट में प्रतिदिन हो रही लाखों की वसूली, वीडियो हुआ वायरल।#Chhattisgarh #RevenueCourt #viralvideo pic.twitter.com/B8Q1rrOoUz
— TheSootr (@TheSootr) March 1, 2026
क्या कहते हैं कृष्ण कुमार त्रिपाठी?
रायपुर तहसील कार्यालय स्थित रेवेन्यू कोर्ट में भी ऐसा ही हुआ। मेरा नाम पूछने का मतलब उनकी जवाबदेही तय करने से था। बाद में पता चला कि वे सारे लोग अवैध तरीके से कोर्ट परिसर में बैठते हैं।
नायब तहसीलदार ने झाड़ा पल्ला
त्रिपाठी के अनुसार वसूली के संबंध में नायब तहसीलदार की सफाई है कि वीडियो में दिख रहे लोगों का संबंध कोर्ट से नहीं है। लेकिन कोर्ट में वे किस नियम के तहत काम कर रहे थे, इस संबंध में वे मौन हो जाती हैं।
कर्मचारियों का हुआ ट्रांसफर
एक सप्ताह से मेडिकल लीव पर हूं- नायब तहसीलदार
क्या होता है *फौती नामांतरण? फौती नामांतरण एक कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत यदि जमीन के मालिकाना हक रखने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके वारिस को जमीन का मालिकाना हक ऑटोमैटिक ट्रांसफर हो जाता है। ऐसे में सरकारी दस्तावेज में मृतक का नाम हटाकर नए मालिक का नाम चढ़वाने के लिए रेवेन्यू कोर्ट से ऑर्डर करवाना होता है। इसके लिए कोर्ट के कर्मचारी अवैध रूप से 3 से 5 हजार रुपए की वसूली करते हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन एक कोर्ट में औसतन 30 मामले फौती नामांतरण के आते हैं।
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