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Raipur. विधानसभा की कार्रवाई में छग के अधिकारियों की रुचि पर चर्चा शुरु हो गई है। 25 फरवरी को तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री के सामने ही अध्यक्ष से शिकायत कर दी।
इतना ही नहीं कुछ देर बाद कांग्रेस पार्टी के सदस्य यह कहते हुए सदन के बाहर चले गए कि जब सदन में अधिकारी आ जाएं, तब बुला लिया जाए। उनका कहना था कि सदन में मुख्यमंत्री तो मौजूद हैं लेकिन मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव जैसे अधिकारी मौजूद नहीं रहते।
क्या था पूरा मामला
दरअसल, 25 फरवरी को सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन पर चर्चा थी। यह सत्र का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। लेकिन मुख सचिव की कुर्सी खाली थी।
अपर मुख्य सचिव, विभागों के प्रमुख सचिव भी नजर नहीं आए। जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद सदन में मौजूद थे। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नाराज हो गए। भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने समर्थन किया तो वे पूरी कांग्रेस पार्टी सदन के बाहर चली गई।
चपरासी के भरोसे पूरा सदन
सदन में मंत्रालय के बड़े अधिकारियों के नामौजूगी पर पूर्व मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सदन में चपरासी स्तर के कर्मचारी ही मौजूद रहते हैं। सीएस, एसीएस या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी मौजूद नहीं हैं।
सदन में मौजूदगी जरुरी
पूर्व मंत्री खरसिया विधायक उमेश पटेल बताते हैं कि सदन में सीएस-एसीएस या प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों का मौजूद नहीं रहना गंभीर लापरवाही दर्शाता है।
उनकी जगह उप सचिवों को सदन के कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। संचालक स्तर पर कुछ विभाग सदन के पूरी कार्रवाई के लिए मौखिक आदेश के जरिए एक अधिकारी की नियुक्ति तक कर देते है।
केवल जिस दिन विभाग से संबंधित सवालों का मंत्री को जवाब देना होता है उस दिन ही संचालक या सचिव स्तर के अधिकारी विधानसभा जाते हैं। मुख्यमंत्री जब-जब सदन में मौजूद रहे बड़े अधिकारियो ंको उपस्थित रहना चाहिए।
जीएडी पहले से है गंभीर
सामान्य प्रशासन विभाग ने हाल ही में ऐसी ही लापरवाहियों को देखते हुए एक निर्देश जारी किए हैं। जिसमंे राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों के ऑफिस में गैरमौजूदगी को लेकर चिंता जताई गई है।
जीएडी ने स्पष्ट आदेश में कहा है कि अधिकारी केवल गुरुवार और शुक्रवार ही फील्ड पा जा सकते हैं।
लगातार मिलती थी शिकायत
बता दें कि कई अधिकारियों को लेकर लगातार शिकायत थी कि वे फील्ड विजिट के नाम पर ऑफिस से गायब रहते हैं। शिकायत पर जीएडी स्तर तक पहुंचा तो जीएडी सचिव अविनाश चंपावत ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया।
जिसमें अधिकारी केवल गुरुवार और शुक्रवार को ही फील्ड विजिट कर सकते हैं। बाकि दिन ऑफिस के काम, मीटिंग और जनता की समस्या सुनने के लिए निर्धारित किया गया है।
सरकार की चिंता, लेकिन तस्वीर वही
सरकार पहले भी अफसरों की अनुपस्थिति से चिंतित रही है। फील्ड विजिट के नाम पर ढील की शिकायतें आईं। जीएडी तक मामला पहुंचा था। अब विधानसभा सत्र में भी वही तस्वीर दिखी।
यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है। अहम बहस के समय अफसरों की कमी दिखती है। प्रश्नकाल में भी कई बार अधिकारी खोजे जाते हैं। मंत्री जवाब देते हैं, पर बैकअप नहीं दिखता।
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