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NEWS IN SHORT
- शराब घोटाला केस में सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली।
- इससे पहले उन्हें कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से बेल मिल चुकी है।
- दिसंबर 2025 में ED और EOW ने आबकारी घोटाले के नए मामले में फिर गिरफ्तार किया था।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने याचिका पर प्राथमिकता से सुनवाई की।
- चार्जशीट पेश होने के दिन जमानत प्रभावी होगी, करीब 45 दिन बाद रिहाई संभव।
NEWS IN DETAIL
हाईकोर्ट से मिली सशर्त राहत
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि, कोर्ट ने जमानत पर कुछ शर्तें लगाई हैं, जिसके कारण तत्काल रिहाई संभव नहीं है।
पहले कोयला घोटाले में हुई थी गिरफ्तारी
सौम्या चौरसिया को पहले कोयला घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
इसके बाद दिसंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने आबकारी/शराब घोटाले के नए मामले में उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
गिरफ्तारी के बाद सौम्या ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पहले हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया और कहा कि उनकी याचिका पर प्राथमिकता से सुनवाई की जाए।
क्या हैं जमानत की शर्तें?
सौम्या के वकील हर्षवर्धन परगनिहा के अनुसार, EOW मामले में जमानत मंजूर की गई है, लेकिन शर्त यह है कि जिस दिन इस केस में चार्जशीट पेश होगी, उसी दिन से जमानत प्रभावी मानी जाएगी।
वकील के मुताबिक, आज से लगभग 45 दिन बाद उनकी जेल से रिहाई संभव है। रिहाई के बाद उन्हें दूसरे राज्य में रहना पड़ सकता है।
6 बार हिरासत का दावा
सौम्या की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि जांच एजेंसियां बार-बार नई FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर रही हैं। अब तक उन्हें 6 बार हिरासत में लिया जा चुका है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करने के बजाय उन्हें हाईकोर्ट में नियमित जमानत याचिका दायर करने को कहा था।
Knowledge
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों की जांच करता है।
- EOW (Economic Offences Wing) राज्य स्तर पर आर्थिक अपराधों की जांच एजेंसी है।
- जमानत सशर्त हो सकती है, जिसमें कोर्ट विशेष शर्तें तय करता है।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होती है।
- सुप्रीम कोर्ट आवश्यक होने पर मामलों को हाईकोर्ट में प्राथमिकता से सुनवाई का निर्देश दे सकता है।
आगे क्या?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद सौम्या चौरसिया को औपचारिक रूप से जमानत पर रिहा किया जाएगा। इसके बाद ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। जांच एजेंसियां सबूत पेश करेंगी और अदालत में सुनवाई आगे बढ़ेगी। यदि किसी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जमानत रद्द भी हो सकती है।
निष्कर्ष
शराब घोटाला मामले में सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत (Soumya Chaurasia bail) ने मामले में नया मोड़ ला दिया है। हालांकि यह अंतिम राहत नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का एक चरण है। अब सबकी नजर चार्जशीट और आगामी ट्रायल पर रहेगी, जो इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेगा।
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